तिरुवैयारु विधानसभा क्षेत्र (संख्या 173) तमिलनाडु के उपजाऊ कावेरी डेल्टा क्षेत्र में स्थित है और यह तंजावुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. यह सीट 1957 से अस्तित्व में है और यहां लंबे समय से द्रविड़ राजनीति की प्रमुख पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता रहा है, खासकर द्रविड़ मुन्नेत्र कजगम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच. इस क्षेत्र में DMK कई बार जीत हासिल कर चुकी है. सांस्कृतिक रूप से यह इलाका बेहद महत्वपूर्ण है, जो अपनी नदी-आधारित खेती और मंदिर परंपरा के लिए जाना जाता है. यहां के राजनीतिक रुझान पूरे कावेरी डेल्टा क्षेत्र जैसे ही हैं, जहां कल्याणकारी योजनाएं, सिंचाई और कृषि से जुड़े मुद्दे मतदाताओं के फैसलों को काफी प्रभावित करते हैं. यह स्थान महान संत त्यागराज की स्मृति के लिए भी प्रसिद्ध है, और हर साल जनवरी में यहां त्यागराज आराधना महोत्सव आयोजित किया जाता है, जो कर्नाटक संगीत का एक बड़ा आयोजन है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह क्षेत्र लंबे समय से द्रविड़ दलों के बीच एक प्रमुख मुकाबले का मैदान रहा है, जहां मुख्य रूप से DMK और AIADMK के बीच सीधी टक्कर होती है. यहां की राजनीति पर किसान समुदायों और डेल्टा क्षेत्र के किसानों का गहरा प्रभाव है. गांवों में OBC कृषि समुदायों और अनुसूचित जाति (SC) के मतदाता बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं. राजनीतिक गतिविधियां अक्सर किसान कल्याण, सिंचाई व्यवस्था और सहकारी संस्थाओं के इर्द-गिर्द घूमती हैं.
भौगोलिक रूप से तिरुवैयारु कावेरी नदी तंत्र के किनारे स्थित है, जहां कई सहायक नदियां (डिस्ट्रिब्यूटरीज) इस क्षेत्र से होकर गुजरती हैं. “तिरुवैयारु” नाम का मतलब ही “पांच नदियों की भूमि” है, जो कावेरी से निकलने वाली धाराओं को दर्शाता है. यह क्षेत्र तंजावुर के उत्तर में स्थित है और राज्य राजमार्गों के जरिए तंजावुर और आसपास के डेल्टा कस्बों से जुड़ा हुआ है. यहां का इलाका मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां घनी गांवों की बसावट है, जो कावेरी डेल्टा की खास पहचान है. पूरे क्षेत्र में धान के खेत और सिंचाई नहरें प्रमुख रूप से दिखाई देती हैं, जो यहां के जीवन और बसावट के पैटर्न को तय करती हैं.
यहां के प्रमुख क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) में दक्षिण कैलासम मंदिर शामिल है, जिसे शिव का दक्षिणी निवास माना जाता है. तिरुवैयारू शहर प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र है, जहां मंदिर और बाजार स्थित हैं. कल्लनई-कावेरी बेल्ट के गांव कृषि आधारित क्षेत्र हैं, जहां किसान संगठित रूप से सक्रिय रहते हैं. तंजावुर के पास के गांवों में कुछ जगहों पर अर्ध-शहरी विकास और युवाओं का पलायन भी देखा जाता है. इसके अलावा अनुसूचित जाति बहुल ग्रामीण बस्तियां चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, खासकर करीबी मुकाबलों में. मंदिरों के आसपास बसे गांवों में सांस्कृतिक आयोजन स्थानीय नेटवर्क और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां सबसे बड़ा सवाल कावेरी के पानी की उपलब्धता और सिंचाई प्रबंधन है, जो धान की खेती के लिए बेहद जरूरी है. इसके अलावा किसानों की आय स्थिरता, फसल के दामों में उतार-चढ़ाव, नहरों की सफाई (डी-सिल्टिंग) और सिंचाई ढांचे का रखरखाव भी बड़े मुद्दे हैं. ग्रामीण रोजगार की कमी के कारण युवाओं का तंजावुर और तिरुचिरापल्ली जैसे शहरों की ओर पलायन भी चिंता का विषय है. साथ ही ग्रामीण सड़कें, बस सेवा और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी महत्वपूर्ण मांगों में शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड आमतौर पर कृषि-केंद्रित होता है, जहां पानी की उपलब्धता और फसल की स्थिति सीधे चुनावी रुझान को प्रभावित करती है. सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन मतदाता संतुष्टि का बड़ा आधार होता है. स्थानीय विधायक की उपस्थिति और जनता से जुड़ाव भी मतदाताओं की सोच को प्रभावित करता है. लोग अक्सर राज्य सरकार के कामकाज का मूल्यांकन खासकर सिंचाई और ग्रामीण विकास के आधार पर करते हैं. यहां चुनाव आमतौर पर कड़े और प्रतिस्पर्धी होते हैं, और DMK व AIADMK के बीच वोट स्विंग की संभावना हमेशा बनी रहती है.
Venkatesan, S.
BJP
Karthikeyan, V.
AMMKMNKZ
Senthilnathan, D.
NTK
Uthirapathi, G.
PT
Nota
NOTA
Thirumaran, P.s.
IND
Aswin
BSP
Rajkumar, R.
IND
Vijayakumar, S.
APTADMK
Backiyaraj, V.
AMAK
Singaravadivel, S.
IND
Sivaraman, T.
MSKK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.