मयिलादुथुराई विधानसभा क्षेत्र (संख्या 161) तमिलनाडु का एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है, जिसका केंद्र जिला मुख्यालय शहर मयिलादुथुराई है. यह क्षेत्र एक व्यस्त व्यापारिक शहर और आसपास के कावेरी डेल्टा के कृषि गांवों का मिश्रण है. ऐतिहासिक रूप से यहां द्रविड़ राजनीति का गहरा प्रभाव रहा है, जहां विकास, कृषि और शहरी बुनियादी ढांचा चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं. यह क्षेत्र मयूरनाथस्वामी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है और एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है, खासकर कावेरी पुष्करम उत्सव के दौरान. इसके साथ ही यह पवित्र नवग्रह मंदिरों के लिए प्रवेश द्वार (गेटवे) भी माना जाता है.
इस क्षेत्र का सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्व भी काफी बड़ा है। यहां एम.के. त्यागराज भगवतर (तमिल सिनेमा के पहले सुपरस्टार), प्रसिद्ध उपन्यासकार कल्कि कृष्णमूर्ति, और लेखक एम.एस. उदयमूर्ति का जन्म हुआ था. इसके अलावा यह क्षेत्र महान कवि कंबर, संगीतकार गोपालकृष्ण भारती, और शतरंज चैंपियन विश्वनाथन आनंद से भी जुड़ा हुआ है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से मायलादुथुरै में शहरी और ग्रामीण मतदाताओं का संतुलित मिश्रण है, जिसमें व्यापारी, किसान और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं. यहां ओबीसी कृषि समुदायों और अनुसूचित जाति के मतदाताओं की अच्छी उपस्थिति है। स्थानीय व्यापार नेटवर्क और शैक्षणिक संस्थानों का भी राजनीति पर मजबूत प्रभाव है. चुनावी प्रचार में अक्सर विकास और सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन को प्रमुख मुद्दा बनाया जाता है.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र कावेरी डेल्टा में स्थित है, जो उपजाऊ कृषि भूमि से घिरा हुआ है. यहां चिदंबरम, कुंभकोणम और नागपट्टिनम से सड़क और रेल के जरिए बहुत अच्छी कनेक्टिविटी है. मयिलादुथुराई शहर जिले का एक प्रमुख व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र भी है. यहां की सिंचाई व्यवस्था कावेरी नदी की शाखाओं (डिस्ट्रिब्यूटरी नहरों) पर आधारित है. यह क्षेत्र शहरी मोहल्लों और ग्रामीण खेती वाले गांवों का मिश्रण प्रस्तुत करता है.
इस विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख इलाके (हॉटस्पॉट) में परिमला रंगनाथर मंदिर, मयिलादुथुराई शहर का मुख्य केंद्र (जहां प्रशासन और व्यापार होता है), सिंचाई नहरों के किनारे बसे कृषि गांव, बाजार क्षेत्र और परिवहन केंद्र शामिल हैं, जो व्यापार को प्रभावित करते हैं. इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों के समूह युवा मतदाताओं को आकर्षित करते हैं, और अनुसूचित जाति बहुल ग्रामीण क्षेत्र चुनावी परिणामों पर खास असर डालते हैं.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में शहर में बुनियादी ढांचा और ट्रैफिक प्रबंधन, कावेरी सिंचाई और कृषि उत्पादन, युवाओं और स्नातकों के लिए रोजगार के अवसर, बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी व्यवस्था, तथा सार्वजनिक सेवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार शामिल है.
मतदाताओं के रुझान की बात करें तो शहरी मतदाता मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और आर्थिक प्रगति को प्राथमिकता देते हैं, जबकि किसान सिंचाई की स्थिरता और फसल की आय पर ध्यान देते हैं. निम्न आय वर्ग और ग्रामीण मतदाताओं पर सरकारी योजनाओं का काफी प्रभाव पड़ता है. यहां उम्मीदवार की छवि और लोगों तक उसकी पहुंच भी बहुत मायने रखती है. आम तौर पर इस क्षेत्र में चुनाव प्रमुख द्रविड़ पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है.
Palanisamy.a
PMK
Kasiraman.k
NTK
Anbarasan Komal R K
AMMKMNKZ
Ravichandran.n
MNM
Nota
NOTA
Rajkumar.s
TNLK
Shamsudeen.n
BSP
Rajendran.m
IND
Niranjan.r
IND
Manimaran.t
IND
Ganesan.s
IND
Babusankar.r
IND
Loga.sampath
IND
Thimothy.t
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.