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Srirangam Vidhan Sabha Election Results Live: श्रीरंगम विधानसभा का रिजल्ट घोषित, TVK ने DMK को हराया
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Tamil Nadu Election Results 2026 Live: तमिलनाडु चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
श्रीरंगम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 139) तमिलनाडु के सबसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक क्षेत्रों में से एक माना जाता है. इसका मुख्य कारण यहां स्थित श्री रंगनाथस्वामी मंदिर है, जो दुनिया के सबसे बड़े सक्रिय मंदिर परिसरों में से एक है. यह क्षेत्र मंदिर-आधारित शहरी अर्थव्यवस्था, मध्यम वर्गीय आवासीय कॉलोनियों और कावेरी नदी की सिंचाई पर निर्भर आसपास के गांवों का मिश्रण है. यहां चुनावी नतीजे कई कारकों से प्रभावित होते हैं, जैसे शहरी मध्यम वर्ग की सोच, मंदिर पर्यटन से जुड़ी अर्थव्यवस्था, जातीय समीकरण और ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाओं का लाभ. यहां जीत का अंतर (मार्जिन) भी काफी बदल सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि शहरों में कितना मतदान हुआ और उस समय का राजनीतिक माहौल कैसा है.
श्री रंगनाथस्वामी मंदिर यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है, जो हर साल होने वाले 21 दिन के वैकुंठ एकादशी उत्सव के लिए प्रसिद्ध है. इस दौरान हजारों श्रद्धालु “स्वर्ग वासल” (स्वर्ग का द्वार) खुलने का दृश्य देखने के लिए यहां आते हैं.
अगर यहां के राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप की बात करें तो मतदाताओं के प्रमुख वर्गों में शहरी मध्यम वर्ग के परिवार, मंदिर से जुड़े काम करने वाले लोग और व्यापारी, ब्राह्मण और पारंपरिक मंदिर से जुड़े समुदाय, ओबीसी वर्ग के निवासी और व्यापारी, बाहरी इलाकों में रहने वाले अनुसूचित जाति (SC) समुदाय, सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी, और कावेरी सिंचाई वाले गांवों के किसान शामिल हैं.
भौगोलिक दृष्टि से श्रीरंगम एक द्वीप जैसा शहर है, जो कावेरी नदी और कोल्लिडम नदी के बीच स्थित है. यहां घनी आबादी वाली कॉलोनियां और मंदिर के आसपास की पारंपरिक गलियां हैं. इसके साथ ही यहां पर्यटन से जुड़े व्यापारिक क्षेत्र भी हैं और आसपास के गांव कृषि पर आधारित हैं, जिन्हें कावेरी नदी की सिंचाई का लाभ मिलता है. इस क्षेत्र की तिरुचिरापल्ली (त्रिची) शहर से सड़क और रेल दोनों के माध्यम से बहुत अच्छी कनेक्टिविटी है.
इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण इलाके (हॉटस्पॉट) में श्री रंगनाथस्वामी मंदिर और उससे जुड़े व्यापारी व कामगार, मध्यम वर्गीय कॉलोनियां जहां सरकारी कर्मचारी, पेशेवर और पेंशनभोगी रहते हैं, ओबीसी बहुल इलाके जहां राजनीतिक रूप से सक्रिय और ज्यादा मतदान करने वाले लोग हैं, बाहरी वार्ड और ग्रामीण इलाकों में बसे SC समुदाय के समूह, और कावेरी सिंचाई पर निर्भर गांव शामिल हैं, जहां किसान पानी और फसल की स्थिरता को लेकर ज्यादा चिंतित रहते हैं.
यहां के मुख्य मुद्दों में शहरी बुनियादी ढांचा (सड़क, जल निकासी, ट्रैफिक), मंदिर पर्यटन के बेहतर प्रबंधन और सुविधाएं, पीने के पानी की उपलब्धता, बाढ़ नियंत्रण और नदी किनारों की सुरक्षा, सरकारी अस्पताल और स्कूलों की सेवाएं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी, कावेरी सिंचाई से जुड़े मुद्दे और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर शामिल हैं.
अगर मतदाताओं के मूड और उनकी अपेक्षाओं की बात करें, तो लोग चाहते हैं कि चुना गया प्रतिनिधि मंदिर प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बनाए, शहर की बुनियादी सुविधाओं को सुधारे, स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा दे, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के साथ जुड़ा रहे और ग्रामीण किसानों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखे.
Kupa Krishnan
ADMK
K.selvarathi
NTK
Y.jacob
IND
Sarubala.r.thondaiman
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
S.francis Mery
IJK
G.selvakumar
BSP
Annalakshmi
DMSK
V.sethumadhavan
IND
P.ravichandran
IND
S.suresh
IND
Daniel Jude Martin
MKLMNTRAPR
R.uma
IND
M.amsavalli
IND
P.balasubramanian
SMKNK
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री सिर्फ एक सुपरस्टार की सफलता नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की कहानी भी बन गई है. कभी बेटे को फिल्मों में लॉन्च करने वाले एसए चंद्रशेखर आज उसी विजय की राजनीतिक जीत पर गर्व कर रहे हैं. कानूनी विवाद, रिश्तों में दूरियां और फिर भावनात्मक मेल-मिलाप के बाद अब विजय सत्ता के सबसे बड़े दरवाजे तक पहुंच चुके हैं.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.