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Tamil Nadu Election Result 2026 Live: अरवाकुरिची विधानसभा सीट पर DMK ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
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अरवाकुरिची विधानसभा क्षेत्र (सीट संख्या 134) पश्चिमी तमिलनाडु का एक राजनीतिक रूप से काफी प्रतिस्पर्धी क्षेत्र है, जहां चुनावी नतीजों को मुख्य रूप से जातीय समीकरण, सूखे इलाके की खेती से होने वाली आय, और सरकारी योजनाओं (वेलफेयर) की विश्वसनीयता प्रभावित करती है. यह सीट करूर जिले की व्यापारिक अर्थव्यवस्था और ग्रामीण कृषि क्षेत्र के बीच स्थित है, इसलिए यहां के मतदाताओं की प्राथमिकताएं कृषि और अर्ध-शहरी (semi-urban) दोनों तरह की हैं. इस सीट पर जीत का अंतर आमतौर पर मध्यम रहता है, लेकिन काफी उतार-चढ़ाव वाला होता है, खासकर जब ओबीसी वोटों का एकजुट होना या ग्रामीण वेलफेयर योजनाओं से संतुष्टि बदलती है.
राजनीतिक रूप से देखें तो अरवाकुरिची का इतिहास भी दिलचस्प रहा है. इस सीट का प्रतिनिधित्व सेंथिल बालाजी ने 2015 में किया था, हालांकि बाद में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने उपचुनाव में फिर से जीत हासिल की. वहीं, तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. अरवाकुरिची अपने कुटीर उद्योग (cottage industry) और हैंडलूम टेक्सटाइल (हाथकरघा वस्त्र उद्योग) के लिए भी जाना जाता है, जो यहां की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
सामाजिक और राजनीतिक संरचना की बात करें तो इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण मतदाता समूह हैं. इनमें प्रमुख हैं ओबीसी कृषि समुदाय, अनुसूचित जाति (SC) समुदाय, छोटे और मध्यम किसान, कृषि मजदूर परिवार, ग्रामीण महिलाएं जो सरकारी योजनाओं की लाभार्थी हैं, और टेक्सटाइल, ट्रांसपोर्ट व छोटे व्यापार से जुड़े लोग. यही समूह चुनावी दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र मुख्य रूप से सूखे इलाके (ड्राईलैंड) की खेती वाला है, जहां मूंगफली, मक्का और कपास जैसी फसलें उगाई जाती हैं. कुछ हिस्सों में सिंचाई की सुविधा बोरवेल और कावेरी नदी से जुड़े नहरों के जरिए मिलती है. अरवाकुरिची कस्बा एक स्थानीय व्यापारिक केंद्र (ट्रेड हब) के रूप में काम करता है और इसके आसपास छोटे-बड़े गांवों का मजबूत नेटवर्क है. यहां बारिश की नियमितता और भूजल की उपलब्धता किसानों के भरोसे और मतदाताओं के व्यवहार को सीधे प्रभावित करती है.
इस क्षेत्र के कुछ प्रमुख “हॉटस्पॉट” भी हैं, जो चुनावी दृष्टि से अहम माने जाते हैं. जैसे ओबीसी बहुल कृषि गांव, जो इस सीट की रीढ़ हैं. एससी बस्तियां, जहां सरकारी योजनाओं, आवास और सामाजिक सम्मान के मुद्दे बेहद संवेदनशील होते हैं. ड्राईलैंड किसान क्षेत्र, जहां मूंगफली, मक्का और कपास के दामों का सीधा असर पड़ता है. अरवाकुरिची शहर के वार्ड, जहां व्यापारी, ट्रांसपोर्ट वर्कर और सरकारी कर्मचारी रहते हैं; और मजदूर बहुल गांव, जहां लोग मौसमी रोजगार और सरकारी सहायता पर निर्भर रहते हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां के लोगों के लिए सबसे जरूरी विषय हैं, भूजल की उपलब्धता और सिंचाई, मूंगफली और मक्का की फसलों के दाम में स्थिरता, कृषि ऋण और सब्सिडी, ग्रामीण सड़कों और बस कनेक्टिविटी का विकास, सरकारी स्कूलों की सुविधाएं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच, राशन (PDS) की नियमित आपूर्ति, और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर.
मतदाताओं का मूड भी काफी स्पष्ट हैं. यहां के लोग ऐसे नेता को पसंद करते हैं जो आसानी से उपलब्ध हो और स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहे. उनकी मुख्य अपेक्षाएं हैं कि नेता गांवों में नियमित दौरा करे, किसानों की समस्याओं का जल्दी समाधान करे, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करे, फसल खराब होने या सूखे के समय हस्तक्षेप करे, और किसान व मजदूर दोनों समुदायों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखे.
Annamalai. K
BJP
Anitha Parveen. M
NTK
Thangavel. P. S. N
AMMKMNKZ
Mohammed Haneef Shahil. K. S
MNM
Saravanan. P
IND
Nota
NOTA
Rajkumar. R
TNLK
Satheeshkumar. T
IND
Sundararaj. R
BSP
Manojpandiyan. J. M
IND
Chithambaram. A
IND
Murugesan. M. S
IND
Mathiyalagan. P
IND
Silambarasan. P
IND
Maheshmani. T
IND
Sakunthala. N
IND
Karthikeyan. R
IND
Arivalagan. T
IND
Vairaseeman. G
IND
Karthik. D
IND
Rajendiran. M
IND
Kirubananth. S
IND
Periyasamy. M. R
IND
Arumugam. R
IND
Sivakumar. A
IND
Boopathy. S
IND
Pitchaimuthu. T
IND
Baskaran. N
IND
Sureshbabu. S
IND
Ragunath. P
IND
Mohanraj. C
SMKNK
Thanegasalam. R. V
IND
Prabakaran. T
IND
Ranjith. I
IND
Ramaguru. R
IND
Suresh. M
IND
Selvakumar. R
IND
Prakash. P
IND
Prabhu. G
IND
Vivekananthan. V
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री सिर्फ एक सुपरस्टार की सफलता नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की कहानी भी बन गई है. कभी बेटे को फिल्मों में लॉन्च करने वाले एसए चंद्रशेखर आज उसी विजय की राजनीतिक जीत पर गर्व कर रहे हैं. कानूनी विवाद, रिश्तों में दूरियां और फिर भावनात्मक मेल-मिलाप के बाद अब विजय सत्ता के सबसे बड़े दरवाजे तक पहुंच चुके हैं.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.