कुंभकोणम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 171) कावेरी डेल्टा क्षेत्र की सबसे सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण सीटों में से एक माना जाता है. यह क्षेत्र ऐतिहासिक मंदिर नगरी कुंभकोणम के आसपास केंद्रित है, जो एक बड़ा तीर्थ स्थल और शिक्षा का केंद्र है और इसके चारों ओर उपजाऊ कृषि गांव फैले हुए हैं.
राजनीतिक रूप से यहां लंबे समय से द्रविड़ पार्टियों के बीच मुकाबला देखने को मिलता रहा है, जहां शहरी विकास, मंदिर पर्यटन और सिंचाई से जुड़े मुद्दे मतदाताओं के व्यवहार को प्रभावित करते हैं. कुंभकोणम को तमिलनाडु का प्रमुख “टेंपल टाउन” कहा जाता है, जहां 188 से अधिक प्राचीन हिंदू मंदिर स्थित हैं और यहां हर 12 साल में होने वाला महामहम उत्सव (महामहम टैंक में) बहुत प्रसिद्ध है. यह शहर अपनी चोल कालीन वास्तुकला, रेशमी साड़ियों, पीतल के पंचलोहा मूर्तियों और खास कुंभकोणम डिग्री कॉफी के लिए भी जाना जाता है.
इस क्षेत्र का सामाजिक और राजनीतिक चरित्र मिश्रित है, जहां शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के मतदाता शामिल हैं जिनमें व्यापारी, मंदिर से जुड़े समुदाय और किसान प्रमुख हैं. यहां मुख्य राजनीतिक मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच रहता है. समाज में ओबीसी व्यापारी वर्ग, ब्राह्मण परिवार और कृषि से जुड़े समूह मौजूद हैं. यहां की मंदिर संस्कृति और शिक्षा संस्थान सामाजिक संबंधों और नागरिक भागीदारी को प्रभावित करते हैं. शहरी मतदाता जहां विकास और सुविधाओं पर ध्यान देते हैं, वहीं ग्रामीण मतदाता कृषि और सिंचाई को प्राथमिकता देते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र कावेरी डेल्टा में स्थित है और चारों ओर उपजाऊ कृषि भूमि से घिरा हुआ है. यह क्षेत्र थंजावुर, मयिलादुथुरै और तिरुचिरापल्ली से सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. शहर के आसपास कावेरी नदी की कई शाखाएं (डिस्ट्रिब्यूटरीज) बहती हैं, जो कृषि के लिए पानी उपलब्ध कराती हैं. यह एक प्रमुख तीर्थ और पर्यटन केंद्र भी है, जहां सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. साथ ही यह आसपास के गांवों के लिए शिक्षा और व्यापार का केंद्र भी है.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों (हॉटस्पॉट) में ओप्पिली अप्पन पेरुमल मंदिर, आदि कुंबेश्वरर मंदिर, सारंगपाणि मंदिर और नागेश्वरर मंदिर शामिल हैं. इसके अलावा कुंभकोणम शहर का मुख्य बाजार क्षेत्र, जहां व्यापार और राजनीति का केंद्र है, मंदिरों के समूह और तीर्थ स्थल जहां सालभर लोग आते हैं, सिंचाई पर निर्भर कृषि गांव, बाजार और परिवहन केंद्र, और मध्यम वर्ग के आवासीय इलाके भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जहां के मतदाता नागरिक सुविधाओं पर असर डालते हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां शहरी बुनियादी ढांचा जैसे सड़कें, जल निकासी और ट्रैफिक प्रबंधन, मंदिर पर्यटन और विरासत संरक्षण, कावेरी सिंचाई व्यवस्था, युवाओं के लिए रोजगार और व्यापार के अवसर, और बढ़ते शहर में पानी की आपूर्ति व स्वच्छता बड़े मुद्दे हैं.
मतदाताओं का रुझान (वोटर मूड) भी साफ दिखता है. शहरी मतदाता विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देते हैं, जबकि ग्रामीण मतदाता सिंचाई और कृषि स्थिरता पर ध्यान देते हैं. निम्न आय वर्ग के लिए सरकारी योजनाएं (वेलफेयर स्कीम्स) अभी भी बहुत महत्वपूर्ण हैं. इसके अलावा स्थानीय उम्मीदवार की पहुंच, काम करने की क्षमता और प्रशासनिक प्रभाव भी चुनाव में बड़ा फर्क डालते हैं. आमतौर पर यहां चुनाव DMK और AIADMK के बीच कड़े मुकाबले के रूप में देखने को मिलते हैं.
Srithar Vandayar, G.m.
ADMK
Anandh, M.
NTK
Balamurugan, S.
AMMKMNKZ
Gopalakrishnan, G.
MNM
Nota
NOTA
Gurumoorthi, D.
IND
Ayyappan, M.
IND
Vijayakumar, C.
IND
Subramanian, P.
IND
Prakash, P.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.