पेरावुरानी विधानसभा क्षेत्र तमिलनाडु के तंजावुर जिले के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है. इसमें पेरावुरानी नगर के साथ-साथ आसपास के कई तटीय और ग्रामीण गांव शामिल हैं. यह क्षेत्र एक तरफ उपजाऊ कृषि भूमि के लिए जाना जाता है, तो दूसरी तरफ समुद्र के किनारे बसे गांवों में मछली पकड़ने और उससे जुड़े काम भी बड़े पैमाने पर होते हैं. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती और मछली पकड़ने पर निर्भर है. खास तौर पर धान (चावल) की खेती बहुत ज्यादा होती है, क्योंकि यहां पानी के लिए तालाबों और सिंचाई व्यवस्था की सुविधा मौजूद है. यहां के मतदाता ज्यादातर किसान, मछुआरे, खेत मजदूर, छोटे व्यापारी और गांवों में रहने वाले लोग हैं.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण है. यहां मुक्कुलाथोर (थेवर) समुदाय, अनुसूचित जातियां, मुस्लिम मछुआरा समुदाय और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोग रहते हैं. किसानों के संगठन, मछुआरों की सहकारी समितियां और स्थानीय नेता चुनावों में लोगों को प्रभावित करते हैं. चुनाव के समय सरकार की योजनाएं और गांवों का विकास (जैसे सड़क, घर, पानी आदि) सबसे बड़े मुद्दे होते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के पास स्थित है. यहां से तंजावुर, पट्टुकोट्टई और आसपास के तटीय शहरों तक सड़क मार्ग से अच्छी कनेक्टिविटी है. पूरे इलाके में खेत, सिंचाई के तालाब, नारियल के बाग और मछुआरों के गांव दिखाई देते हैं. धान की खेती, नारियल की खेती और मछली पकड़ना यहां की मुख्य आर्थिक गतिविधियां हैं, और ज्यादातर आबादी गांवों में रहती है.
इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों में पेरावुरानी शहर का बाजार और प्रशासनिक केंद्र, समुद्र किनारे के मछुआरों के गांव (जो वोटिंग पर असर डालते हैं), खेती वाले गांव जहां धान और नारियल की पैदावार होती है, साप्ताहिक ग्रामीण बाजार और पंचायतों के समूह शामिल हैं, जहां सरकारी योजनाएं वोटरों के फैसले को प्रभावित करती हैं.
यहां के मुख्य मुद्दों में खेती के लिए पानी और सिंचाई की सुविधा, मछुआरों के लिए बंदरगाह और समुद्री सुरक्षा, गांवों की सड़क और परिवहन सुविधा, किसानों के लिए सब्सिडी, फसल बीमा और अन्य सरकारी सहायता, पीने का पानी और गांवों की साफ-सफाई शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड भी इन्हीं मुद्दों पर आधारित रहता है. किसान सिंचाई और फसल के सही दाम चाहते हैं, मछुआरे अच्छी सुविधाएं और समुद्र से सुरक्षा की मांग करते हैं, गांवों के लोग सरकारी योजनाओं और घर जैसी सुविधाओं को महत्व देते हैं, जबकि युवा रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के मौके ढूंढते हैं. यहां चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जहां जाति के आधार पर समर्थन और राजनीतिक गठबंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
Thirugnanasambandam, S.v.
ADMK
Delipan, K.
NTK
Sivakumar, M.
DMDK
Nota
NOTA
Pachamuthu, P.
IJK
Durairaj, G.
BSP
Uthayakumar, U.
IND
Elangovan, G.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.