मन्नारगुडी विधानसभा क्षेत्र (संख्या 167) कावेरी डेल्टा क्षेत्र की सबसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीटों में से एक माना जाता है. यह तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले में स्थित है और अपनी उपजाऊ कृषि भूमि, मंदिरों की समृद्ध विरासत और किसानों से जुड़े मुद्दों पर मजबूत राजनीतिक सक्रियता के लिए जाना जाता है. मन्नारगुडी शहर आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए एक प्रमुख व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में काम करता है. यह क्षेत्र प्राचीन और प्रसिद्ध राजगोपालस्वामी मंदिर के लिए भी जाना जाता है, जो लगभग 23 एकड़ में फैला एक प्रमुख वैष्णव मंदिर है. इसके अलावा, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी सहयोगी वी के शशिकला का संबंध भी मन्नारगुडी से रहा है. इतना ही नहीं, अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की पैतृक जड़ें भी इसी क्षेत्र से जुड़ी बताई जाती हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से द्रविड़ राजनीति का मजबूत गढ़ रहा है, जहां मुख्य रूप से द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम
और ऑल इण्डिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का प्रभाव रहा है. यहां अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की कृषि आधारित जातियों, खासकर वन्नियार और मुक्कुलथोर समुदाय, की मजबूत उपस्थिति है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति (SC) की भी अच्छी खासी आबादी है, जो करीबी चुनावी मुकाबलों में निर्णायक भूमिका निभाती है. यहां की राजनीति अक्सर किसान यूनियनों, सहकारी समितियों और मंदिर-आधारित सामाजिक नेटवर्क के आसपास घूमती है. साथ ही, स्थानीय नेताओं की पकड़ और जमीनी स्तर पर पार्टी संगठन की ताकत मतदाताओं को प्रभावित करने में बहुत अहम भूमिका निभाती है.
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र कावेरी डेल्टा में स्थित है, जहां की जमीन बेहद उपजाऊ है और मुख्य रूप से धान की खेती होती है. यहां की कृषि व्यवस्था कावेरी नदी की शाखाओं (डिस्ट्रिब्यूटरी) और नहरों के जाल पर निर्भर है, जो इसे एक मजबूत कृषि अर्थव्यवस्था बनाते हैं. यह क्षेत्र राज्य राजमार्गों के माध्यम से तिरुवरूर, तंजावुर और नागपट्टिनम जिलों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यह एक मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है, जहां गांवों की घनी बसावट है, जबकि मन्नारगुड़ी शहर एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और परिवहन केंद्र के रूप में विकसित हुआ है.
इस क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक “हॉटस्पॉट” में राजगोपालस्वामी मंदिर, मन्नारगुड़ी शहर (जहां राजनीतिक गतिविधियां और व्यापार केंद्रित हैं), नहरों के किनारे बसे कृषि प्रधान गांव (जहां किसानों के मुद्दे सबसे ज्यादा उठते हैं), मंदिर के आसपास के इलाके (जो सांस्कृतिक नेटवर्क को प्रभावित करते हैं), अनुसूचित जाति बहुल गांव (जो कड़े मुकाबलों में चुनावी परिणाम बदल सकते हैं), और परिवहन मार्गों के पास के अर्ध-शहरी क्षेत्र (जहां युवा और छोटे व्यवसाय तेजी से बढ़ रहे हैं) शामिल हैं.
यहां के प्रमुख मुद्दों में सिंचाई प्रबंधन और कावेरी जल की उपलब्धता, किसानों की आय और फसल के उचित दाम, नहरों की सफाई (डिसिल्टिंग) और जल संरचना का रखरखाव, ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, और गांवों में सड़क व बुनियादी सुविधाओं का विकास शामिल हैं.
मतदाताओं का रुझान (वोटर मूड) भी इन मुद्दों से काफी प्रभावित होता है. यहां के लोग खासकर कृषि और सिंचाई नीतियों को ध्यान में रखकर वोट देते हैं. इसके अलावा सरकारी वेलफेयर योजनाएं और सब्सिडी भी मतदाता संतुष्टि का बड़ा कारण होती हैं. मतदाता राज्य सरकार के प्रदर्शन को, खासकर डेल्टा क्षेत्र में, ध्यान से परखते हैं. साथ ही, स्थानीय उम्मीदवार की पहुंच, व्यवहार और छवि भी चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाती है. आम तौर पर यहां चुनावी मुकाबला दो प्रमुख द्रविड़ पार्टियों DMK और AIADMK के बीच सीधा और कड़ा होता है.
Rajamanickam Siva
ADMK
Kamaraj S
AMMKMNKZ
Aravindan Rama
NTK
Kumaresan T
IND
Anbanandam S
MNM
Nota
NOTA
Sathiskumar S
PT
Murugan S
IND
Marimuthu A.v.m
IND
Baradhidasan T
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.