ओराथानाडु विधानसभा क्षेत्र (संख्या 175) तमिलनाडु के तंजावुर जिले के दक्षिणी हिस्से में स्थित है. यह क्षेत्र मुख्य रूप से उपजाऊ कृषि गांवों और छोटे बाजार कस्बों से मिलकर बना है. यह विधानसभा क्षेत्र कावेरी डेल्टा क्षेत्र का हिस्सा है, जो तमिलनाडु के सबसे अधिक उत्पादन देने वाले कृषि क्षेत्रों में से एक माना जाता है. यहां की अर्थव्यवस्था में सबसे प्रमुख फसल धान है, जिसे कावेरी नदी और उसकी सहायक नहरों से मिलने वाली सिंचाई व्यवस्था का सहारा मिलता है. इस क्षेत्र के मतदाता मुख्य रूप से किसान, कृषि मजदूर, छोटे व्यापारी और ग्रामीण बस्तियों के निवासी हैं.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह एक ग्रामीण बहुल क्षेत्र है, जहां कृषि ही जीवन का मुख्य आधार है. यहां की सामाजिक संरचना में मुक्कुलथोर (थेवर) समुदाय, अनुसूचित जातियां (SC), वन्नियार और अन्य OBC समूह शामिल हैं. यहां किसान संगठनों और स्थानीय सामुदायिक नेटवर्क का राजनीति पर काफी प्रभाव रहता है. चुनाव अभियानों में अक्सर सिंचाई, कृषि आय, और सरकारी कल्याण योजनाओं जैसे मुद्दे प्रमुख रहते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र कावेरी डेल्टा की उपजाऊ कृषि पट्टी में आता है. यह सड़क मार्गों से तंजावुर, पत्तुक्कोट्टई और आसपास के ग्रामीण कस्बों से जुड़ा हुआ है. यहां का भू-भाग मुख्य रूप से धान के खेतों, सिंचाई नहरों और ग्रामीण बस्तियों से भरा हुआ है. यहां की जीवनशैली और आजीविका पर मौसमी खेती और सिंचाई चक्रों का बहुत प्रभाव पड़ता है. इस क्षेत्र में कई गाँव और पंचायत समूह मुख्य आबादी केंद्र के रूप में कार्य करते हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में ओराथानाडु टाउन सेंटर शामिल है, जो प्रशासनिक और स्थानीय बाजार का मुख्य केंद्र है. इसके अलावा यहां धान और अन्य फसलों का उत्पादन करने वाले कृषि गांव, साप्ताहिक ग्रामीण बाजार, और सिंचाई नहर क्षेत्र भी महत्वपूर्ण हैं, जो कृषि उत्पादन को प्रभावित करते हैं. साथ ही पंचायत समूहों में सरकारी कल्याण योजनाएं मतदान व्यवहार पर काफी असर डालती हैं.
मुख्य समस्याओं की बात करें तो यहां के लोगों के लिए सबसे जरूरी मुद्दे हैं, विश्वसनीय सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन, कृषि सब्सिडी, फसल बीमा और किसानों की सहायता योजनाएं, ग्रामीण सड़क और परिवहन व्यवस्था, पीने के पानी और स्वच्छता की सुविधा, तथा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर.
मतदाताओं की सोच में किसान सबसे ज्यादा पानी की उपलब्धता और स्थिर कृषि आय को प्राथमिकता देते हैं. ग्रामीण परिवार सरकारी कल्याण योजनाओं और आवास सहायता पर ध्यान देते हैं. कृषि मजदूर रोजगार सुरक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर निर्भर रहते हैं, जबकि युवा बेहतर शिक्षा और नौकरी के अवसर चाहते हैं. यहां चुनाव अक्सर जातीय समीकरणों और स्थानीय नेतृत्व नेटवर्क से भी प्रभावित होते हैं.
Ramchandran, M.
DMK
Sekar, M.
AMMKMNKZ
Kandhasamy, M.
NTK
Mookkaiyan, V.
IND
Nota
NOTA
Rengasamy, G.
MNM
Stalin, R.
BSP
Jayasooriyan, T.
IND
Rengaraj, S.
IND
Thanraj, R.
USIP
Arunkumar, K.
IND
Prabakaran, U.
AMPK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.