पुदुकोट्टई विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 180) जिले का राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र है. यह एक अर्ध-शहरी (सेमी-अर्बन) क्षेत्र है, जहां एक जिला मुख्यालय वाला शहर और उसके आसपास के कृषि-आधारित गांव शामिल हैं. यहां चुनावी नतीजे मुख्य रूप से शहरी प्रशासन के कामकाज, ग्रामीण इलाकों में जातीय समीकरण, और गरीब व निम्न आय वर्ग तक सरकारी योजनाओं की पहुंच पर निर्भर करते हैं. यह क्षेत्र ऐतिहासिक पुदुकोट्टई पैलेस के पास स्थित है, जो इसके राजसी अतीत को दर्शाता है, लेकिन आज की राजनीति में मुख्य मुद्दे विकास, रोजगार और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच हैं. यहां चुनावी जीत का अंतर आमतौर पर बहुत बड़ा नहीं होता और काफी बदलता रहता है, खासकर तब जब शहरी मतदान बढ़े या ग्रामीण इलाकों में जातीय एकजुटता बदल जाए. यह क्षेत्र थिरुमयम किला (जिसमें चट्टानों को काटकर बने मंदिर और सात दीवारें हैं), सिट्टनावासल (जैन गुफा चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध) और सरकारी संग्रहालय जैसे ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों के लिए भी जाना जाता है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यहां कई तरह के मतदाता समूह प्रभाव डालते हैं, जिनमें ओबीसी वर्ग के किसान और व्यापारी समुदाय, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले अनुसूचित जाति के लोग, शहर के छोटे व्यापारी और दुकानदार, सरकारी कर्मचारी और सेवा क्षेत्र के लोग, कृषि मजदूर परिवार, सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाली महिलाएं, और तिरुचिरापल्ली जैसे पास के शहरों में काम करने वाले युवा शामिल हैं.
भौगोलिक और संपर्क की दृष्टि से पुदुकोट्टई शहर इस क्षेत्र का प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र है. यहां घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके और नगर पालिका के वार्ड हैं, जबकि आसपास के गांव बारिश और टैंक (तालाब) सिंचाई पर निर्भर खेती करते हैं. इस क्षेत्र में शहर और गांव दोनों का मिश्रित स्वरूप देखने को मिलता है, जिसमें नगर के वार्ड और ग्रामीण पंचायतें शामिल हैं. सड़क संपर्क भी अच्छा है, जिससे तिरुचिरापल्ली और थंजावुर जैसे शहरों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है.
यहां कुछ महत्वपूर्ण इलाके या “हॉटस्पॉट” भी हैं, जैसे आध्यात्मिक स्थल, जहां कुडिमियानमलाई, नार्थामलाई और अवुडैयारकोइल मंदिर जैसे प्राचीन मंदिर स्थित हैं. पुदुकोट्टई शहर के वार्ड, जहां व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और सेवा क्षेत्र के लोग रहते हैं. ओबीसी बहुल गांव, जो चुनावी आधार बनाते हैं. अनुसूचित जाति की बस्तियां, जहां के मतदाता सरकारी योजनाओं पर अधिक निर्भर होते हैं. कृषि मजदूरों के गांव, जहां लोग मौसमी खेती पर निर्भर हैं और बाहरी इलाकों के वे क्षेत्र, जहां के लोग पास के शहरों में काम करने जाते हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां के लोगों के लिए शहरी बुनियादी ढांचा (सड़क, नाली, पीने का पानी), युवाओं के लिए रोजगार, गांवों के लिए कृषि सहायता, सरकारी योजनाओं और आवास की सुविधा, सरकारी अस्पताल और स्कूल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, और तालाब आधारित सिंचाई व पानी की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण हैं.
मतदाताओं की सोच और उम्मीदों में यह साफ दिखता है कि वे चाहते हैं कि उनका प्रतिनिधि शहर के व्यापारियों और नागरिकों से लगातार जुड़ा रहे, गांवों में नियमित दौरे करे, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करे, शहरी समस्याओं (जैसे सड़क, पानी) पर तुरंत प्रतिक्रिया दे, और जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम करे.
Karthik Thondaiman
ADMK
Sasikumar
NTK
S . Moorthy
MNM
M . Subramanian
DMDK
Nota
NOTA
Durai Guna
IND
Vengadeshwaran
BSP
M. Saravana Deva
NMK
Karthikeyan
IND
V. N. Muthukumar
IND
A. Rajasekar
IND
S . Soundar Raja
IND
K . Dhanagopal
IND
Karuppaiah . C
IND
Kumar
MIDP
M . Rajinikanth
IND
S . Sahul Ameedu
IND
P. Vijayakumar
IND
S . Karthikeyan
IND
N. Veeriah
IND
I . Abdullah
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.