कृष्णरायपुरम एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित सीट है, जहाx चुनावी नतीजों को मुख्य रूप से SC नेतृत्व की विश्वसनीयता, कावेरी नदी की सिंचाई की स्थिरता, और सरकारी योजनाओं (वेलफेयर) की सही डिलीवरी प्रभावित करती है. यह क्षेत्र अधिकतर ग्रामीण है, जहां की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि और कृषि मजदूरी है. शहरी क्षेत्रों की तरह यहां चुनाव बड़े विकास वादों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ाव (ग्रासरूट मोबिलाइजेशन), जातिगत समीकरण (कास्ट अलायंस) और सरकारी योजनाओं पर भरोसे के आधार पर तय होते हैं. यहां जीत का अंतर आमतौर पर मध्यम रहता है, लेकिन यह SC समुदाय के एकजुट वोट और सिंचाई से जुड़े मुद्दों के अनुसार जल्दी बदल सकता है.
इस क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप में कुछ प्रमुख वोटर समूह हैं. सबसे अहम हैं अनुसूचित जाति के मतदाता, क्योंकि यह आरक्षित सीट है और यही निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा आसपास के गांवों में रहने वाले OBC किसान समुदाय, कावेरी डेल्टा के किसान, कृषि मजदूर परिवार, ग्रामीण महिलाओं को मिलने वाली सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, और पास के शहरों जैसे करूर और कुलिथलाई में काम करने वाले युवा भी महत्वपूर्ण वोटर हैं.
अगर भूगोल और कनेक्टिविटी की बात करें तो यह क्षेत्र कावेरी नदी के सिंचाई बेल्ट में आता है, जहां के गांव पूरी तरह से नहरों के पानी पर निर्भर हैं. यहां धान और गन्ने की खेती प्रमुख है. यह इलाका छोटे-छोटे ग्रामीण बाजार कस्बों और पंचायतों से बना है, जहां गांवों का नेटवर्क घना है और शहरीकरण बहुत सीमित है. कावेरी नदी से पानी छोड़ा जाना और नहरों की देखभाल यहां के मतदाताओं के मूड को सीधे प्रभावित करती है.
इस क्षेत्र के कुछ महत्वपूर्ण हॉटस्पॉट भी हैं, जो चुनावी दृष्टि से बेहद अहम माने जाते हैं. जैसे कि SC बहुल गांव, जो इस आरक्षित सीट का मुख्य वोट बैंक बनाते हैं. कावेरी सिंचाई क्षेत्र, जहां धान और गन्ना उगाने वाले किसान रहते हैं और पूरी तरह पानी पर निर्भर हैं. कृषि मजदूरों के गांव, जहां बड़ी संख्या में लोग खेतों में काम करके जीविका चलाते हैं. ग्रामीण बाजार केंद्र, जहां किसान और व्यापारी आपस में लेन-देन करते हैं. और मिश्रित OBC गांव, जहां अलग-अलग जातियों का संतुलन चुनाव को प्रभावित करता है.
यहां के मुख्य मुद्दों में कावेरी की भरोसेमंद सिंचाई और नहरों की सही देखभाल, धान की समय पर सरकारी खरीद (MSP) और भुगतान, कृषि मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर, सरकारी आवास और अन्य योजनाओं तक पहुंच, ग्रामीण सड़कों और बस सुविधा में सुधार, सरकारी स्कूल और अस्पतालों की स्थिति, और पीने के पानी की उपलब्धता सबसे अहम हैं.
अगर मतदाताओं के मूड को समझें तो लोगों की कुछ स्पष्ट अपेक्षाएं होती हैं, उन्हें ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो SC समुदाय के मुद्दों को मजबूती से उठाए, सिंचाई या खेती से जुड़ी समस्या आने पर तुरंत कार्रवाई करे, गांवों में नियमित रूप से मौजूद रहे, लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करे, और कृषि व राजस्व विभाग के साथ बेहतर तालमेल रखे. यही सभी बातें मिलकर इस क्षेत्र की राजनीति और चुनावी नतीजों को तय करती हैं.
Muthukumar
ADMK
Ilakiya.r
NTK
Kathirvel.m
DMDK
Saravanan.v
MNM
Nota
NOTA
Sivakumar. O
IND
Selvakumar.s
IND
Murugesan.r
BSP
Sathyaraj
IND
Chinnasamy.v
IND
Tamil Selvan.m
IND
Senthilkumar.m
IND
Ashokan.p
PT
Sakthivel.k
IND
Chandra.p
MIDP
Rajaguru. M
SMKNK
Krishnamoorthi.m
IND
Rajagopal.k
IND
Ramesh.n.p
IND
Narayanan.kr
CPI(ML)(L)
Gopi Krishnan.p
IND
Muruganantham.t
IND
Nagarajan. C
IND
Mahamuni.a
IND
Maheswaran.a
IND
Muhilan.t
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
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