अलंगुडी विधानसभा क्षेत्र, जो पुदुक्कोट्टई जिला के बीच वाले हिस्से में आता है, ज्यादातर ग्रामीण इलाकों से मिलकर बना है. यहां छोटे-छोटे गांव, कस्बे और खेती पर आधारित बस्तियां हैं. इस क्षेत्र की जमीन उपजाऊ है और यहां की खेती मुख्य रूप से टैंक (तालाब) सिंचाई व्यवस्था और मौसमी बारिश पर निर्भर करती है. यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खेती, खेतिहर मजदूरी और छोटे स्तर का ग्रामीण व्यापार है. वोटर भी ज्यादातर किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी और सरकारी कर्मचारी हैं.
यह क्षेत्र धार्मिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां स्थित अबत्सहायेश्वरर मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. यह नवग्रह मंदिरों में से एक है, जो गुरु (बृहस्पति) ग्रह से जुड़ा हुआ है और यहां पूरे तमिलनाडु से श्रद्धालु आते हैं.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण है, जहां किसान और मजदूरों की संख्या ज्यादा है. यहां मक्कुलथोर (थेवर), अनुसूचित जाति, वन्नियार और अन्य ओबीसी समुदाय रहते हैं. चुनाव के समय किसान संगठनों, स्थानीय नेताओं और जातीय समीकरणों का काफी असर पड़ता है. साथ ही, सरकारी योजनाएं और कृषि से जुड़ी नीतियां चुनाव में बड़ा मुद्दा बनती हैं.
भौगोलिक रूप से यह इलाका पुदुकोट्टई जिले के अंदरूनी हिस्से में आता है और सड़क मार्ग से पुदुकोट्टई, तंजावुर और आसपास के शहरों से जुड़ा हुआ है. यहां खेत, तालाब और गांवों के समूह देखने को मिलते हैं. मुख्य फसलें धान, दालें, गन्ना और मूंगफली हैं. मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की वजह से यहां पर्यटन से भी थोड़ी आर्थिक गतिविधि होती है.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में अलंगुडी का टाउन सेंटर शामिल है, जो प्रशासनिक और बाजार का केंद्र है. अबत्सहायेश्वरर मंदिर यहां का मुख्य धार्मिक स्थल है. इसके अलावा खेती वाले गांव, साप्ताहिक ग्रामीण बाजार और पंचायत क्षेत्र भी महत्वपूर्ण हैं, जहां सरकारी योजनाओं का सीधा असर वोटरों पर पड़ता है.
यहां के मुख्य मुद्दों में सिंचाई व्यवस्था और पानी की सही उपलब्धता, ग्रामीण सड़कों और आधारभूत ढांचे का विकास, किसानों के लिए सब्सिडी और फसल बीमा, पीने का पानी और सफाई, और युवाओं के लिए रोजगार व कौशल विकास शामिल हैं.
वोटरों का रुख भी इन्हीं मुद्दों के आसपास रहता है. किसान सिंचाई और सरकारी मदद को प्राथमिकता देते हैं, जबकि ग्रामीण परिवार सरकारी योजनाओं और घर जैसी सुविधाओं को महत्व देते हैं. मंदिर से जुड़े व्यापार करने वाले लोग बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर चाहते हैं और युवा रोजगार व शिक्षा के मौके चाहते हैं. यहाँ चुनाव अक्सर जातीय समीकरणों और राजनीतिक गठबंधनों पर निर्भर करते हैं.
Dharma Thangavel
ADMK
C.thiruchelvam
NTK
D.vidangar
AMMKMNKZ
N.vairavan
MNM
Nota
NOTA
M.chinnadurai
BSP
V.kannadasan
IND
T.vinayagamoorthy
IND
P.balamurugan
MIDP
G.manimegalai
CPI(ML)(L)
C.jaya
AMPK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.