पेरम्बलुर विधानसभा क्षेत्र का केंद्र पेरम्बलुर शहर है, जो जिले का मुख्यालय भी है. यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण इलाका है, जहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है, और इसके साथ छोटे स्तर का व्यापार और सेवा क्षेत्र भी जुड़ा हुआ है. यहां के लोग मुख्य रूप से मक्का, कपास और छोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती करते हैं, साथ ही कुछ नकदी फसलें भी उगाई जाती हैं. इस क्षेत्र के मतदाता अधिकतर किसान, कृषि मजदूर, छोटे व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और ग्रामीण परिवार होते हैं. यहां उद्योग बहुत कम होने के कारण कई लोग खेती पर निर्भर रहते हैं और रोजगार के लिए मौसमी पलायन भी करते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह क्षेत्र पूरी तरह से ग्रामीण है. यहां की राजनीति काफी हद तक कृषि पर निर्भरता से प्रभावित होती है. यहां की सामाजिक संरचना में वनियार, मुथरैयार, अनुसूचित जातियां (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय प्रमुख हैं. यहां चुनावी राजनीति पर जातिगत समीकरण और ग्रामीण नेतृत्व नेटवर्क का काफी असर होता है. चुनावों में अक्सर किसानों की समस्याएं, कृषि विकास और सरकारी कल्याण योजनाएं मुख्य मुद्दे रहते हैं.
भूगोल और संपर्क व्यवस्था की बात करें तो पेरम्बलुर तमिलनाडु के मध्य भाग में स्थित है और यह चेन्नई–तिरुचिरापल्ली हाईवे (NH 45) पर स्थित होने के कारण अच्छी सड़क कनेक्टिविटी रखता है. यह क्षेत्र तिरुचिरापल्ली, अरियालुर और विलुप्पुरम जैसे शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यहां की जमीन अधिकतर शुष्क और अर्ध-शुष्क है, जहां कृषि मुख्य रूप से मॉनसून वर्षा पर निर्भर करती है. सिंचाई के लिए सीमित संसाधन हैं, इसलिए लोग बोरवेल और तालाबों पर निर्भर रहते हैं. पेरम्बलुर शहर इस क्षेत्र का प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र है.
यहां के प्रमुख स्थानों में पेरम्बलुर शहर (जिला मुख्यालय और व्यापार केंद्र) शामिल है. इसके अलावा यहां मक्का और कपास की खेती वाले ग्रामीण गांव, मजबूत जातिगत मतदान पैटर्न वाले ग्रामीण पंचायत क्षेत्र, और हाईवे किनारे बसे ऐसे इलाके हैं जहां व्यापार और परिवहन से आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं. यहां साप्ताहिक बाजार भी ग्रामीण व्यापार को बढ़ावा देते हैं.
मुख्य समस्याओं की बात करें तो यहां पानी की कमी और सिंचाई की समस्या, किसानों के लिए फसल की उचित कीमत और कृषि सहायता योजनाएं, ग्रामीण बुनियादी ढांचा (सड़कें और आवास), रोजगार की कमी और पलायन, तथा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रमुख मुद्दे हैं.
मतदाताओं के मूड में देखा जाए तो किसान सिंचाई और फसल आय की स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं, जबकि कृषि मजदूर रोजगार योजनाओं और सरकारी लाभों पर ध्यान देते हैं. युवा वर्ग नौकरियों और कौशल विकास की मांग करता है, और ग्रामीण परिवार आवास, पीने का पानी और बुनियादी सुविधाओं को महत्व देते हैं. यहां के चुनाव आम तौर पर काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जहाँ जातिगत समीकरण और गठबंधन की राजनीति बड़ी भूमिका निभाती है.
Thamizhselvan, R.
ADMK
Maheshwari, M.
NTK
Rajendran, K.
DMDK
Nota
NOTA
Sasikala, M.
IJK
Radhika, T.
PT
Rajendran, K.
BSP
Gunasekaran, A.
NCP
Sathish, S.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.