वांडूर विधानसभा क्षेत्र केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित है. यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित विधानसभा सीट है और केरल विधानसभा की 140 सीटों में यह 36वीं सीट मानी जाती है. लोकसभा चुनावों के लिए यह वायनाड लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. वांडूर की राजनीति में लंबे समय से यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के बीच
लगातार मुकाबला होता रहा है, लेकिन हाल के दशकों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) को यहां मजबूत समर्थन मिलता रहा है.
प्रशासनिक और भौगोलिक रूप से वांडूर एक मुख्यतः ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाका है, जहां छोटे-छोटे कस्बाई केंद्र, जंगल और कृषि भूमि मिलकर इसकी सामाजिक-आर्थिक पहचान बनाते हैं. यह विधानसभा क्षेत्र नीलांबूर तालुक के अंतर्गत आता है और इसमें चोक्कड़, कालीकावु, करुवरकुंडु, मम्पाड़, पोरूर, थिरुवली, थुव्वुर और वांडूर पंचायतें शामिल हैं.
मतदाता भागीदारी की बात करें तो 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में वांडूर में कुल 2,26,426 पंजीकृत मतदाता थे. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर रही. 2021 के चुनाव में यहां लगभग 75.17% मतदान हुआ, जो दर्शाता है कि इस क्षेत्र के लोग चुनावों में अच्छी भागीदारी करते हैं.
राजनीतिक इतिहास की बात करें तो, हालांकि इस सीट पर अधिकांश समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का कब्जा रहा है, लेकिन वांडूर शुरू से ही एक सक्रिय राजनीतिक मुकाबले वाला क्षेत्र रहा है. परिसीमन के बाद हुए पहले चुनाव में INC के वेला ईचारन ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी, जिससे इस क्षेत्र में शुरुआती दौर में कांग्रेस समर्थक राजनीति की मजबूत नींव पड़ी. समय के साथ इस सीट का प्रतिनिधित्व INC के कई नेताओं ने किया, जिनमें पंडालम सुधाकरन और ए. पी. अनिल कुमार जैसे नाम शामिल हैं. वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) यहां कांग्रेस की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी रही है और 1996 में CPI(M) के एन. कन्नन ने कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की थी, जिसे एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना गया. 2001 से अब तक वांडूर सीट का प्रतिनिधित्व लगातार INC के ए. पी. अनिल कुमार कर रहे हैं.
2021 के केरल विधानसभा चुनाव के परिणामों की बात करें तो INC के ए. पी. अनिल कुमार ने वांडूर सीट पर जीत हासिल की. उन्हें कुल 87,415 वोट मिले, जो सभी वैध वोटों का लगभग 51.44% था. उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी CPI(M) की पी. मिथुना रहीं, जिन्हें 71,852 वोट मिले, यानी लगभग 42.28% वोट. इसके बाद भाजपा (BJP) के पी. सी. विजयन, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया (WPOI) के उम्मीदवार और अन्य छोटे दलों के प्रत्याशी रहे. ए. पी. अनिल कुमार ने 15,563 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो कुल वैध मतों का लगभग 9.17% था. इस परिणाम ने यह साफ किया कि लगातार चुनौती के बावजूद वांडूर में कांग्रेस की पकड़ मजबूत बनी हुई है.
वोटर व्यवहार और चुनावी रुझानों को देखें तो, 1996 में CPI(M) की जीत को छोड़कर कांग्रेस का लगातार दबदबा यह बताता है कि इस क्षेत्र में UDF की संगठनात्मक जड़ें काफी मजबूत हैं. यहां मजबूत सामुदायिक संगठन और जमीनी स्तर के नेटवर्क अक्सर ए. पी. अनिल कुमार जैसे लोकप्रिय नेताओं को स्थायी समर्थन दिलाते हैं. हालांकि, CPI(M) और अन्य दलों को भी कई बार अच्छा वोट शेयर मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मतदाता नई नीतियों, मुद्दों और बड़े राजनीतिक नैरेटिव के प्रति भी खुले हैं.
स्थानीय समस्याओं की बात करें तो वांडूर क्षेत्र में ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच, कृषि को सहायता, रोजगार के अवसर, और अनुसूचित जाति समुदाय के लिए सामाजिक कल्याण योजनाओं की जरूरत जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आते हैं.
पर्यटन की दृष्टि से भी यह क्षेत्र काफी आकर्षक है. यहां करुवरकुंडु वॉटरफॉल्स, नेदुमकायम रेनफॉरेस्ट, कोक्कड़नकुन्नु, वणियंबालम रॉक और चालियार नदी के किनारे जैसे सुंदर पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए खास माने जाते हैं.
(श्रेया प्रसाद)