केरल के कोझिकोड जिले में स्थित कुट्टियाडी विधानसभा क्षेत्र केरल के 140 निर्वाचन क्षेत्रों में 21वां क्षेत्र है. यह लोकसभा चुनाव के लिए वडकारा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है और यह एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है. यहां भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] और अन्य क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला होता
रहा है. उत्तरी केरल की राजनीति की दिशा को समझने के लिए यह क्षेत्र एक तरह का संकेतक माना जाता है, क्योंकि यहां कभी बहुत कम अंतर से जीत होती है तो कभी कोई दल लंबे समय तक अपनी पकड़ बनाए रखता है.
प्रशासनिक और भौगोलिक रूप से कुट्टियाडी कोझिकोड जिले के उत्तरी हिस्से में स्थित है और इसकी सीमाएं पुडुचेरी के माहे क्षेत्र और कन्नूर जिले से लगती हैं. इसमें वडकारा तालुक के अयंचेरी, कुन्नुम्मल, कुट्टियाड़ी, पुरमेरी, तिरुवल्लूर, वेलोम, मणियूर और विल्लियाप्पल्ली पंचायतें शामिल हैं. यहां शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों का मिश्रण है. यहां के लोग व्यापार, खेती और सेवा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. इस विविधता के कारण यहां की राजनीति भी जटिल और प्रतिस्पर्धी बनी रहती है.
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में कुट्टियाडी में कुल 2,02,211 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें 98,790 पुरुष, 1,03,717 महिलाएं और 11 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल थे. यहां मतदान प्रतिशत काफी ऊंचा रहा और 83.94 प्रतिशत मतदान हुआ. कुल 1,69,483 वैध वोट डाले गए.
राजनीतिक इतिहास की बात करें तो कुट्टियाडी में परंपरागत रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच मुकाबला होता रहा है. 2011 के विधानसभा चुनाव में CPI(M) की के. के. लतिका ने 70,258 वोट पाकर जीत दर्ज की थी. 2016 में यह सीट यूडीएफ के प्रत्याशी परक्कल अब्दुल्ला (IUML) ने मात्र 1,157 वोटों के अंतर से जीती, जहां उन्हें 71,809 और CPI(M) के प्रत्याशी को 70,652 वोट मिले. 2021 में फिर से सीट एलडीएफ के खाते में गई और CPI(M) के के. पी. कुन्हम्मद कुट्टी ने जीत हासिल की.
2021 के चुनाव परिणामों में के. पी. कुन्हम्मद कुट्टी को 80,143 वोट (लगभग 47.20 प्रतिशत) मिले, जबकि IUML के परक्कल अब्दुल्ला को 79,810 वोट (करीब 47.01 प्रतिशत) प्राप्त हुए. बाकी वोट निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवारों को मिले. जीत का अंतर सिर्फ 333 वोटों का रहा, जो कुल मतों का लगभग 0.2 प्रतिशत था. यह पूरे केरल के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक था और इससे साफ होता है कि कुट्टियाडी में हर एक वोट का कितना महत्व है.
मतदाता व्यवहार की बात करें तो यहां आमतौर पर 80 प्रतिशत से अधिक मतदान होता है, जो केरल में लोगों की राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है. यह क्षेत्र किसी एक पार्टी का स्थायी गढ़ नहीं है, बल्कि उम्मीदवार, राजनीतिक गठबंधन और उस समय के मुद्दों के आधार पर परिणाम बदलते रहते हैं.
सामाजिक-आर्थिक रूप से कुट्टियाड़ी में खेती आज भी एक प्रमुख आजीविका है, जिसमें नारियल, सुपारी और मसालों की खेती शामिल है. इसके अलावा खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों से आने वाली रेमिटेंस से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है. अर्ध-शहरी क्षेत्रों में व्यापार और छोटे उद्योग भी आर्थिक गतिविधियों में योगदान देते हैं.
स्थानीय विकास के प्रमुख मुद्दों में सड़क और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं, कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार, शिक्षा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तथा स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार शामिल हैं.
पर्यटन के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है, जहां कुट्टियाड़ी बांध, जनकीकाड़ इको-टूरिज़्म सेंटर और पेरुवन्नामुझी वन्यजीव अभयारण्य व जंगल क्षेत्र प्रमुख आकर्षण हैं.
(Sreya Prasad)