मनकड़ा विधानसभा क्षेत्र केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित है. यह राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले लोकसभा चुनावों में मलप्पुरम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और केरल विधानसभा की 140 सीटों में इसे निर्वाचन क्षेत्र संख्या 39 के रूप में पहचाना जाता है. इस क्षेत्र में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के तहत इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की मजबूत
संगठनात्मक पकड़ मानी जाती है. उत्तर केरल के चुनावी नक्शे में मनकड़ा एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली सीट है, जहां IUML लंबे समय से प्रमुख भूमिका निभाती रही है.
भौगोलिक और स्थानीय प्रशासनिक दृष्टि से मनकड़ा विधानसभा क्षेत्र मलप्पुरम जिले के उत्तरी हिस्से में आता है और इसमें ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी (सेमी-अर्बन) इलाके शामिल हैं. यह क्षेत्र मुख्य रूप से पेरिंथलमन्ना तालुक में आता है, जिसमें अंगाडीपुरम, कूट्टिलंगाडी, कुरुवा, मक्कारापरम्बा, मनकड़ा, मूर्क्कनाड और पुझक्कट्टिरी पंचायतें शामिल हैं. यानी यह सीट कई पंचायतों का मिलाजुला क्षेत्र है, जहां गांवों के साथ-साथ छोटे कस्बाई इलाके भी मौजूद हैं.
मतदाता भागीदारी और जनसंख्या की बात करें तो चुनाव आयोग (Election Commission of India) की आधिकारिक सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में मनकड़ा में कुल 2,18,774 पंजीकृत मतदाता थे. इस चुनाव में यहां लगभग 77.32% मतदान दर्ज हुआ, जो यह दर्शाता है कि लोग चुनाव में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं. यहां पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या भी लगभग बराबर रही. आबादी के लिहाज से इस क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ हिंदू और ईसाई समुदाय भी अच्छी संख्या में मौजूद हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि और इतिहास की बात करें तो मनकड़ा सीट 1957 में पहली केरल विधानसभा के गठन के समय से अस्तित्व में है. तब से लेकर अब तक इस सीट पर कई अलग-अलग नेताओं और दलों ने प्रतिनिधित्व किया है, लेकिन कुल मिलाकर इसका चुनावी इतिहास ज्यादातर IUML और UDF के प्रभाव में रहा है. हालांकि समय-समय पर यहां मुकाबला काफी कड़ा भी रहा है, खासकर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के तहत कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) [CPI(M)] ने कई बार IUML को मजबूत चुनौती दी है. विशेष रूप से 2016 और 2021 के चुनावों में मुकाबला बेहद करीबी रहा. 2011 में IUML के टी. ए. अहमद कबीर ने यह सीट जीती थी. उन्होंने 2016 में भी जीत दर्ज की, लेकिन इस बार जीत का अंतर कम था, जिससे यह साफ हुआ कि सीट पर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है.
2021 के विधानसभा चुनाव ने मनकड़ा की राजनीतिक अहमियत और प्रतिस्पर्धात्मक स्वरूप को फिर से साबित कर दिया. चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, IUML (UDF) के मंजलमकुझी अली को 83,231 वोट मिले, जो कुल वैध मतों का लगभग 49.46% था. उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी CPI(M) (LDF) के एडवोकेट टी. के. रशीदअली को 76,985 वोट मिले, जो लगभग 45.75% रहा. वहीं भाजपा (BJP) के उम्मीदवार साजेश एलयिल को 6,641 वोट मिले, जो करीब 3.95% थे. मंजलमकुझी अली की जीत का अंतर 6,246 वोट रहा, यानी कुल मतदान का लगभग 3.72% रही. यह अंतर बताता है कि चुनाव कितनी कड़ी टक्कर वाला था और CPI(M) के मजबूत प्रदर्शन के बावजूद IUML अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रही.
मतदाता व्यवहार और चुनावी रुझानों को देखें तो मनकड़ा में चुनावी समीकरण मोर्चा आधारित मुकाबले, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान और पार्टी के प्रति पारंपरिक समर्थन, इन तीनों का मिश्रण दिखाते हैं. IUML, UDF के तहत, अपने लंबे राजनीतिक इतिहास और मजबूत संगठन के कारण यहां अपना स्थायी वोट बैंक बनाए हुए है. लेकिन दूसरी ओर, LDF खासकर CPI(M) ने कई चुनावों में अपने वोट शेयर को बढ़ाया है और स्थानीय मुद्दों को उठाकर कुछ वर्गों में प्रभावी समर्थन जुटाया है. इसी कारण पिछले कुछ चुनावों, खासकर 2016 और 2021, में मुकाबला बेहद तीखा रहा. इससे यह भी पता चलता है कि यहां के मतदाता जागरूक हैं और चुनावी माहौल को सक्रिय रूप से प्रभावित करते हैं. भाजपा अभी तक मनकड़ा में बड़ी चुनौती के रूप में उभर नहीं पाई है, लेकिन उसका चुनाव लड़ना और कुछ प्रतिशत वोट हासिल करना यह दिखाता है कि क्षेत्र में बहुदलीय राजनीतिक माहौल मौजूद है.
स्थानीय मुद्दों (Local Concerns) की बात करें तो मनकड़ा क्षेत्र में लोगों की मुख्य मांगें और समस्याएं आम तौर पर सड़क और आधारभूत ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का विकास, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच, तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर से जुड़ी रहती हैं. इन मुद्दों का चुनावों में प्रभाव भी साफ देखा जाता है.
पर्यटन और धार्मिक स्थलों के रूप में मनकड़ा क्षेत्र में कुछ प्रमुख स्थान भी हैं, जिनमें थिरुमंधमकुन्नु भगवती मंदिर, अंगाडीपुरम जुम्मा मस्जिद, और मनकड़ा पल्लिपुरम जुम्मा मस्जिद शामिल हैं. ये स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाते हैं.
(श्रेया प्रसाद)