बेपोर विधानसभा क्षेत्र केरल के कोझिकोड जिले में स्थित है. यह केरल विधानसभा की 140 सीटों में से सीट संख्या 29 है और लोकसभा चुनावों में कोझिकोड संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है. 1965 में अस्तित्व में आने के बाद से यह सीट केरल की राजनीति में खास भूमिका निभाती रही है. खासतौर पर मलाबार क्षेत्र में इसे वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) का मजबूत गढ़ माना
जाता है.
प्रशासनिक और भौगोलिक रूप से बेपोर विधानसभा क्षेत्र मलाबार तट पर कोझिकोड जिले में स्थित है. इसमें कोझिकोड तालुक के अंतर्गत आने वाले बेपोर, चेरुवन्नूर-नल्लालम, फेरोक, कदलुंडी और रामनट्टुकरा पंचायतें शामिल हैं. बेपोर नगर एक ऐतिहासिक बंदरगाह और जहाज निर्माण केंद्र रहा है, जो खासतौर पर ‘उरू’ नामक पारंपरिक लकड़ी के जहाजों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है. यहां मुस्लिम, हिंदू और ईसाई समुदायों की बड़ी आबादी रहती है, जिससे यह क्षेत्र सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से विविध है. यह इलाका शहरी, अर्ध-शहरी और तटीय ग्रामीण क्षेत्रों का मिश्रण है.
मतदाता भागीदारी की बात करें तो 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में यहां कुल 2,08,219 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें 1,01,821 पुरुष, 1,06,390 महिलाएं और 8 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल थे. कुल 1,64,589 वैध वोट पड़े और लगभग 79.4 प्रतिशत मतदान हुआ, जो इस क्षेत्र में लोगों की मजबूत लोकतांत्रिक भागीदारी को दर्शाता है.
राजनीतिक इतिहास की बात करें तो इस सीट पर शुरू से ही वाम दलों का प्रभाव रहा है. 1982 के बाद से ज्यादातर चुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) ने जीत दर्ज की है. टी. के. हमजा, एलमारम करीम और वी. के. सी. मम्मद कोया जैसे नेताओं ने यहां पार्टी की जड़ें मजबूत कीं. हालांकि शुरुआती दौर में कांग्रेस का भी प्रभाव रहा और 1977 व 1980 में एन. पी. मोइदीन ने इस सीट से जीत हासिल की थी.
2021 के विधानसभा चुनाव में बेपोर में एलडीएफ को बड़ी जीत मिली. सीपीआई(एम) के पी. ए. मोहम्मद रियास को 82,165 वोट मिले, जो कुल मतों का लगभग 49.73 प्रतिशत थे. कांग्रेस के पी. एम. नियास को 53,418 वोट (करीब 32.33 प्रतिशत) मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे. भाजपा के के. पी. प्रकाश बाबू को 26,267 वोट (लगभग 15.90 प्रतिशत) मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे. जीत के बाद पी. ए. मोहम्मद रियास केरल सरकार में लोक निर्माण और पर्यटन मंत्री बने.
मतदाता व्यवहार और चुनावी रुझानों को देखें तो 1980 के दशक से यह सीट लगातार एलडीएफ का गढ़ बनी हुई है. सीपीआई(एम) की मजबूत संगठनात्मक पकड़ और श्रमिक, तटीय तथा शहरी आबादी का समर्थन इसकी मुख्य वजह है. कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) मुख्य विपक्षी रहा है और कई बार जोरदार मुकाबला किया, लेकिन अब तक वामपंथी आधार को तोड़ नहीं सका. हाल के वर्षों में भाजपा और एसडीपीआई जैसी पार्टियों को भी कुछ वोट मिले हैं, जिससे धीरे-धीरे बहुदलीय मुकाबले का माहौल बन रहा है.
विकास के प्रमुख मुद्दों में शहरी ढांचा और नागरिक सुविधाएं, तटीय और बंदरगाह विकास, रोजगार के अवसर और आर्थिक प्रगति, तथा समाज के सभी वर्गों के लिए कल्याण और समावेशन शामिल हैं.
पर्यटन की दृष्टि से बेपोर क्षेत्र काफी आकर्षक है. यहां बेपोर बीच, उरू शिपबिल्डिंग यार्ड, बेपोर पोर्ट और फिशिंग हार्बर, पुलिमुट्टु (पत्थरों से बना समुद्री किनारे का पियर), फ्लोटिंग ब्रिज और वॉकवे, बेपोर लाइटहाउस तथा कदलुंडी बर्ड सैंक्चुअरी प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं.
(Sreya Prasad)