चेलाक्कारा विधानसभा क्षेत्र (Chelakkara Assembly Constituency) केरल के त्रिशूर जिले का अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र है. यह अलाथूर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और केरल विधानसभा की 140 सीटों में 61वीं सीट है. यह सीट केरल की राजनीति में खास महत्व रखती है, क्योंकि लंबे समय से यह वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और खासकर कम्युनिस्ट पार्टी
ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) [CPI(M)] का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है.
भौगोलिक और प्रशासनिक रूप से देखें तो चेलाक्कारा क्षेत्र में त्रिशूर जिले के अंदर कृषि प्रधान ग्रामीण इलाकों और कुछ अर्ध-शहरी (semi-urban) हिस्सों का मिश्रण मिलता है. यह क्षेत्र थालप्पिल्ली तालुक में आता है और इसमें चेलाक्करा, देसमंगलम, कोंडाझी, मुल्लूरकरा, पंजाल, पझयन्नूर, तिरुविल्वमाला, वल्लथोल नगर, और वरवूर पंचायतें शामिल हैं. भौगोलिक तौर पर यह मध्य केरल में स्थित है और यहां की खेती व सिंचाई पर भरतपुझा नदी प्रणाली का प्रभाव माना जाता है.
मतदाता भागीदारी और मतदाता वर्ग की बात करें तो 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में चेलाक्कारा में करीब 1,98,392 मतदाता थे. इस सीट पर आम तौर पर वोटिंग प्रतिशत काफी अच्छा रहता है. 2024 के उपचुनाव में यहां लगभग 74.5% मतदान दर्ज किया गया था, जो बताता है कि मतदाता चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाते हैं.
प्रतिनिधित्व और राजनीतिक इतिहास में चेलाक्कारा ने समय के साथ बड़ा बदलाव देखा है. पहले के दौर में यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रभाव अधिक था और कांग्रेस ने 1967 से 1991 के बीच कई बार यह सीट जीती. लेकिन 1990 के मध्य (mid-1990s) के बाद से यहां CPI(M) सबसे मजबूत राजनीतिक शक्ति बनकर उभरी. 2011 और 2016 में यू आर प्रदीप (CPI(M), LDF) ने यह सीट जीती. इसके बाद 2021 में के. राधाकृष्णन (CPI(M), LDF) विजयी रहे. फिर 2024 के उपचुनाव में भी यू आर प्रदीप (CPI(M), LDF) दोबारा विधायक चुने गए. हाल के वर्षों में यहां के सभी विधायक LDF से जुड़े रहे हैं, जिससे यह साफ होता है कि लगातार चुनावों में इस क्षेत्र ने वामपंथी नेतृत्व को स्थिर समर्थन दिया है.
2021 के विधानसभा चुनाव परिणाम के अनुसार के. राधाकृष्णन (CPI(M), LDF) ने 83,415 वोट हासिल किए, जो कुल वैध मतों का लगभग 54.41% था। वहीं सी.सी. श्रीकुमार (INC, UDF) को 44,015 वोट मिले और शाजान वट्टेक्कड़ (BJP, NDA) को 24,045 वोट प्राप्त हुए. इस चुनाव में के. राधाकृष्णनन ने लगभग 39,400 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की और क्षेत्र में LDF की मजबूती बरकरार रखी.
इसके बाद नवंबर 2024 में चेलाक्कारा में उपचुनाव हुआ, क्योंकि के. राधाकृष्णन लोकसभा के लिए चुने गए और विधानसभा सीट खाली हो गई. इस उपचुनाव ने भी LDF के दबदबे की पुष्टि की. इसमें यू आर प्रदीप (CPI(M), LDF) को 64,827 वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज की. दूसरे स्थान पर राम्या हरिदास (Indian National Congress, UDF) रहीं, जिन्हें 52,626 वोट मिले. वहीं के बालाकृष्णन (BJP, NDA) को 33,609 वोट मिले. हालांकि UDF और NDA ने अच्छा मुकाबला किया, लेकिन प्रदीप की जीत का अंतर 12,000 से अधिक वोट रहा, जिससे LDF को एक नया जनादेश मिला.
सामाजिक-आर्थिक रूप से चेलाक्कारा की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित है. यहां बड़े पैमाने पर धान (paddy) की खेती, नारियल की खेती और सब्जियों का उत्पादन होता है, जो घरेलू जरूरतों और बाजार, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. यहां के किसान समुदाय में बड़ी संख्या छोटे और सीमांत किसानों की है, इसलिए स्थानीय आर्थिक मुद्दों पर सिंचाई की सुविधा और बाजार से जुड़ाव का प्रभाव काफी रहता है. छोटे कस्बे और बाजार यहां व्यापार और सेवा क्षेत्र की नौकरियों को बढ़ावा देते हैं. इसके अलावा, कई परिवारों के सदस्य विदेश या भारत के दूसरे राज्यों में काम करते हैं, जिससे आने वाला रिमिटेंस (remittances) घरेलू आय को मजबूत करता है.
मतदाता व्यवहार और चुनावी समीकरण की बात करें तो चेलाक्कारा में पिछले करीब दो दशकों से अधिक समय से LDF की पकड़ मजबूत बनी हुई है और mid-1990s के बाद से CPI(M) के नेता लगातार विधानसभा चुनाव जीतते रहे हैं. फिर भी चुनाव पूरी तरह एकतरफा नहीं हैं, क्योंकि LDF की निरंतर जीत के बावजूद UDF (कांग्रेस के नेतृत्व में) और NDA (BJP के नेतृत्व में) यहां प्रभावी ताकतें बनी हुई हैं, इसलिए मुकाबला अक्सर बहुआयामी और प्रतिस्पर्धात्मक रहता है.
स्थानीय मुद्दों और प्रमुख चिंताओं में सबसे अहम हैं, कृषि को टिकाऊ बनाना, रोजगार और आजीविका की सुरक्षा, इन्फ्रास्ट्रक्चर/बुनियादी सुविधाओं का विकास, और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, खासकर बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े मुद्द.।
पर्यटन स्थलों की बात करें तो चेलाक्कारा क्षेत्र और आसपास के इलाके में कुछ प्रमुख आकर्षण हैं जैसे, Mannathipara Waterfalls, Sri Narasimhamoorthy Temple, Kerala Kalamandalam, और Thiruvilwamala Temple।.
(श्रेया प्रसाद)