तनूर विधानसभा क्षेत्र केरल विधानसभा की 140 सीटों में से एक है, जो केरल के मलप्पुरम जिले में आता है. इसे निर्वाचन क्षेत्र संख्या 44 के रूप में जाना जाता है और लोकसभा चुनावों के लिए यह पोन्नानी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा रहा है. यह सीट अपने तेज-तर्रार और कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले राजनीतिक माहौल के लिए काफी मशहूर है, जहां कई राजनीतिक दल सक्रिय रहते
हैं.
तनूर, मलप्पुरम जिले के तिरूर तालुक में स्थित है. यह इलाका मलाबार तट के किनारे फैला हुआ है, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन बंदरगाह (पोर्ट) नगर के इतिहास के लिए जाना जाता है. इस विधानसभा क्षेत्र में तिरूर तालुक की कई पंचायतें शामिल हैं, जिनमें चेरियामुंडम, निरामरुथुर, ओझूर, पोन्मुंडम, थनालुर और तनूर पंचायत प्रमुख हैं.
मतदाताओं की बात करें तो 2021 के केरल विधानसभा चुनाव से पहले उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार तनूर में कुल 1,96,123 पंजीकृत मतदाता थे. 2021 के चुनाव में यहां मतदान प्रतिशत 77.87% रहा. तनूर में कई चुनावों में लगातार अच्छा मतदान देखने को मिलता है, जो अक्सर 70% के मध्य से लेकर 70% के ऊपरी स्तर तक रहता है.
राजनीतिक इतिहास के लिहाज से तनूर 1957 में अस्तित्व में आने के बाद से ही एक जीवंत राजनीतिक मैदान रहा है. शुरुआती दौर में यहां केरल की बदलती राजनीति की झलक दिखाई देती है, जहां 1957 और 1960 में सी. एच. मोहम्मद कोया विजेता रहे. इसके बाद के दशकों में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) तनूर में एक मजबूत और प्रभावशाली शक्ति बनकर उभरी. यू. ए. बीरान, ई. अहमद, पी. सीथी हाजी और अब्दुरहिमान रंदाथानी जैसे नेताओं ने लंबे समय तक यहां IUML को आगे बढ़ाया. खासतौर पर IUML के अब्दुरहिमान रंदाथानी ने 2006 और 2011 में लगातार बड़ी जीत दर्ज की, जिससे पार्टी की मजबूत संगठन क्षमता और स्थानीय पकड़ साफ दिखती है.
हालांकि 2016 में तनूर की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब नेशनल सेक्युलर कॉन्फ्रेंस (NSC) के वी. अब्दुरहिमान ने IUML उम्मीदवार अब्दुरहिमान रंदाथानी को लगभग 4,918 वोटों के अंतर से हराया. यह नतीजा IUML के लगभग लगातार चले आ रहे दबदबे से अलग एक बड़ा मोड़ माना गया.
2021 के विधानसभा चुनाव के परिणाम भी बहुत रोचक और बेहद करीबी रहे. चुनाव आयोग के आधिकारिक नतीजों के अनुसार, NSC के वी. अब्दुरहिमान ने 70,704 वोट हासिल कर सीट जीती, जो कुल वैध मतों का लगभग 46.34% था. उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी IUML के पी. के. फिरोज रहे, जिन्हें 69,719 वोट मिले. इस चुनाव में जीत का अंतर केवल 985 वोटों का था, जिसके कारण तनूर 2021 में केरल की सबसे कांटे की टक्कर वाली सीटों में गिनी गई. यह बेहद कम अंतर इस बात को दिखाता है कि यहां चुनावी मुकाबला कितना प्रतिस्पर्धी है.
तनूर का मतदाता व्यवहार और चुनावी समीकरण कई चीजों के मेल से बनता है. जैसे स्थानीय मुद्दों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने वाली राजनीति, उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, और पार्टी के प्रति पारंपरिक निष्ठ. ऐतिहासिक रूप से IUML की मजबूत संगठनात्मक व्यवस्था ने उसे यहां स्थायी आधार दिया है, खासकर उन समुदायों में जो पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से जुड़े रहे हैं. लेकिन NSC के वी. अब्दुरहिमान की जीत यह भी दिखाती है कि अगर उम्मीदवार की व्यक्तिगत विश्वसनीयता मजबूत हो और स्थानीय स्तर पर प्रचार प्रभावी हो, तो मतदाता स्थापित पार्टी ढांचे के बावजूद बदलाव कर सकते हैं.
सामाजिक-आर्थिक स्थिति की बात करें तो तनूर एक तटीय और अर्ध-शहरी (सेमी-अर्बन) क्षेत्र है. यहां की अर्थव्यवस्था छोटे व्यापार, मछली पकड़ने, कृषि, सेवा क्षेत्र और खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस (विदेश से भेजी गई कमाई) पर काफी हद तक निर्भर है.
यहां के प्रमुख मुद्दों में बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है, खासकर सड़कें और परिवहन कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना. इसके साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, और छोटे व्यवसायों को सहायता देना भी बड़े मुद्दे हैं. पर्यावरण संरक्षण भी यहां बेहद महत्वपूर्ण विषय है, विशेषकर तटीय इलाकों में, जहां समुद्री कटाव (कोस्टल इरोजन) और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव लगातार बढ़ रहे हैं.
पर्यटन के लिहाज से भी तनूर में कई आकर्षक जगहें हैं, जनिमें तनूर बीच, तनूर जेट्टी, तनूर टाउन हेरिटेज और पुराना पोर्ट (ओल्ड पोर्ट), तथा तनूर केरलदेशपुरम मंदिर शामिल है.
(श्रेया प्रसाद)