मनंतवाडी, जो केरल के उत्तरी हिस्से में स्थित वायनाड जिले में है, केरल विधानसभा की निर्वाचन क्षेत्रों की सूची में निर्वाचन क्षेत्र संख्या 17 है. लोकसभा चुनावों में यह वायनाड संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता हैच. वर्तमान में इस लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी सांसद हैं. मनंतवाडी एक अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीट है,
जो यहां की जनसंख्या संरचना को दर्शाता है.
प्रशासनिक और भौगोलिक रूप से मनंतवाडी एक पहाड़ी और वन क्षेत्र वाला इलाका है, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी और ग्रामीण आबादी रहती है. यहां ऊंचे-नीचे पहाड़, घने जंगल और खेती की जमीनें पाई जाती हैं. पहले इसे “नॉर्थ वायनाड” कहा जाता था, लेकिन परिसीमन के बाद इसे मनंतवाडी विधानसभा क्षेत्र के रूप में वर्तमान स्वरूप मिला.
भारत निर्वाचन आयोग की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार यहां कुल 1,95,326 पंजीकृत मतदाता थे. 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां 78.33% मतदान हुआ, जिसमें 1,52,994 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. यह केरल में नागरिक भागीदारी की मजबूत परंपरा को दर्शाता है.
मनंतवाडी विधानसभा क्षेत्र में मनंतवाडी तालुक की एडवाका, मनंतवाडी, थाविन्हाल, तिरुनेली, थोंडरनाड और वेल्लामुंडा पंचायतें शामिल हैं, जो स्थानीय स्वशासन की इकाइयां हैं.
इस क्षेत्र की सामाजिक संरचना में कुरिचिया, आदियन और पनिया जैसी कई अनुसूचित जनजातियां बड़ी संख्या में रहती हैं. यहां की राजनीति में अक्सर आदिवासी कल्याण, वन भूमि तक पहुंच, भूमि अधिकार और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहते हैं. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और बागान मजदूरी पर आधारित है. पहाड़ी इलाकों में काली मिर्च, कॉफी और इलायची की खेती बड़े पैमाने पर होती है.
राजनीतिक दृष्टि से मनंतवाडी में लंबे समय से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच मुकाबला रहा है. कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] यहां की मुख्य राजनीतिक ताकतें रही हैं.
2011 में बने इस नए विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक पी. के. जयलक्ष्मी (कांग्रेस) थीं. 2016 के चुनाव में ओ. आर. केलु (CPI(M)) ने उन्हें मात्र 1,307 वोटों से हराकर जीत हासिल की, जिससे इस क्षेत्र में वामपंथी प्रभाव बढ़ता हुआ दिखाई दिया.
2021 के केरल विधानसभा चुनाव में भी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने यहां जीत दर्ज की. CPI(M) के ओ. आर. केलु को 72,536 वोट (लगभग 47.54%) मिले, जबकि कांग्रेस की पी. के. जयलक्ष्मी को 63,254 वोट (करीब 41.46%) प्राप्त हुए. भाजपा के पलियारा मुकुंदन तीसरे स्थान पर रहे, जिन्हें 13,142 वोट (लगभग 8.62%) मिले. एसडीपीआई की बबिता श्रीनु को 1,992 वोट (लगभग 1.31%) मिले, जबकि नोटा और अन्य उम्मीदवारों को बहुत कम मत मिले. केलु ने लगभग 9,282 वोटों के अंतर से जीत हासिल की और 2016 के बाद अपनी सीट बरकरार रखी.
यहां के चुनावी रुझान बताते हैं कि मनंतवाडी में LDF और UDF के बीच कड़ा मुकाबला रहता है. 2011 में कांग्रेस की जीत के बाद 2016 और 2021 में CPI(M) की लगातार सफलता यह दिखाती है कि मतदाता स्थानीय मुद्दों जैसे आदिवासी विकास, ग्रामीण सड़कें, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के साथ-साथ राज्य की राजनीति से भी प्रभावित होते हैं.
इस क्षेत्र की मुख्य विकास प्राथमिकताओं में आदिवासी अधिकार और कल्याण, ग्रामीण आधारभूत ढांचा, कृषि और आजीविका के साधन, तथा स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच शामिल हैं.
पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से मनंतवाडी और उसके आसपास कई प्रसिद्ध स्थल हैं, जिनमें पझस्सी राजा समाधि और संग्रहालय, वलियूर कावु मंदिर, कुरुवा द्वीप, मीनमुट्टी जलप्रपात, ब्रह्मगिरि पहाड़ियां और तिरुनेली मंदिर प्रमुख हैं. ये स्थान न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखते हैं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी प्रसिद्ध हैं.
(Sreya Prasad)