कुन्नमकुलम विधानसभा क्षेत्र केरल के त्रिशूर जिले में स्थित है और केरल विधानसभा की 140 सीटों में यह 62वां निर्वाचन क्षेत्र है. यह एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है और संसदीय चुनाव के लिए यह अलाथुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. प्रशासनिक और भौगोलिक रूप से यह सीट मध्य केरल के त्रिशूर जिले में आती है, जो छोटे कस्बों, शहरी इलाकों और आसपास के ग्रामीण
क्षेत्रों के मिश्रण के लिए प्रसिद्ध है. इस विधानसभा क्षेत्र में कुन्नमकुलम नगरपालिका के साथ-साथ थालप्पिल्ली तालुक की चोवन्नूर, एरुमापेट्टी, कडंगोडे, कडवल्लूर, कट्टाकमपल, पोर्कुलम और वेलूर पंचायतें शामिल हैं. कुन्नमकुलम शहर खुद एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाला व्यापारिक केंद्र है, जो अपने जीवंत बाजारों, प्रिंटिंग (छपाई) और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, साथ ही इसका आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी गहरा जुड़ाव है.
मतदाता भागीदारी की बात करें तो चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां लगभग 1,98,378 पंजीकृत मतदाता थे. इस सीट पर मतदान प्रतिशत आमतौर पर मजबूत रहा है और अक्सर 75% से अधिक रहता है, जो केरल की सक्रिय राजनीतिक भागीदारी को दर्शाता है. 2021 में यहां 78.05% मतदान हुआ. राजनीतिक इतिहास की बात करें तो कुन्नमकुलम में हमेशा प्रतिस्पर्धात्मक राजनीति रही है और यहां मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधनों के बीच मुकाबला होता रहा है, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) जिसका नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) करती है, और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) जिसका नेतृत्व कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) [CPI(M)] करती है. 2011 में CPI(M) ने बहुत कम अंतर से यह सीट जीती थी. 2016 में जब मध्य केरल में वामपंथी लहर मजबूत थी, तब ए. सी. मोइदीन (CPI(M)) ने जीत दर्ज कर LDF की स्थिति को और मजबूत किया. 2021 में भी ए. सी. मोइदीन (CPI[M], LDF) ने बड़े अंतर से जीत हासिल की.
2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजों में ए. सी. मोइदीन (CPI(M), LDF) को 75,532 वोट मिले, जो कुल वैध वोटों का लगभग 48.78% था. उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी के. जयशंकर (INC, UDF) रहे, जिन्हें 48,901 वोट मिले. बीजेपी (NDA) के उम्मीदवार के. के. अनीशकुमार को 27,833 वोट प्राप्त हुए, जबकि SDPI के वी. एस. अबूबक्कर को 1,241 वोट मिले. इस तरह ए. सी. मोइदीन ने 26,631 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की, जिससे CPI(M) उम्मीदवार की स्पष्ट और मजबूत जीत सामने आई.
सामाजिक-आर्थिक रूप से कुन्नमकुलम की अर्थव्यवस्था छोटे व्यवसायों, सेवाओं, खेती और व्यापार पर आधारित है. यह क्षेत्र लंबे समय से बाजार व्यापार और छोटे उद्यमों के लिए प्रसिद्ध रहा है, जो शहर और आसपास के गांवों, दोनों के ग्राहकों की जरूरतें पूरी करते हैं. ग्रामीण इलाकों में खेती भी होती है और यहां सब्जियां, केला, नारियल और धान जैसी फसलें स्थानीय लोगों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत हैं. इसके अलावा विदेशों में, खासकर खाड़ी देशों में काम करने वाले लोगों से आने वाली रिमिटेंस (विदेश से भेजा गया पैसा) भी कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को सहारा देती है.
मतदाता व्यवहार और चुनावी समीकरणों में LDF, विशेष रूप से CPI(M) का संगठनात्मक आधार काफी मजबूत माना जाता है. यह ताकत ट्रेड यूनियनों, सहकारी आंदोलनों और जमीनी नेटवर्क से आती है, जो खेती करने वाले और कामकाजी वर्ग के मतदाताओं में प्रभाव रखती है. UDF इस क्षेत्र में लगातार सबसे बड़ा विपक्षी मोर्चा बना हुआ है. वहीं भाजपा (NDA) ने हाल के वर्षों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है और खासकर युवा मतदाताओं के बीच उसका वोट शेयर बढ़ा है, हालांकि अभी तक वह यह सीट जीत नहीं पाई है.
स्थानीय मुद्दों में मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (सड़क, सुविधाएं, विकास कार्य) और कृषि सहायता जैसे विषय प्रमुख हैं. पर्यटन की दृष्टि से भी इस क्षेत्र में कुछ खास स्थान हैं, जिनमें अरथत सेंट मैरीज ऑर्थोडॉक्स कैथेड्रल, श्री चिरावरंबथुकावु भगवती मंदिर, कल्लायी कुन्नु, और कलाशमाला इको-टूरिज्म सेंटर शामिल हैं.
(श्रेया प्रसाद)