नीलांबुर विधानसभा क्षेत्र केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित है. लोकसभा चुनावों के लिए यह वायनाड संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है और केरल विधानसभा की 140 सीटों में यह 35वां निर्वाचन क्षेत्र है. नीलांबुर को उत्तर केरल की एक राजनीतिक रूप से सक्रिय और हमेशा कड़ी टक्कर वाली सीट माना जाता रहा है.
पंचायतों को मिलाकर बना है, जिनमें अमरंबलम, चुंगथारा, एडक्करा, करुलाई, मुथेडम, नीलांबुर, पोथुकल और वाझिक्कडावु पंचायतें शामिल हैं. इस क्षेत्र का भूगोल काफी विविध है, यहां घने जंगल, बड़े-बड़े प्लांटेशन, छोटे कस्बे और ग्रामीण गांव देखने को मिलते हैं. नीलांबुर का इलाका केरल के फॉरेस्ट बेल्ट में खास पहचान रखता है, क्योंकि यह अपने प्रसिद्ध सागौन (Teak) के जंगलों, सागौन के प्लांटेशन और लकड़ी के उद्योग (लंबर इंडस्ट्री) के लिए जाना जाता है.
मतदाता भागीदारी की बात करें तो 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में नीलांबुर में लगभग 2,18,238 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें करीब 1,11,289 पुरुष, 1,06,946 महिलाएं और कुछ मतदाता थर्ड जेंडर के भी शामिल थे. कुल लगभग 1,73,205 वोट डाले गए थे, जिससे यहां का मतदान प्रतिशत लगभग 75.23% रहा.
राजनीतिक इतिहास में नीलांबुर को लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) का मजबूत गढ़ माना जाता था. इसकी बड़ी वजह कांग्रेस के दिग्गज नेता आर्यदान मोहम्मद रहे, जिन्होंने 1980 के दशक के अंत से लेकर 2010 के शुरुआती वर्षों तक कई बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. लेकिन हाल के चुनावों में यहां का राजनीतिक रुझान बदलता दिखा और परिणाम भी चौंकाने वाले आए. 2016 के केरल विधानसभा चुनाव में एलडीएफ (LDF) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार पी. वी. अनवर ने कांग्रेस-यूडीएफ के आर्यदान शौकत को 11,504 वोटों से हराया. यह नतीजा नीलांबुर की राजनीति में बड़ा बदलाव माना गया, क्योंकि इससे यूडीएफ का लंबे समय से चला आ रहा दबदबा टूट गया.
2021 के विधानसभा चुनाव में भी नीलांबुर में कांटे की टक्कर और अप्रत्याशित नतीजों का सिलसिला जारी रहा. चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एलडीएफ समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार पी. वी. अनवर को 81,227 वोट मिले, जो कुल वैध मतों का लगभग 46.90% था. उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस-यूडीएफ के एडवोकेट वी. वी. प्रकाश रहे, जिन्हें 78,527 वोट मिले. वहीं भाजपा-एनडीए (BJP-NDA) के एडवोकेट टी. के. अशोककुमार को 8,595 वोट मिले, एसडीपीआई (SDPI) के के. बाबू मणि को 3,281 वोट मिले, जबकि अन्य निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवारों को बहुत कम वोट मिले. इस चुनाव में पी. वी. अनवर सिर्फ 2,700 वोटों के बेहद छोटे अंतर से जीते, जिससे साफ हुआ कि यह सीट कितनी ज्यादा प्रतिस्पर्धी है.
इसके बाद 2025 की शुरुआत में यहां उपचुनाव हुआ, क्योंकि पी. वी. अनवर ने एलडीएफ छोड़कर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) जॉइन कर ली और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. नीलांबुर उपचुनाव में 19 जून 2025 को बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला. कांग्रेस-यूडीएफ के आर्यदान शौकत ने एलडीएफ के एम. स्वराज को 11,077 वोटों से हराकर यह सीट जीत ली. यह जीत नीलांबुर में यूडीएफ की बड़ी वापसी मानी गई और यह मौजूदा विधानसभा कार्यकाल में पहली बार हुआ जब एलडीएफ ने अपनी किसी बैठी हुई (सिटिंग) सीट को विपक्ष के हाथों गंवाया. इस उपचुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग 75.27% रहा, जो 2021 के चुनाव से थोड़ा अधिक था. इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि नीलांबुर में वोटर लगातार चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रुचि लेते हैं.
नीलांबुर के मतदाताओं का व्यवहार आम तौर पर सक्रिय राजनीतिक भागीदारी और स्थानीय नेताओं के प्रभाव तथा फ्रंट-आधारित (UDF बनाम LDF) रणनीतियों के प्रति संवेदनशीलता से जुड़ा माना जाता है. 2021 में जिस तरह बेहद कम अंतर से जीत-हार तय हुई, उससे यह साबित होता है कि इस सीट पर वोट शेयर में हल्का सा बदलाव भी परिणाम बदल सकता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा तक बेहतर पहुंच, रोजगार के अवसर पैदा करना और ग्रामीण विकास शामिल हैं.
पर्यटन के लिहाज से भी नीलांबुर काफी आकर्षक है. यहां टीक म्यूजियम (Teak Museum), कॉनॉलीज प्लॉट इकोटूरिज्म सेंटर (Conolly's Plot Ecotourism Centre), पुराना डीएफओ बंगला (Old DFO Bungalow), ओरापिंगल वॉटरफॉल्स (Orapingal waterfalls) और अड्यनपारा फॉल्स (Adyanpara Falls) जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मौजूद हैं.
(श्रेया प्रसाद)