वडकारा विधानसभा केरल विधानसभा की 140 सीटों में से 20वीं सीट है. यह कोझिकोड जिले में स्थित है. यह छह अन्य विधानसभा क्षेत्रों के साथ मिलकर वडकारा लोकसभा क्षेत्र बनाती है. इसकी स्थापना 1951 में हुई थी और तब से यह पिछले 70 वर्षों से अधिक समय से केरल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है. यह एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है, जहां विभिन्न
समुदायों की मिश्रित आबादी रहती है, जो इसकी राजनीतिक प्रकृति को प्रभावित करती है.
भौगोलिक और प्रशासनिक रूप से वडकारा विधानसभा क्षेत्र कोझिकोड जिले के उत्तरी भाग में स्थित है. इसके पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में कृषि क्षेत्र व पंचायतें हैं. इस क्षेत्र में वडकारा नगरपालिका तथा अजीयूर, चोरोड, एरामला और ओंचियम पंचायतें शामिल हैं. यहां शहरी और अर्ध-ग्रामीण दोनों इलाके होने के कारण विकास की जरूरतों में ग्रामीण विकास, कृषि, तटीय अर्थव्यवस्था, शहरी ढांचा और नगर सेवाएं प्रमुख मुद्दे हैं.
2021 में यहां लगभग 1,67,406 पंजीकृत मतदाता थे और लोगों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी हमेशा से अच्छी रही है.
राजनीतिक इतिहास की बात करें तो वडकारा में समय-समय पर विभिन्न दलों का प्रभाव रहा है, जो केरल की बहुदलीय राजनीति को दर्शाता है. यहां जन आंदोलन, स्थानीय सामाजिक मुद्दे और प्रभावशाली नेताओं की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है. पहले के वर्षों में जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) जैसे दलों का दबदबा रहा, जिनमें सी. के. नानू जैसे नेताओं ने कई बार जीत हासिल की. 2012 में आरएमपीआई (रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया) के नेता टी. पी. चंद्रशेखरन की हत्या एक बड़ा राजनीतिक मोड़ साबित हुई, जिसका असर खासकर महिलाओं और पहली बार वोट देने वालों की सोच और राजनीतिक रुझान पर लंबे समय तक पड़ा.
2021 के केरल विधानसभा चुनाव में आरएमपीआई की के. के. रेमा ने 65,093 वोट (लगभग 47.63%) प्राप्त कर जीत दर्ज की. लोक तांत्रिक जनता दल (एलजेडी) के मनयथ चंद्रन को 57,602 वोट (लगभग 42.15%) मिले. भारतीय जनता पार्टी के एम. राजेश कुमार तीसरे स्थान पर रहे, जिन्हें 10,225 वोट (लगभग 7.48%) मिले, जबकि एसडीपीआई के मुस्तफा पलेरी को 2,836 वोट (लगभग 2.08%) प्राप्त हुए. के. के. रेमा ने 7,491 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जो कुल वैध मतों का लगभग 5.47% था. वह आरएमपीआई की पहली उम्मीदवार बनीं जिन्होंने वडकारा सीट जीती. वे दिवंगत नेता टी. पी. चंद्रशेखरन की पत्नी भी हैं.
सामाजिक दृष्टि से वडकारा में हिंदू बहुसंख्यक हैं, लेकिन मुस्लिम और ईसाई समुदायों की भी अच्छी-खासी संख्या है. यह विविधता कल्याणकारी नीतियों, तटीय अर्थव्यवस्था और समुदायों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को प्रभावित करती है. यहां महिला मतदाता राजनीतिक रूप से काफी जागरूक मानी जाती हैं और कई बार चुनावों में उनकी भागीदारी 80 प्रतिशत से भी अधिक रही है.
स्थानीय स्तर पर प्रमुख मुद्दों में शहरी बुनियादी ढांचा, तटीय अर्थव्यवस्था, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा, तथा राजनीतिक हिंसा का सामाजिक प्रभाव शामिल है.
पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से वडकारा भी समृद्ध है. यहां का लोकनारकावु मंदिर पारंपरिक लोकगाथाओं और वीर परंपराओं से जुड़ा हुआ एक प्रसिद्ध स्थल है. इसके अलावा वडकारा बीच, कोलावी बीच और मलियाकल बीच जैसे समुद्र तट भी यहां की पहचान हैं, जो पर्यटन और स्थानीय समुदाय के जीवन का अहम हिस्सा हैं.
(Sreya Prasad)