मालमपुझा विधानसभा क्षेत्र केरल विधानसभा की 140 सीटों में 55वीं सीट है और यह पलक्काड जिले में स्थित है. यह सीट पलक्कड़ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. इसका नाम मालमपुझा क्षेत्र के नाम पर रखा गया है, जहां मालमपुझा डैम भी स्थित है. यह डैम केरल की सबसे बड़ी और सबसे पहचान वाली सिंचाई और पर्यटन परियोजनाओं में से एक माना जाता है. मालमपुझा विधानसभा
क्षेत्र की स्थापना 1965 में हुई थी और इसका राजनीतिक इतिहास काफी लंबा और महत्वपूर्ण रहा है.
प्रशासनिक और भौगोलिक रूप से देखें तो मालमपुझा विधानसभा क्षेत्र में पलक्काड़ तालुक के अंतर्गत आने वाले अकथेत्थरा, एलप्पुल्ली, कोडुम्बा, मालमपुझा, मरुथरोड, मुंदूर, पुदुसेरी और पुदुप्परियारम पंचायत शामिल हैं. इस क्षेत्र की भौगोलिक बनावट पर पश्चिमी घाट की तलहटी, जलाशयों और कृषि भूमि का बड़ा प्रभाव है, जिससे यहां के लोगों की आजीविका, खेती और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतें तय होती हैं.
मतदाता भागीदारी और मतदाता संरचना की बात करें तो चुनाव आयोग की आधिकारिक सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में मालमपुझा में कुल 2,13,746 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें 1,03,976 पुरुष, 1,09,768 महिलाएं, और थोड़ी संख्या में थर्ड जेंडर मतदाता शामिल थे. 2021 में यहां कुल 1,62,551 वैध वोट पड़े और लगभग 76.94% मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया.
राजनीतिक प्रतिनिधित्व और इतिहास के लिहाज से मालमपुझा सीट पर लंबे समय से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF), खासकर CPI(M) का प्रभाव रहा है. यह सीट वामपंथी राजनीति का मजबूत गढ़ मानी जाती है. यहां से वी. एस. अच्युतानंदन जैसे बड़े नेता भी विधायक रहे हैं, जो CPI(M) के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं. वर्तमान में A. प्रभाकरन (CPI(M)) मालमपुझा से विधायक हैं, जिन्होंने 2021 का चुनाव जीतकर यह सीट हासिल की.
2021 के विधानसभा चुनाव परिणाम में मालमपुझा में LDF को बड़ी जीत मिली. CPI(M) के A. प्रभाकरन ने 75,934 वोट हासिल किए, जो वैध वोटों का लगभग 46.41% था. दूसरे स्थान पर C. कृष्णकुमार (BJP, NDA) रहे, जिन्हें 50,200 वोट मिले यानी लगभग 30.68%. वहीं S. K. अनंतकृष्णन (कांग्रेस, UDF) को 35,444 वोट प्राप्त हुए.
सामाजिक-आर्थिक स्थिति की बात करें तो मालमपुझा की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. यहां बड़ी संख्या में लोग केले की खेती, धान के खेत, नारियल के बागान और पलक्काड़ की कृषि पट्टी में उगाई जाने वाली अन्य फसलों पर निर्भर हैं. उपजाऊ मैदान और क्षेत्रीय सिंचाई व्यवस्था यहां व्यावसायिक और घरेलू दोनों तरह की खेती को सहारा देते हैं. इसके साथ ही, शहरी क्षेत्रों में व्यापार, सेवाएं, पर्यटन और छोटे उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था को विविधता देते हैं, खासकर कस्बाई इलाकों और मलमपुझा डैम के आसपास. डैम अपने सुंदर बगीचों, बोटिंग सुविधाओं और मनोरंजन स्थलों के कारण एक प्रमुख पर्यटन केंद्र है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है.
मतदाता व्यवहार और चुनावी समीकरणों में यह क्षेत्र एक तीन-तरफा मुकाबले की तस्वीर दिखाता है. ऐतिहासिक रूप से LDF को बढ़त रही है, और CPI(M) की सफलता के पीछे मजबूत जमीनी संगठन, लंबे समय से चला आ रहा वामपंथी समर्थन, और कृषि कल्याण, ग्रामीण विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, और सामाजिक सेवाओं जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता को बड़ा कारण माना जाता है. वहीं 2021 में BJP का अच्छा वोट शेयर यह दिखाता है कि मतदाता व्यवहार में बदलाव आ रहा है, खासकर शहरी और युवा मतदाताओं के बीच राष्ट्रीय दलों के लिए जगह बन रही है. दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF भी यहां अच्छा समर्थन बनाए रखता है, जो केरल में आम तौर पर देखने वाले बाइपोलर (दो-ध्रुवीय) मुकाबले की परंपरा को दर्शाता है.
स्थानीय मुद्दों और विकास की प्राथमिकताओं में यहां कृषि और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी नीतियां, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं, बुनियादी ढांचे का विकास, जल प्रबंधन, और पर्यटन से जुड़ा विकास प्रमुख रूप से शामिल हैं.
पर्यटन स्थलों की बात करें तो मालमपुझा क्षेत्र में मालमपुझा डैम और गार्डन, मालमपुझा रोपवे और स्नेक पार्क, यक्षी प्रतिमा, और फैंटेसी पार्क जैसे लोकप्रिय आकर्षण मौजूद हैं, जो इस सीट की पहचान और अर्थव्यवस्था में भी अहम भूमिका निभाते हैं.
(श्रेया प्रसाद)