थालास्सेरी केरल के कन्नूर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध विधानसभा क्षेत्र है. यह केरल विधानसभा की 140 सीटों में से सीट नंबर 13 है और लोकसभा चुनावों के लिए वडकारा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यह एक सामान्य (आरक्षित नहीं) सीट है, जिसका गठन वर्ष 1951 में हुआ था. थालास्सेरी अपनी ऊंची मतदान प्रतिशत, जागरूक मतदाताओं और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट
(UDF) तथा लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के बीच कड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए जाना जाता है.
थालास्सेरी उत्तर केरल के मालाबार तट पर स्थित है और अपनी समृद्ध संस्कृति तथा ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है. इस विधानसभा क्षेत्र में थालास्सेरी नगरपालिका के साथ-साथ चोकली, एरनहोली, कादीरूर, न्यू-माही और पन्नियन्नूर पंचायतें शामिल हैं. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के अनुसार यहां कुल 1,75,439 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें 93,966 महिलाएं और 81,473 पुरुष शामिल थे. इस चुनाव में 76.13 प्रतिशत मतदान हुआ, जो यहां के मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है.
राजनीतिक रूप से थलस्सेरी लंबे समय से वामपंथी राजनीति का मजबूत गढ़ माना जाता है. पिछले कई दशकों से यहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेताओं का प्रभाव रहा है. वर्ष 2016 और 2021 के चुनावों में एडवोकेट ए. एन. शमसीर ने CPI(M) के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की. उनसे पहले 2011 में CPI(M) के वरिष्ठ नेता कोडियेरी बालकृष्णन इस सीट से विधायक रहे थे.
2021 के विधानसभा चुनाव में एडवोकेट ए. एन. शमसीर को 81,810 वोट मिले, जो कुल मतदान का लगभग 61.52 प्रतिशत था. कांग्रेस उम्मीदवार एम. पी. अरविंदाक्षन को 45,009 वोट प्राप्त हुए. शमसीर ने करीब 36,801 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की और बाद में वे 15वीं केरल विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) बने.
थालास्सेरी आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है. यह जगह पारंपरिक हथकरघा उद्योग और मसाला व्यापार के साथ-साथ केरल में आधुनिक क्रिकेट की जन्मस्थली के रूप में भी जानी जाती है. यहां की अर्थव्यवस्था समुद्री तटीय आजीविका, ग्रामीण गतिविधियों और आधुनिक शहरी रोजगारों का मिश्रण है.
पर्यटन की दृष्टि से थालास्सेरी किला, जिसे 18वीं सदी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बनवाया था, और गुंडर्ट बंगला, जहाँ जर्मन विद्वान डॉ. हरमन गुंडर्ट रहे और पहली मलयालम डिक्शनरी तैयार की, प्रमुख आकर्षण हैं. इसके अलावा, यहां की लोक परंपरा थेय्यम और प्रसिद्ध थलस्सेरी बिरयानी पूरे केरल में खास पहचान रखती है.
विकास की दृष्टि से इस क्षेत्र के सामने शहरी बुनियादी ढांचे का विकास, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, पर्यावरण संरक्षण तथा किफायती आवास और बेहतर नागरिक सेवाएं प्रमुख प्राथमिकताएं बनी हुई हैं.
(Sreya Prasad)