केरल के उत्तरी हिस्से में स्थित वायनाड जिले में आने वाला कलपेट्टा विधानसभा क्षेत्र राज्य का निर्वाचन क्षेत्र संख्या 19 है और यह लोकसभा चुनावों के लिए वायनाड संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है. वर्तमान में इस लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी संसद में कर रही हैं. वर्ष 1965 में अस्तित्व में आया कलपेट्टा विधानसभा
क्षेत्र एक लंबा चुनावी इतिहास रखता है और समय-समय पर यहां अलग-अलग राजनीतिक दलों का प्रभाव रहा है. यह क्षेत्र सामान्य श्रेणी का है, यानी यहां किसी प्रकार का आरक्षण लागू नहीं है.
भौगोलिक और प्रशासनिक रूप से कलपेट्टा वायनाड के पहाड़ी इलाके में स्थित है, जो अपनी सुंदर वादियों, मसालों के बागानों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है. इस विधानसभा क्षेत्र में कलपेट्टा नगरपालिका के साथ-साथ व्यथिरी तालुक की कई पंचायतें शामिल हैं, जिनमें कानीअम्बेट्टा, कोट्टाथरा, मेप्पाडी, मुप्पैनाड, मुत्तिल, पदिन्हारेथारा, पोझुथाना, थारियोड, वेंगप्पल्ली और व्यथिरी शामिल हैं. ये सभी स्थानीय स्वशासन इकाइयां मिलकर इस क्षेत्र का प्रशासनिक ढांचा बनाती हैं.
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में कलपेट्टा में कुल लगभग 2,01,192 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें से करीब 75.65 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो एक अच्छा मतदान प्रतिशत माना जाता है. वायनाड की जनसंख्या विविध है, जिसमें स्थायी कृषि करने वाले लोग, मध्य और दक्षिण केरल से आए प्रवासी किसान तथा यहां की मूल जनजातीय आबादी शामिल है. इस विविधता के कारण यहां का मतदान व्यवहार भी कई सामाजिक और आर्थिक कारकों से प्रभावित होता है.
राजनीतिक दृष्टि से कलपेट्टा में समय के साथ सत्ता का संतुलन बदलता रहा है. पहले यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दबदबा रहा. वर्ष 2011 में समाजवादी जनता (डेमोक्रेटिक) पार्टी के एम. वी. श्रेयाम्स कुमार की जीत के साथ छोटे दलों की भूमिका भी उभरकर सामने आई. 2016 में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के उम्मीदवार सी. के. ससींद्रन ने जीत दर्ज कर क्षेत्र में वामपंथी प्रभाव को मजबूत किया. लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टी. सिद्दीक ने जीत हासिल कर कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को वापसी दिलाई.
2021 के चुनाव परिणामों की बात करें तो कांग्रेस उम्मीदवार अधिवक्ता टी. सिद्दीक को 70,252 वोट मिले, जो कुल मतों का लगभग 46.16 प्रतिशत था. उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी, लोकतानत्रिक जनता दल (एलजेडी) के एम. वी. श्रेयाम्स कुमार को 64,782 वोट मिले, जो लगभग 42.56 प्रतिशत थे. भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार टी. एम. सुबेश तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 14,113 वोट मिले, जो करीब 9.27 प्रतिशत थे. नोटा को 828 वोट मिले, जो लगभग 0.54 प्रतिशत रहे, जबकि शेष वोट निर्दलीय और छोटे दलों को गए. इस तरह टी. सिद्दीक ने करीब 5,470 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो 2016 के मुकाबले मतदाताओं के रुझान में बदलाव को दर्शाता है. वहीं भाजपा को कम वोट मिलने के बावजूद क्षेत्र की राजनीति में उसकी उपस्थिति बढ़ती हुई मानी गई.
सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से कलपेट्टा की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, बागान उद्योग और पर्यटन पर आधारित है. यहां कॉफी, चाय और खास तौर पर इलायची व काली मिर्च जैसे मसालों की खेती बड़े पैमाने पर होती है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका चलती है और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी योगदान मिलता है. पश्चिमी घाट की गोद में बसे इस क्षेत्र में पर्यटन भी एक बड़ा सहारा है. प्राकृतिक सौंदर्य, ट्रैकिंग मार्ग और वन्यजीवन के कारण कलपेट्टा एक लोकप्रिय हिल स्टेशन और पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है.
यह क्षेत्र सामाजिक रूप से भी विविध है, जहां अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की बड़ी आबादी निवास करती है. इन समुदायों की जरूरतें और समस्याएं यहां की राजनीति और विकास योजनाओं को काफी हद तक प्रभावित करती हैं.
कलपेट्टा और उसके आसपास कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं, जिनमें वायनाड वाइल्डलाइफ सेंचुरी, एडक्कल गुफाएं, पूकोड झील और चेम्ब्रा पीक प्रमुख हैं. ये स्थान न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं बल्कि क्षेत्र की पहचान भी बनाते हैं.
विकास की दृष्टि से इस विधानसभा क्षेत्र के सामने कई चुनौतियां हैं. बेहतर सड़कें और बुनियादी ढांचा, किसानों के लिए मजबूत सहायता व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, शिक्षा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, तथा मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव जैसी समस्याएं यहां की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं. इन मुद्दों का समाधान ही भविष्य में क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा तय करेगा.
(Sreya Prasad)