पय्यन्नूर विधानसभा क्षेत्र किसी भी राजनीतिक ढांचे में आसानी से ढल जाने वाला क्षेत्र नहीं है. यह उत्तरी मालाबार क्षेत्र के कन्नूर जिले में स्थित है और राष्ट्रीय संसदीय चुनावों के लिए कासरगोड लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. केरल विधानसभा की 140 सीटों में यह विधानसभा क्षेत्र संख्या 6 है. यह एक सामान्य श्रेणी की सीट है, जिसकी स्थापना वर्ष 1957
में हुई थी.
पय्यन्नूर विधानसभा क्षेत्र में कन्नूर जिले के कई ग्रामीण और शहरी इलाके शामिल हैं. इसमें पय्यन्नूर नगरपालिका के साथ-साथ चेरुपुझा, चेरुथाझम, एरमम-कुट्टूर, एझोम, कदन्नपल्ली-पनपुझा, कन्कोल-अलप्पडंबा, करिवेल्लूर-पेरलम, कुन्हिमंगलम, मडयी, पेरिंगोम-वायक्कारा और रमंथली जैसी ग्राम पंचायतें आती हैं.
भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार, 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में पय्यन्नूर क्षेत्र में कुल 1,83,223 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें लगभग 86,520 पुरुष, 96,701 महिलाएं और दो तृतीय लिंग के मतदाता शामिल थे. इस क्षेत्र में मतदान प्रतिशत परंपरागत रूप से काफी ऊंचा रहता है और अक्सर 80 प्रतिशत से अधिक होता है.
1930 में केरल के नमक सत्याग्रह आंदोलन का प्रमुख केंद्र पय्यन्नूर रहा है. कई दशकों से यह क्षेत्र वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF), विशेषकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] का मजबूत गढ़ माना जाता है.
2021 के विधानसभा चुनाव में CPI(M) के टी.आई. मधुसूदनन ने 93,695 मत (62.49%) प्राप्त कर जीत हासिल की. कांग्रेस के एम. प्रदीप कुमार को 43,915 मत (29.29%) मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे, जबकि भाजपा के के.के. श्रीधरन को 11,308 मत (7.55%) मिले. मधुसूदनन ने लगभग 49,780 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जिससे क्षेत्र में वाम मोर्चे की मजबूत पकड़ स्पष्ट होती है.
पय्यन्नूर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है. यहां थेय्यम, पूरक्कली और मरुथुकली जैसे लोकनृत्य और अनुष्ठानिक कलाएं व्यापक रूप से प्रचलित हैं. मंदिर, त्योहार और सामुदायिक आयोजन इस क्षेत्र की पहचान हैं.
प्रमुख पर्यटन स्थलों में कव्वयी बैकवाटर उत्तरी केरल की सबसे बड़ी और राज्य की तीसरी सबसे बड़ी बैकवाटर प्रणाली है. इसके अलावा, पय्यन्नूर का प्रसिद्ध “पवित्र मोथिरम” (गांठदार अंगूठी) हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष महत्व रखता है.
यहां प्रमुख चुनौतियों में सड़क, पुल और सार्वजनिक परिवहन जैसी आधारभूत संरचनाओं का विकास, रोजगार के अवसर बढ़ाकर पलायन को कम करना और बैकवाटर पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना शामिल है.
(Sreya Prasad)