अलाथूर विधानसभा क्षेत्र केरल के कोझिकोड जिले में स्थित है. यह कोझिकोड लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय संसद में अपना प्रतिनिधि भेजता है. केरल विधानसभा की कुल 140 सीटों में यह 26वां निर्वाचन क्षेत्र है.
अलाथूर विधानसभा क्षेत्र शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों को मिलाकर बना है और कोझिकोड जिले के उत्तरी हिस्से में स्थित है. इसमें
कोझिकोड तालुक के अंतर्गत चेलन्नूर, एलथूर, कक्कोडी, कक्कूर, कुरुवत्तूर, ननमंडा और थल्लकुलथूर पंचायतें शामिल हैं.
2021 के केरल विधानसभा चुनाव में अलाथूर क्षेत्र में कुल 2,04,036 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें से लगभग 1,63,366 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. इस प्रकार मतदान प्रतिशत करीब 80.7% रहा, जो केरल में हमेशा से रही ऊंची मतदान भागीदारी की परंपरा को दर्शाता है.
2008 में परिसीमन के बाद अलाथूर को एक अलग विधानसभा क्षेत्र के रूप में बनाया गया. तब से यह एक कड़ा राजनीतिक मुकाबले वाला क्षेत्र रहा है. वर्तमान में केरल सरकार में वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री ए. के. ससींद्रन इस क्षेत्र के विधायक हैं. वे नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता हैं और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के सहयोगी हैं. 2011, 2016 और 2021 के चुनावों में लगातार तीन बार जीत दर्ज कर उन्होंने इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. परिसीमन से पहले भी यहां वामपंथी और मध्यमार्गी दलों का प्रभाव रहा, लेकिन ससींद्रन के नेतृत्व में एनसीपी यहां प्रमुख ताकत बन गई.
2021 के चुनाव में एनसीपी के ए. के. ससींद्रन ने एलथूर सीट पर जीत हासिल की. उन्हें कुल 83,639 वोट मिले, जो लगभग 50.89% वोट शेयर था. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार सुल्फिकार मयूरी को हराया, जिन्हें 45,137 वोट (करीब 27.46%) मिले. भाजपा (एनडीए) के उम्मीदवार टी. पी. जयचंद्रन मास्टर तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 32,010 वोट (लगभग 19.48%) प्राप्त हुए. अन्य उम्मीदवारों में पी. के. राधाकृष्णन (निर्दलीय) को 580 वोट, ताहिर मोक्कंडी (डब्ल्यूपीओआई) को 2,000 वोट और नोटा को 984 वोट मिले. ससींद्रन ने कुल 38,502 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जिससे एलथूर में एलडीएफ की संगठनात्मक मजबूती और उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता साफ झलकती है.
2011, 2016 और 2021 - तीनों चुनावों में ए. के. ससींद्रन ने बढ़ते हुए वोट शेयर और बढ़ते अंतर से जीत हासिल की, जिससे एनसीपी का प्रभुत्व और मजबूत हुआ. 2021 में एक निर्दलीय उम्मीदवार को लगभग 27% वोट मिलना इस बात का संकेत है कि स्थानीय पहचान और गैर-दलीय छवि वाले उम्मीदवार भी यहां असर डाल सकते हैं. भाजपा ने भी धीरे-धीरे अपना वोट प्रतिशत बढ़ाया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. कुल मिलाकर, अलाथूर ऐसा क्षेत्र है जहां दलों की संगठन शक्ति, नेतृत्व की लोकप्रियता और बदलते मतदाता रुझान मिलकर चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं.
अलाथूर का सामाजिक-आर्थिक स्वरूप शहरी और अर्ध-शहरी जीवन का मिश्रण है. कोझिकोड शहर के उत्तरी किनारे पर बसे इलाकों में रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और आधारभूत ढांचे की जरूरतें भी बढ़ रही हैं. वहीं ननमंडा और थल्लकुलथूर जैसी ग्रामीण पंचायतों में मछली पकड़ना और कृषि आज भी लोगों की आजीविका के प्रमुख साधन हैं. कोझिकोड शहर के पास होने के कारण बड़ी संख्या में लोग परिवहन, शिक्षा, व्यापार और सेवा क्षेत्र से भी जुड़े हुए हैं.अलाथूर विधानसभा क्षेत्र में कई सुंदर समुद्र तट और पर्यटन स्थल हैं, जिनमें एलथूर बीच शोर, टेलीफोन एक्सचेंज बीच, नारिचल बीच और चेट्टीकुलम बीच प्रमुख हैं.
इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास और शहरी नियोजन, तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की आजीविका का संरक्षण, रोजगार और शिक्षा के अवसरों का विस्तार तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता प्रमुख मुद्दे हैं.
(Sreya Prasad)