तिरुर विधानसभा क्षेत्र केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित है और यह राज्य की सबसे पुरानी व राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण सीटों में गिनी जाती है. यह एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है और लोकसभा चुनावों के लिए यह पोन्नानी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. इस सीट का चुनावी इतिहास काफी लंबा रहा है, यहां मतदान प्रतिशत आमतौर पर अच्छा रहता है और मुकाबला
अक्सर कई पार्टियों के बीच कड़ा होता है.
स्थानीय प्रशासन और भौगोलिक स्थिति की बात करें तो तिरुर विधानसभा क्षेत्र तिरुर तालुक में आता है, जो अपने ऐतिहासिक बंदरगाह नगर तिरुर, समुद्र तट के पास होने और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है. खासकर मलयालम साहित्य में तिरुर का बड़ा नाम है. इस विधानसभा क्षेत्र में तिरुर नगरपालिका के साथ-साथ अथवनाड, कल्पकंचेरी, थल्लक्कड़, थिरुनावाया, वलवन्नूर और वेत्तोम पंचायतें शामिल हैं. तिरुर की सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान इसलिए अलग बनती है क्योंकि यहां ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्र भी मौजूद हैं.
मतदाता भागीदारी और वोटर प्रोफाइल की बात करें तो 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में तिरुर में 2,05,232 से अधिक पंजीकृत मतदाता थे और लगभग 74.45% मतदान हुआ था. ये आंकड़े बताते हैं कि यहां के लोग राजनीति में काफी सक्रिय हैं और कई चुनावों से लगातार लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेते आए हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि और इतिहास में तिरुर को लंबे समय तक यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का मजबूत गढ़ माना गया है. इस क्षेत्र के इतिहास में IUML (और उसकी पुरानी पहचान मुस्लिम लीग) के उम्मीदवार लंबे समय तक जीतते रहे हैं, जिससे यहां उनकी संगठनात्मक पकड़ और जनसमर्थन साफ दिखाई देता है. चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार के मोइदीनकुट्टी हाजी, ईटी मोहम्मद बशीर जैसे IUML नेताओं सहित कई नेता बार-बार इस सीट से चुने गए हैं. हालांकि कभी-कभी अलग नतीजे भी आए हैं. IUML के दबदबे वाले इतिहास के बीच 2006 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) [CPI(M)] ने यह सीट जीतकर एक उल्लेखनीय जीत दर्ज की थी. बाद में 2011 के विधानसभा चुनाव में सी मम्मुट्टी (IUML/UDF) ने वामपंथी उम्मीदवार को हराकर सीट वापस UDF के पक्ष में कर दी.
2021 के केरल विधानसभा चुनाव के परिणाम में IUML के कुरुक्कोली मोइदीन ने तिरुर सीट जीती और UDF की पकड़ को और मजबूत किया. कुरुक्कोली मोइदीन (IUML, UDF) को कुल वैध मतों में से 82,314 वोट मिले. उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी गफूर पी. लिलिस (CPI(M), LDF) को 75,100 वोट मिले. वहीं, अब्दुल सलाम (BJP, NDA) को 9,097 वोट मिले, जो SDPI के उम्मीदवार मुहम्मद अशरफ और कई निर्दलीय उम्मीदवारों से अधिक थे, जबकि SDPI और निर्दलीय उम्मीदवारों को अपेक्षाकृत कम वोट प्रतिशत प्राप्त हुआ.
मतदाता व्यवहार और चुनावी समीकरण देखें तो IUML/UDF का संगठन काफी मजबूत माना जाता है और वह स्थानीय सामाजिक-सांस्कृतिक प्राथमिकताओं के साथ जुड़ा हुआ है, इसलिए मतदाताओं में उनके प्रति एक तरह की स्थायी निष्ठा दिखाई देती है. इसके बावजूद लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF), खासकर CPI(M), यहां लगातार एक मजबूत चुनौती देता रहा है और उसे भी नियमित रूप से अच्छा वोट शेयर मिलता है. BJP और अन्य छोटे दल जैसे SDPI तथा निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव में हिस्सा लेते हैं, हालांकि उनका वोट शेयर आमतौर पर दो बड़े मोर्चों की तुलना में कम रहता है.
सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल के अनुसार तिरुर में शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण तीनों तरह की विशेषताएं मिलती हैं. यहां के घरों की आय और आर्थिक प्राथमिकताओं पर विदेश, खासकर खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस (विदेशी कमाई) का बड़ा प्रभाव है, और यही प्रभाव कई बार सामाजिक-राजनीतिक अपेक्षाओं को भी आकार देता है. यहां आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख स्रोत व्यापार, मछली पकड़ना, छोटे व्यवसाय, कृषि, खाड़ी देशों से आने वाला धन (रेमिटेंस) और सेवा क्षेत्र हैं.
मुख्य मुद्दों में सार्वजनिक परिवहन और बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) में सुधार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच, तथा पर्यावरण प्रबंधन और तटीय कटाव (कोस्टल इरोजन) को रोकने के उपाय शामिल हैं.
पर्यटन स्थलों की बात करें तो तिरुर और आसपास के क्षेत्र में थुंचन परंबू, पदिंजारेक्करा बीच, थिरुनावाया नवमुखुंद मंदिर, त्रिप्रांगोड शिव मंदिर और कूटायी बीच जैसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल मौजूद हैं.
(श्रेया प्रसाद)