ओट्टापलम विधानसभा क्षेत्र केरल विधानसभा की 140 सीटों में 52वीं सीट है. यह पलक्कड़ जिले में आता है और राष्ट्रीय स्तर पर यह पलक्कड़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. प्रशासनिक और भौगोलिक रूप से इस सीट में ओट्टापलम नगरपालिका के साथ-साथ ओट्टापलम तालुक की अंबलापारा, कडम्पाझीपुरम, करिम्पुझा, लक्किडी-पेरूर, पूक्कोट्टुकावु, श्रीकृष्णपुरम और थाचनट्टुकारा
पंचायतें शामिल हैं.
मतदाता भागीदारी की बात करें तो 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में ओट्टापलम में कुल 2,08,304 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें लगभग 1,00,429 पुरुष मतदाता और 1,07,871 महिला मतदाता शामिल थे, जबकि थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या बहुत कम थी. कुल 1,60,294 वैध वोट डाले गए और मतदान प्रतिशत 77.54% रहा. राजनीतिक रूप से ओट्टापलम लंबे समय से एक कड़ा मुकाबला वाला क्षेत्र रहा है, जहां यूडीएफ (UDF), मुख्य रूप से कांग्रेस (INC) और एलडीएफ (LDF), खासकर सीपीआई(एम) [CPI(M)], दोनों ने अलग-अलग समय पर जीत दर्ज की है. 2016 के विधानसभा चुनाव में एलडीएफ ने अच्छा प्रदर्शन किया था, जब सीपीआई(एम) के पी. उन्नी ने कांग्रेस की एडवोकेट शानिमोल उस्मान को 16,088 वोटों से हराया था.
2021 के विधानसभा चुनाव में भी एलडीएफ ने यह सीट अपने पास बनाए रखी. इस बार सीपीआई(एम) के एडवोकेट के. प्रेमकुमार ने जीत दर्ज की. चुनाव आयोग के आधिकारिक नतीजों के अनुसार, कांग्रेस (यूडीएफ) के डॉ. पी. सारिन को 59,707 वोट मिले, जो कुल वैध वोटों का लगभग 37.05% था, जबकि प्रेमकुमार को 74,859 वोट मिले, जो करीब 46.45% रहा. प्रेमकुमार ने 15,152 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जो कुल वैध वोटों का लगभग 9.43% बनता है. वहीं भाजपा (एनडीए) के उम्मीदवार पी. वेणुगोपाल को भी अच्छी संख्या में वोट मिले, जिससे यह संकेत मिला कि इस क्षेत्र में पार्टी की मौजूदगी धीरे-धीरे बढ़ रही है.
मतदाता व्यवहार और चुनावी रुझानों को देखें तो ओट्टापलम की पहचान दो बड़े गठबंधनों के बीच मजबूत प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक रूप से जागरूक मतदाताओं से होती है. पिछले कुछ दशकों में सीपीआई(एम) और उसके सहयोगियों ने यहां मजबूत संगठनात्मक पकड़ बनाए रखी है और कई बार चुनाव जीते हैं, खासकर उन चुनावी दौरों में जब राज्यभर में लेफ्ट फ्रंट का प्रदर्शन अच्छा रहा. दूसरी ओर यूडीएफ और कांग्रेस भी यहां लगातार मुकाबले में रही है और उसका वोट शेयर अक्सर गठबंधन स्तर की रणनीति, उम्मीदवारों की छवि और स्थानीय मुद्दों के आधार पर तय होता रहा है. कई चुनावों में जीत का अंतर इस बात पर निर्भर रहा है कि पार्टियाँ सामाजिक कल्याण योजनाओं और विकास कार्यों के मुद्दों पर मतदाताओं को कितना प्रभावी तरीके से जोड़ पाती हैं. हालांकि भाजपा यहाँ प्रमुख शक्ति नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उसे धीरे-धीरे बढ़ता समर्थन मिल रहा है, खासकर युवा वर्ग में. यह रुझान केरल की अन्य कई सेमी-अर्बन (अर्ध-शहरी) सीटों में भी देखने को मिला है.
सामाजिक-आर्थिक स्थिति की बात करें तो बदलते समय के बावजूद इस क्षेत्र के ग्रामीण हिस्सों में कृषि आज भी एक बड़ा आर्थिक आधार है. यहां धान, नारियल, केला और सब्जियों की खेती अभी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग व्यापार, सेवा क्षेत्र और शिक्षा से भी जुड़े हुए हैं. साथ ही, विदेश में काम करने वाले लोगों, खासकर खाड़ी देशों में काम करने वालों से आने वाली रेमिटेंस (विदेशी कमाई) का योगदान भी यहां उल्लेखनीय है.
इस क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों में जल प्रबंधन और किसानों को कृषि सहायता, रोजगार और शिक्षा, तथा बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) में सुधार जैसे विषय शामिल हैं. पर्यटन के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है, जहां वरिक्कास्सेरी मना, श्री चिनक्काथूर भगवती मंदिर, अनंगनमला इको-टूरिज्म, और किल्लीकुरुस्सिमंगलम जैसे प्रमुख दर्शनीय स्थल आते हैं.
(श्रेया प्रसाद)