मंजेरी (Manjeri) केरल के मलप्पुरम जिले की एक महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है. यह सीट मलप्पुरम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और केरल विधानसभा की 140 सीटों में 37वीं सीट मानी जाती है. यह क्षेत्र लंबे समय से यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) गठबंधन और खासतौर पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का मजबूत गढ़ रहा है. इसके पीछे यहां की जनसंख्या संरचना और
IUML की दशकों से चली आ रही मजबूत संगठनात्मक पकड़ को बड़ा कारण माना जाता है.
भौगोलिक रूप से मंजेरी विधानसभा क्षेत्र में एरानाड तालुक के अंतर्गत आने वाली मंजेरी नगरपालिका, पांडिक्काड पंचायत और त्रिक्कलंगोड पंचायत, तथा पेरिंथलमन्ना तालुक के अंतर्गत आने वाली एडप्पट्टा पंचायत और कीझट्टूर पंचायत शामिल हैं. मतदाता भागीदारी की बात करें तो आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में मंजेरी में लगभग 2,06,960 मतदाता पंजीकृत थे. यहां लगभग 75.95% मतदान हुआ, जो यह दर्शाता है कि इस सीट पर नागरिक भागीदारी काफी अच्छी रहती है. चुनाव के समय स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता और समुदाय के प्रभावशाली लोग मतदाताओं को सक्रिय रूप से मतदान के लिए प्रेरित करते हैं, और मंजेरी में वोटिंग पैटर्न आमतौर पर उम्र और लिंग दोनों स्तरों पर समान भागीदारी दिखाता है.
राजनीतिक इतिहास की बात करें तो मंजेरी ने 1957 से लेकर अब तक अधिकतर समय UDF, खासकर IUML का समर्थन किया है. ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार IUML ने इस सीट पर लगातार जीत दर्ज की है. राज्य में भले ही समय-समय पर वामपंथी दलों (Left) की पकड़ मजबूत हुई हो, लेकिन मंजेरी ने पिछले कई दशकों में UDF और IUML के साथ अपनी राजनीतिक स्थिरता बनाए रखी. इस सीट से अलग-अलग समय में IUML के कई नेता विधायक रहे हैं, जिनमें P. K. Abdu Rabb, M. Ummer और हाल के वर्षों में Adv. U. A. Latheef शामिल हैं. यह पैटर्न बताता है कि मंजेरी के मतदाता अक्सर अचानक बदलाव के बजाय स्थिर नेतृत्व, गठबंधन के प्रदर्शन और समुदाय-केंद्रित राजनीति को ज्यादा महत्व देते हैं.
2021 के विधानसभा चुनाव परिणाम के अनुसार, IUML के Adv. U. A. Latheef ने चुनाव जीतकर कुल 78,836 वोट हासिल किए, जो कि वैध वोटों का लगभग 50.22% था. उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी नासर देबोना (Naser Debona) थे, जो CPI (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया) से थे और LDF (Left Democratic Front) के उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे. उन्हें 64,263 वोट मिले, जो कुल वोटों का लगभग 40.93% था. इस चुनाव में NOTA को करीब 0.77% वोट मिले, जबकि BJP और एक स्वतंत्र उम्मीदवार को बाकी बचे वोट मिले. Adv. Latheef ने 14,573 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो कुल वैध मतों का लगभग 9.34% था. यह जीत मंजेरी में IUML की लगातार बनी हुई मजबूत पकड़ को फिर से साबित करती है.
मतदाता व्यवहार और चुनावी समीकरणों पर नजर डालें तो मंजेरी की जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय की संख्या काफी अधिक है, साथ ही यहां हिंदू और ईसाई समुदाय भी मौजूद हैं. इसी जनसांख्यिकीय संरचना का असर यहां की राजनीति पर साफ दिखाई देता है. IUML का आधार मजबूत होने के बावजूद, मतदाता कभी-कभी दूसरे विकल्पों को भी समर्थन देते हैं, खासकर जब उन्हें प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए. इसका उदाहरण LDF की प्रतिस्पर्धा है, जो कई बार CPI उम्मीदवारों के जरिए मजबूत वोट शेयर हासिल कर लेती है. वहीं, इस बहुदलीय राजनीतिक माहौल में BJP (NDA) भी चुनाव लड़ती रही है, लेकिन उसे यहां बहुत कम वोट मिलते हैं. फिर भी, यह वोट शेयर यह दर्शाता है कि BJP मंजेरी में एक छोटी लेकिन मौजूद राजनीतिक ताकत के रूप में दिखती है.
विकास और स्थानीय मुद्दों की बात करें तो मंजेरी में लोगों की प्रमुख मांगों में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास, सड़कों की गुणवत्ता में सुधार, बेहतर रोड कनेक्टिविटी, और सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का विस्तार शामिल है. इसके अलावा, लोगों की अपेक्षा है कि उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं और अच्छे शिक्षण संस्थान आसानी से उपलब्ध हों, ताकि क्षेत्र का सामाजिक और आर्थिक विकास तेज हो सके.
पर्यटन और धार्मिक स्थलों की बात करें तो मंजेरी में कुछ प्रमुख दर्शनीय स्थल भी हैं, जिनमें पय्यानाड अंगड़ी ओल्ड जुम्मा मस्जिद, मंजेरी श्री कृष्ण मंदिर, और सेंट मैरीज चर्च, मंजेरी शामिल हैं. ये स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और पहचान का भी हिस्सा माने जाते हैं.
(श्रेया प्रसाद)