तिरुवंबाडी विधानसभा सीट केरल के कोझिकोड जिले में स्थित है. यह संसदीय चुनावों के लिए वायनाड लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और केरल विधानसभा की 140 सीटों में से क्रमांक 32 है. यह एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है, जिसका गठन वर्ष 1977 में हुआ था. तब से लेकर अब तक इस सीट पर राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है और समय-समय
पर अलग-अलग दलों के प्रतिनिधि यहां से चुने जाते रहे हैं.
भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण इलाकों से बना है. इसमें कोझिकोड तालुक की करास्सेरी, कोडेंचेरी, कोडियाथूर, कूदारंजी, मुक्कम, पुथुप्पडी और तिरुवंबाडी पंचायतें शामिल हैं. यहां की सामाजिक-आर्थिक संरचना में बागान गांव, छोटे व्यापारिक केंद्र और ग्रामीण बस्तियां प्रमुख हैं. 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां कुल 1,80,570 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें 89,527 पुरुष, 91,039 महिलाएं और 4 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल थे. इससे क्षेत्र में लैंगिक संतुलन दिखाई देता है. मतदान प्रतिशत लगभग 79.2% रहा, जो केरल की परंपरागत उच्च मतदान प्रवृत्ति को दर्शाता है.
तिरुवंबाडी की चुनावी इतिहास उत्तरी केरल की राजनीति में आए बदलावों को दर्शाता है. 1977 में यहां से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सिरिएक जॉन चुने गए थे, जो आपातकाल के बाद कांग्रेस की मजबूत स्थिति को दिखाता है. 1990 और 2000 के दशक में यहां से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के कई विधायक चुने गए. मथाई चाको (CPI(M)), सी. मोइंकुट्टी (IUML) और अब्दुरहीमान हाजी (IUML) जैसे नेता यहां की राजनीति में प्रमुख रहे. 2006 के उपचुनाव और फिर 2016 में CPI(M) के जॉर्ज एम. थॉमस की जीत से यह क्षेत्र वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) का मजबूत गढ़ बना.
2021 के केरल विधानसभा चुनाव में भी यहां कड़ा मुकाबला हुआ. CPI(M) के लिंटो जोसेफ ने 67,867 वोट हासिल कर लगभग 47.46% मत प्राप्त किए और जीत दर्ज की. उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी IUML के सी. पी. चेरीया मुहम्मद को 63,224 वोट मिले, जो लगभग 44.21% थे. जीत का अंतर केवल 4,643 वोट यानी करीब 3.25% रहा, जिससे मुकाबले की कड़ाई साफ दिखती है. भाजपा उम्मीदवार बेबी अम्बट्टु को 7,794 वोट मिले, जो लगभग 5.45% थे.
मतदाता व्यवहार और राजनीतिक रुझानों को देखें तो 2016 और 2021 में LDF की जीत यह दर्शाती है कि ग्रामीण इलाकों और युवाओं के बीच उसकी संगठनात्मक पकड़ मजबूत है. वहीं UDF की लगातार मजबूत मौजूदगी यह दिखाती है कि कुछ समुदायों और वर्गों में उसका समर्थन बना हुआ है. भाजपा को अभी सीमित समर्थन मिला है, लेकिन उसका वोट प्रतिशत धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जो केरल के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बहुदलीय राजनीति के विस्तार का संकेत देता है.
सामाजिक-आर्थिक रूप से थिरुवंबाडी की पहचान ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बागान खेती और कोझिकोड शहर के नजदीक होने से जुड़ी है. यहां काली मिर्च, रबर और अन्य नकदी फसलों की खेती होती है और कृषि तथा उससे जुड़े कार्य स्थानीय लोगों की आय का मुख्य स्रोत हैं.
इस क्षेत्र की प्रमुख विकास आवश्यकताओं में सड़क संपर्क, सार्वजनिक परिवहन की बेहतर व्यवस्था, सिंचाई और कृषि सहायता, अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुविधाएं तथा बाढ़ और भूस्खलन से सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं.
पर्यटन की दृष्टि से भी तिरुवंबाडी महत्वपूर्ण है. यहां अरिप्पारा जलप्रपात, वायनाड टनल व्यू पॉइंट और तिरुवंबाडी का सेक्रेड हार्ट फोरेन चर्च प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देते हैं.
(Sreya Prasad)