उत्तर प्रदेश में अगले ही साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. राजनीतिक दलों पर चुनावी टिकटों की खरीद-फरोख्त के आरोपों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश देने से साफ इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस मामले में निर्वाचन आयोग का रुख करने की सलाह दी है. इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इसी मामले में जनहित याचिका खारिज की थी. कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर जांच की मांग उचित नहीं है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि उसे इस बात पर संदेह करने का कोई कारण नहीं दिखता कि चुनाव आयोग इन शिकायतों पर समाधान के लिए कदम नहीं उठाएगा.
'स्वराज वाहिनी एसोसिएशन' की ओर से यह याचिका दायर की गई थी. याचिका में सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ स्टिंग ऑपरेशनों का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश के कुछ गैर-मान्यता प्राप्त और क्षेत्रीय राजनीतिक दल कथित तौर पर पैसे लेकर चुनावी टिकट दे रहे थे. याचिका में इस पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की गई है.
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इस याचिका में चुनाव आयोग केंद्र सरकार के अलावा उत्तर प्रदेश की निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल (सोनेलाल) और जन जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) को भी पक्षकार बनाया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संज्ञान में लिया कि इससे पहले 7 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट भी इसी मामले में दाखिल जनहित याचिका को खारिज कर चुका है. हाई कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ सोशल मीडिया पर सामने आई रिपोर्टों या स्टिंग ऑपरेशन के आधार पर अदालत से सीधे जांच के आदेश की उम्मीद नहीं की जा सकती.