scorecardresearch
 
Advertisement

मां महागौरी चालीसा (Maa Mahagauri Chalisa)

मां महागौरी चालीसा

मां महागौरी चालीसा का पाठ करने से सुख, शांति और समृद्धि मिलने की धार्मिक मान्यता है. माना जाता है कि इससे घर-परिवार में सुख-सौभाग्य और धन-वैभव बढ़ता है. मां की आराधना से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होने और दांपत्य जीवन में सुख आने की भी मान्यता है. भक्त मां महागौरी को पापों का नाश करने वाली देवी मानते हैं.

मां महागौरी चालीसा
मां महागौरी चालीसा

॥ दोहा ॥

मन मंदिर मेरे आन बसो, आरम्भ करूं गुणगान,
गौरी माँ मातेश्वरी, दो चरणों का ध्यान।

पूजन विधी न जानती, पर श्रद्धा है आपर,
प्रणाम मेरा स्विकारिये, हे माँ प्राण आधार।

॥ चौपाई ॥

नमो नमो हे गौरी माता, आप हो मेरी भाग्य विधाता,
शरनागत न कभी घबराता, गौरी उमा शंकरी माता।

 

आपका प्रिय आदर पाता, जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,
महादेव गणपति संग आओ, मेरे सकल कलेश मिटाओ।

 

सार्थक हो जाए जग में जीना, सत्कर्मों से कभी हटु ना,
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो, सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।

 

हे माँ भाग्य रेखा जगा दो, मन भावन सुयोग मिला दो,
मन को भाए वो वर चाहुं, ससुराल पक्ष का स्नेहा मैं पायु।

 

परम आराध्या आप हो मेरी, फिर क्यूं वर में इतनी देरी,
हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो, थोड़े में बरकत भर दीजियो।

 

अपनी दया बनाए रखना, भक्ति भाव जगाये रखना,
गौरी माता अनसन रहना, कभी न खोयूं मन का चैना।

 

देव मुनि सब शीश नवाते, सुख सुविधा को वर में पाते,
श्रद्धा भाव जो ले कर आया, बिन मांगे भी सब कुछ पाया।

 

हर संकट से उसे उबारा, आगे बढ़ के दिया सहारा,
जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे, निराश मन में आस जगावे।

 

शिव भी आपका काहा ना टाले, दया दृष्टि हम पे डाले,
जो जन करता आपका ध्यान, जग में पाए मान सम्मान।

 

सच्चे मन जो सुमिरन करती, उसके सुहाग की रक्षा करती,
दया दृष्टि जब माँ डाले, भव सागर से पार उतारे।

 

जपे जो ओम नमः शिवाय, शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,
जिसपे आप दया दिखावे, दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।

 

सता गुन की हो दता आप, हर इक मन की ग्याता आप,
काटो हमरे सकल कलेशा, निरोग रहे परिवार हमेशा।

 

दुख संताप मिटा देना माँ, मेघ दया के बरसा देना माँ,
जबही आप मौज में आय, हठ जय माँ सब विपदाए।

 

जिसपे दयाल हो माता आप, उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,
फल-फूल मैं दुग्ध चढ़ाऊ, श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।

 

अवगुन मेरे ढ़क देना माँ, ममता आँचल कर देना माँ,
कठिन नहीं कुछ आपको माता, जग ठुकराया दया को पाता।

 

बिन पाऊ न गुन माँ तेरे, नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,
जितने आपके पावन धाम, सब धामो को माँ प्राणम।

 

आपकी दया का है ना पार, तभी को पूजे कुल संसार,
निर्मल मन जो शरण मे आता, मुक्ति की वो युक्ति पाता।

 

संतोष धन्न से दामन भर दो, असम्भव को माँ सम्भव कर दो,
आपकी दया के भारे, सुखी बसे मेरा परिवार।

 

अपकी महिमा अती निराली, भक्तो के दुःख हरने वाली,
मनोकामना पुरन करती, मन की दुविधा पल में हरती।

 

चालीसा जो भी पढ़े-सुनाया, सुयोग वर् वरदान  पाए,
आशा पूर्ण कर देना माँ, सुमंगल साखी वर देना माँ।

॥ दोहा ॥

गौरी माँ विनती करूँ, आना आपके द्वार,
ऐसी माँ कृपा किजिये, हो जाए उद्धहार।

हीं हीं हीं शरण में, दो चरणों का ध्यान,
ऐसी माँ कृपा कीजिये, पाऊँ मान सम्मान।

 

-----समाप्त-----

समाप्त

यह भी पढ़ें

Advertisement
Advertisement