जेन जी की बातचीत में सोशल मीडिया और इंटरनेट से आए कई ऐसे शब्द शामिल हो चुके हैं, जिन्हें मम्मी-पापा अक्सर नहीं समझ पाते. क्रिंज, स्ले, घोस्टिंग से लेकर डेलुलु तक, जानिए जेन जी की भाषा के आम शब्दों का आसान मतलब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरण.
चंडीगढ़ के 25 साल के जेन जी फाउंडर प्रथम जिंदल ने अपनी कंपनी के काम करने का तरीका साझा किया है. यहां एम्प्लॉय बॉस का मजाक उड़ा सकते हैं, छुट्टी के दिन काम करने पर दोगुनी सैलरी पा सकते हैं और परेशान करने वाले कस्टमर को भी कंपनी छोड़ सकती है. प्रथम के लिए एम्प्लॉयज की खुशी और रिसपेक्ट, बिजनेस से कम जरूरी नहीं है.
शॉपिंग मॉल से खत्म हुई भीड़ और रौनक को जेन जी अब वापस ला रहे है. ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते प्रचलन से जो भीड़ शॉपिंग मॉल से खत्म हो रही थी धीरे-धीरे जेन जी उसे वापस लौटा रही है. USA टुडे के एक रिपोर्ट के मुताबिक जेन जी के बीच मॉल जाने का क्रेज फिर बढ़ता दिख रहा है. इसकी वजह सिर्फ शॉपिंग नहीं, बल्कि मॉल को एक पूरे एक्सपीरियंस की तरह देखना है
जेन जी एक ऐसी जेनरेशन है जो हर वक्त कुछ न कुछ अपने सेल्फ इम्प्रूवमेंट के लिए करना चाहती है. फिर चाहे वो उसकी पर्सनल लाइफ हो या प्रोफेशनल या उसकी इच्छाएं हो वो लगातार कुछ न कुछ प्रोडक्टिव करने में व्यस्त रहती है. लेकिन यही आदत बहुत बार जेन जी ऊपर भार बनने लगती है और उसे दबाव महसूस करवाती है. जहां वो लगतार प्रोडक्टिव बन रहना चाहता है.
जेन जी को अक्सर सोशल स्किल्स में कमजोर और बातचीत में अजीब बताया जाता है. लेकिन सोशल मीडिया पर एक अलग राय सामने आई है. क्या जेन जी को लोगों से बात करने में दिक्कत है या फिर वो सिर्फ बनावटी बातचीत से बचती है? ऑफिस की फॉर्मैलिटी वाली बातचीत से लेकर छोटी-मोटी बातों तक, क्या जेन जी के लिए सोशल होने का तरीका बदल गया है?
जेन जी अपने मन की शांति के लिए हमेशा से बहुत ही सजग रही है. इसलिए जब भी उसे ऐसा लगता है कि वो मानसिक रूप और शारीरिक रूप से थक चुकी है वो अचानक से लोगों के बीच से गायब हो जाती है, लोगों से बात करना बंद कर देती है. और भीड़ का हिस्सा रह के कम से कम लोगों से बातचीत या संपर्क रखती है. ये है जेन जी अपनी सोशल बैटरी बचाने का जेन जी तरीका.
आज के टाइम में अमीर दिखने के लिए हर चीज का खुलकर दिखावा करना जरूरी नहीं है. जेन जी के बीच अब महंगी चीजों को ऐसे दिखाने का ट्रेंड बढ़ रहा है, जिसमें चीज की कीमत सीधे बताई नहीं जाती, बस उसकी छोटी सी झलक दिखाई जाती है. इसे ही 'सटल फ्लैक्स' कहा जा रहा है.
हर महीने ओटीटी, म्यूजिक और दूसरे ऐप्स की मेंबरशिप पर होने वाले छोटे-छोटो खर्च अब जेन जी को ज्यादा लगने लगा है. इसलिए कई लोग उन मेंबरशिप्स को बंद कर रहे हैं, जिनका वे कम इस्तेमाल करते हैं. इसे 'सब्सक्रिप्शन डिटॉक्स' कहा जा रहा है, यानी जरूरत की चीजों पर ही पैसा खर्च करना और बेकार की मेंबरशिप्स से छुटकारा पाना.
जेन जी के बदलते वर्क कल्चर में नौकरी और ऑफिस को देखने का नजरिया भी अलग दिखाई देता है. सोशल मीडिया पर वायरल एक मामले में जेन जी कर्मचारी ने ऑफिस टाइमिंग और ज्यादा घंटे काम करने को लेकर बॉस के सामने अपनी बात बेझिझक रखी. यह किस्सा बताता है कि युवा कर्मचारी अब काम के घंटे, कमाई, जिम्मेदारियों और निजी समय के बीच संतुलन को भी महत्व देते हैं.
कैप्सूल वॉर्डरोब फैशन का ऐसा तरीका है, जिसमें कम कपड़े रखकर उनसे कई अलग-अलग आउटफिट तैयार किए जाते हैं. जेन जी के बीच ये ट्रेंड इसलिए पसंद किया जा रहा है क्योंकि इससे हर नए लुक के लिए नए कपड़े खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. सही कपड़ों का चुनाव और मिक्स एंड मैच करके कम बजट में भी कई स्टाइल बनाए जा सकते हैं.
जेन जी ने कभी मिलेनियल्स की कई आदतों को पुराना और क्रिंज बताया था. लेकिन अब वही चीजें धीरे-धीरे जेन जी की जिंदगी का हिस्सा बन रही हैं. स्किनी जींस से लेकर पुराने फैशन, फैन कल्चर, ग्रुप चैट और इमोजी तक, कई ऐसी आदतें हैं जिन्हें जेन जी कभी पसंद नहीं करती थी, लेकिन अब अपने अंदाज में अपना रही है.
जेन जी के ऑफिस कल्चर के साथ काम की भाषा भी बदल रही है. क्वाइट क्विटिंग, बेयर मिनिमम मंडे, वर्क-लाइफ बैलेंस, बर्नआउट और माइक्रोमैनेजिंग जैसे शब्द अब रोजमर्रा की ऑफिस बातचीत का हिस्सा हैं. जानिए जेन जी की ऐसी 10 ऑफिस टर्म्स का मतलब, जो काम, तनाव, ग्रोथ और निजी जिंदगी को लेकर उसकी सोच को समझने में मदद करती हैं.
आज की जेन जी फैशन को लेकर काफी एक्सपेरीमेंट करती है और अलग-अलग दौर के ट्रेंड्स को अपने अंदाज में अपनाती है. बैगी जींस, वाई2के, 90s विंटेज, बोहो स्टाइल, छोटी कुर्ती, शॉर्ट स्कर्ट, क्रॉप टॉप, ओवरसाइज शर्ट और बंडाना जैसे फैशन स्टेपल्स उसके वॉर्डरोब का हिस्सा हैं. पुराने और नए ट्रेंड्स को मिलाकर जेन जी हर बार अपने लिए नया लुक तैयार करती है.
जेन जी का काम और नौकरी को देखने का तरीका बदल रहा है. टिश्यू पेपर पर इस्तीफा इसी बदलती सोच की एक दिलचस्प मिसाल है. युवा एम्प्लॉई अब सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि काम की जगह पर सम्मान, अच्छा माहौल, सही व्यवहार और पर्सनल लाइफ के लिए टाइम भी चाहते हैं. यही वजह है कि जेन जी वर्क प्लेस पर अपनी बात खुलकर रखने से पीछे नहीं हटती.
जेन जी के जीने का तरीका पिछली पीढ़ियों से काफी अलग है. फोन पर सामने होकर भी मैसेज करना, तुरंत जवाब न देना, पर्सनल टाइम को अहमियत देना, जॉब बदलना और हर पुराने नियम पर सवाल करना जैसी कई आदतें 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को अजीब लग सकती हैं. लेकिन टेक्नोॉजी और बदलती जिंदगी के बीच जेन जी के लिए ये आदतें सामान्य बन चुकी हैं.
जेन जी अपने माता-पिता और परिवार के साथ मजबूत रिश्ता रखती है, लेकिन इसके साथ ही वो अपने लिए निजी वक्त और स्पेस भी चाहती है. साथ रहना या परिवार के करीब होना उसके लिए अपनी आजादी और निजी सीमाओं को छोड़ देना नहीं है. आखिर परिवार से प्यार करते हुए भी अपने लिए अलग स्पेस चाहना जेन जी के लिए क्या मायने रखता है?
आज के डेटिंग कल्चर में किसी अनजान व्यक्ति का अचानक आकर बात शुरू करना जेन जी के लिए हमेशा सहज नहीं होता. बार और क्लब अब सिर्फ नए लोगों से मिलने की जगह नहीं हैं, वहीं डेटिंग ऐप्स भी हर किसी की समस्या का हल नहीं हैं. आखिर जेन जी डेटिंग में क्या बदल रहा है?
जेन जी के वर्कप्लेस में आने के साथ नौकरी और इंटरव्यू से जुड़े कई पुराने तौर-तरीके बदलते नजर आ रहे हैं. इंटरव्यू में आइस्ड कॉफी से लेकर ड्रेसिंग, इमोजी, घोस्टिंग और काम के समय को लेकर सीधे सवाल पूछने तक, नई पीढ़ी अपनी पसंद और सीमाओं को खुलकर सामने रख रही है. आखिर बदलते वर्क कल्चर की ये तस्वीर कितनी अलग है?
जेन जी के लिए नौकरी सिर्फ सैलरी कमाने का जरिया नहीं है. बदलती वर्क कल्चर के बीच यह पीढ़ी नौकरी में वर्क-लाइफ बैलेंस, सीखने और आगे बढ़ने के मौके, अच्छा माहौल, रिसपेक्ट और काम करने की आजादी भी चाहती है. आखिर जेन जी के लिए नौकरी चुनते वक्त सैलरी के अलावा और कौन-सी चीजें सबसे ज्यादा मायने रखती हैं?
जेन जी के आने के साथ ऑफिस में काम करने के तरीके और एम्प्लॉय से जुड़ी उम्मीदों को लेकर सोच बदल रही है. एक वायरल मामले में CEO ने एम्प्लॉय से कंपनी में आगे बढ़ने के लिए 'मालिक की तरह सोचने' को कहा. इसके जवाब ने ये सवाल खड़ा किया कि क्या कंपनी के CEO से मालिक जैसी जिम्मेदारी की उम्मीद के साथ उसे मालिक जैसी शेयर और फायदा भी मिलना चाहिए.
मैसेज सीन करके तुरंत रिप्लाई न करना आज की डिजिटल बातचीत का आम हिस्सा बन गया है. जेन जी के लिए ऑनलाइन होना और हर वक्त जवाब देने के लिए तैयार होना एक जैसी बात नहीं है. कभी बिजी होने, कभी सही वक्त का इंतजार करने और कभी सिर्फ अपनी डिजिटल स्पेस बनाए रखने की वजह से रिप्लाई में देरी हो सकती है. ऐसे में हर सीन को इग्नोर समझना जरूरी नहीं.