मोहन, उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की हसनगंज तहसील में स्थित एक नगर पंचायत है. ब्रिटिश काल के दौरान यह कस्बा कभी तहसील मुख्यालय के रूप में कार्य करता था, लेकिन वर्ष 1891 में तहसील मुख्यालय को हसनगंज स्थानांतरित कर दिया गया.
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद मोहन अपने वर्तमान स्वरूप में एक अलग विधानसभा क्षेत्र के रूप में अस्तित्व में आया. यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है और उन्नाव लोकसभा क्षेत्र के छह विधानसभा क्षेत्रों में शामिल है. इस विधानसभा क्षेत्र में मोहन, भौली और नवाबगंज क्षेत्र पंचायतें शामिल हैं. इसके अलावा औरास क्षेत्र पंचायत की निर्धारित ग्राम पंचायतें तथा नवाबगंज, मोहन, न्योतिनी और औरास नगर पंचायतें भी इसका हिस्सा हैं. परिसीमन के दौरान पहले के हसनगंज और औरास क्षेत्रों के कुछ हिस्सों को मिलाकर वर्तमान मोहन विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया, जिसके कारण इसका स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.
मोहन विधानसभा सीट के गठन के बाद से ही यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही है और यहां तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के राधे लाल रावत ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के मस्त राम को 9,169 मतों के अंतर से हराया था. वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने मस्त राम की जगह बृजेश कुमार रावत को उम्मीदवार बनाया. बृजेश कुमार रावत ने मौजूदा बसपा विधायक को 54,095 मतों के अंतर से हराकर सीट भाजपा के खाते में पहुंचाई. वर्ष 2022 में बृजेश कुमार रावत ने भाजपा के लिए सीट बरकरार रखी. उन्हें 113,291 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार डॉ. अंचल को 70,112 वोट प्राप्त हुए. इस चुनाव में जीत का अंतर 43,179 वोट रहा.
वर्ष 2009 के बाद हुए चार लोकसभा चुनावों में मोहन विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रदर्शन में बडा बदलाव देखने को मिला. वर्ष 2009 में भाजपा चौथे स्थान पर रही थी, जबकि कांग्रेस ने बसपा पर 44,035 वोटों की बढत हासिल की थी. वर्ष 2014 में भाजपा पहले स्थान पर पहुंच गई और बसपा पर 36,616 वोटों की बढत बनाई. वर्ष 2019 में समाजवादी पार्टी के मुकाबले भाजपा की बढत बढकर 72,021 वोट हो गई. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने मोहन विधानसभा क्षेत्र में बढत बरकरार रखी. इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी को 97,112 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार अन्नू टंडन को 86,023 वोट प्राप्त हुए. भाजपा ने इस विधानसभा क्षेत्र में 11,089 वोटों की बढत दर्ज की.
मोहन विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या समय के साथ लगातार बढी है. वर्ष 2012 में यहां 287,244 पंजीकृत मतदाता थे. वर्ष 2017 में यह संख्या बढकर 322,973 हो गई. वर्ष 2019 में मतदाताओं की संख्या 327,722 दर्ज की गई. वर्ष 2022 में यह संख्या बढकर 343,047 और वर्ष 2024 में 351,752 हो गई.
हालांकि, मतदाता भागीदारी में आमतौर पर गिरावट का रुख देखा गया है. वर्ष 2012 में मतदान प्रतिशत 64.35 प्रतिशत था, जो वर्ष 2017 में घटकर 62.74 प्रतिशत रह गया. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में यह और गिरकर 60.12 प्रतिशत हो गया. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत में मामूली सुधार हुआ और यह 61.84 प्रतिशत दर्ज किया गया. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत फिर घटकर 56.47 प्रतिशत रह गया.
मोहन हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी मतदाताओं में लगभग 38.97 प्रतिशत है. मुस्लिम मतदाताओं की अनुमानित हिस्सेदारी 9.80 प्रतिशत है. प्रमुख अनुसूचित जाति समुदायों में पासी, जाटव और चमार, कोरी, धोबी तथा वाल्मीकि शामिल हैं. अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक समूहों में ब्राह्मण, ठाकुर और राजपूत, लोध, यादव, कुर्मी, कुशवाहा, मौर्य, शाक्य और सैनी शामिल हैं. इसके अलावा अन्य पिछडा वर्ग और कारीगर समुदाय भी यहां मौजूद हैं. मोहन विधानसभा क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा ग्रामीण है. यहां की लगभग 91.30 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि केवल 8.70 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती है. अनुसूचित जातियों की 38.97 प्रतिशत हिस्सेदारी उन्नाव जिले में सबसे अधिक हिस्सेदारी वाले क्षेत्रों में शामिल है और आरक्षित विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक स्वरूप में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है.
यह विधानसभा क्षेत्र मध्य गंगा के मैदानी इलाके में स्थित है और इसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. गेहूं, धान, दलहन और तिलहन यहां की प्रमुख फसलों में शामिल हैं. पशुपालन और छोटे स्तर का व्यापार भी लोगों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत हैं. मोहन के मुख्य रूप से ग्रामीण स्वरूप के कारण कृषि, सिंचाई, ग्रामीण सडकें और बाजारों तक पहुंच स्थानीय स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहते हैं. लखनऊ के निकट होने के कारण इस क्षेत्र को राज्य की राजधानी के बडे शहरी बाजार और रोजगार के अवसरों तक पहुंच भी मिलती है. सडक मार्ग से लखनऊ की दिशा में बेहतर संपर्क का इसमें महत्वपूर्ण योगदान है.
मोहन सडक मार्ग से हसनगंज, नवाबगंज, औरास और अन्य आसपास के कस्बों से जुडा हुआ है. उन्नाव और लखनऊ व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के लिए प्रमुख बडे शहरी केंद्र हैं. निकटवर्ती क्षेत्रों के रेलवे स्टेशनों के माध्यम से रेल संपर्क उपलब्ध है. मोहन सडक मार्ग से उन्नाव से लगभग 36 किलोमीटर और लखनऊ से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. हसनगंज यहां से कम दूरी पर है. कानपुर की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है. अयोध्या लगभग 180 किलोमीटर, प्रयागराज करीब 220 किलोमीटर और वाराणसी लगभग 320 किलोमीटर दूर है. वास्तविक दूरी चुने गए मार्ग के अनुसार अलग हो सकती है.
आंकडों के अनुसार वर्ष 2014 से मोहन में हुए पांच प्रमुख चुनावों में भाजपा ने जीत या बढत दर्ज की है. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव तक भाजपा की बढत कई चुनावों में बडी रही, हालांकि इस चुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच अंतर घटकर 5.60 प्रतिशत अंक रह गया. कम हुआ यह अंतर विपक्ष के लिए कुछ राजनीतिक संभावना प्रदान करता है.
मोहन में समाजवादी पार्टी के सामने सामाजिक समीकरण से जुडी चुनौतियां हैं, क्योंकि मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है और भाजपा ने अनुसूचित जाति तथा गैर यादव अन्य पिछडा वर्ग समुदायों के बीच मजबूत आधार बनाया है. वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक सामाजिक आधार से बाहर समर्थन बढाने में कितनी सफल होती है और दलित तथा गैर यादव अन्य पिछडा वर्ग मतदाताओं के बीच कितनी पहुंच बना पाती है. मोहन में भाजपा लगातार मजबूत स्थिति में रही है और समाजवादी पार्टी को गंभीर चुनौती पेश करने के लिए वर्ष 2024 के अपने प्रदर्शन में बडा सुधार करना होगा.
(अजय झा)
Dr. Anchal
SP
Sewak Lal Rawat
BSP
Madhu Verma Alias Madhu Rawat
INC
Nota
NOTA
Nitu Kanaujiya
ASPKR
Sandeep Kumar
NEP
Achhey Lal
IND
Savita
ALHP
Shatrohan Lal Rawat
AAAP
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