मां महागौरी, मां दुर्गा का आठवां स्वरूप मानी जाती हैं और उन्हें शुद्धता, शांति व करुणा का प्रतीक कहा जाता है. नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर उनकी विशेष पूजा की जाती है. उनकी पूजा और आरती करने से यह शत्रुओं का नाश होता है. उनके आशीर्वाद से जातक को रोगों से मुक्ति दिलाकर जीवन में अन्न-धन की वृद्धि करती है.
जय महागौरी जगत की माया। जया उमा भवानी जय महामाया।।
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहां निवासा।।
चंद्रकली और ममता अंबे। जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्याता।।
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती 'सत' हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।
तभी मां ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।।
जय महागौरी जगत की माया। जया उमा भवानी जय महामाया।।
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