इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी और तीन बच्चों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रईस को करीब 23 साल बाद बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका. एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी की गवाही और मेडिकल साक्ष्यों में विरोधाभास पाए गए. अदालत ने न्याय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर भी गंभीर टिप्पणी की.
अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है. यह केस जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की कोर्ट में सूचीबद्ध है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो एक्ट मामले में कल (27 फरवरी) इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत पर सुनवाई होगी. स्वामी ने इन आरोपों को सत्ता का षड्यंत्र और पूरी तरह निराधार बताया है. उनके अनुसार, कथित पीड़ित बच्चे शिकायतकर्ता के पास ही रह रहे हैं, जिसके सबूत वे अदालत में पेश करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट की इस बात से सहमत नहीं था कि आरोपी का 14 साल की लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा खींचना और उसे पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश करना सिर्फ़ तैयारी थी, रेप की कोशिश नहीं थी. इलाहाबाद HC ने ये फैसला 17 मार्च 2025 को सुनाया था.
Supreme Court ने कहा—पायजामे का नाड़ा खींचना और ब्रेस्ट पकड़ना rape attempt है. Allahabad HC का विवादित फैसला रद्द, POCSO के तहत आरोप बहाल.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के जिलाधिकारी (DM) और एसएसपी (SSP) अनुराग आर्य के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने यह कदम एक निजी घर में सामूहिक नमाज पढ़ने से रोकने के मामले में उठाया है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की जाति जन्म से निर्धारित होती है और धर्म परिवर्तन या विवाह के बाद भी उसमें बदलाव नहीं होता. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी महिला का विवाह दूसरी जाति में हो जाता है, तब भी उसकी मूल जाति समाप्त नहीं मानी जा सकती. यह टिप्पणी एक आपराधिक अपील खारिज करते समय की गई.
पॉक्सो केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया. फैसलों की भाषा को संवेदनशील बनाने और जजों के स्पेशल ट्रेनिंग पर जोर दिया गया.
चर्चित एएसपी अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के संभल कोर्ट के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह राहत प्रदान की है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी में लापता लोगों की 'खतरनाक' संख्या पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (PIL) दर्ज की है. हलफनामे के अनुसार, दो साल में 1.08 लाख लोग लापता हुए, लेकिन पुलिस ने केवल 9,700 मामलों में कार्रवाई की. कोर्ट ने इस सुस्त रवैये पर नाराजगी जताते हुए विस्तृत जवाब मांगा है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 1982 के हत्या मामले में करीब 100 वर्षीय धामी राम को बरी किया है. लंबी अपील देरी, उम्र और सामाजिक परिणामों को राहत का आधार माना गया.
उत्तर प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक की नौकरी पाने वालों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा चाबुक चलाया है. कोर्ट ने न केवल नियुक्तियां रद्द करने बल्कि अब तक ली गई सैलरी की रिकवरी के भी आदेश दिए हैं. अब पूरे प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की व्यापक जांच होगी.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ों पर सख्त रुख अपनाया है और कहा है कि बिना जरूरत फायरिंग करना पूर्णतः अस्वीकार्य है. कोर्ट ने बताया कि अपराधी को सजा देना पुलिस का जिम्मा नहीं न्यायालय का है. सोशल मीडिया की वाहवाही और प्रमोशन के लिए फायरिंग करना खतरनाक है. सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस का पालन जरूरी है और नियम तोड़ने पर एसपी एवं एसएसपी जिम्मेदार होंगे. उच्च न्यायालय ने सरकार से पूछताछ की है कि क्या मुठभेड़ों पर कोई लिखित या मौखिक निर्देश दिए गए हैं. यह एक गंभीर सवाल है क्योंकि उत्तर प्रदेश से लगातार इस तरह की खबरें सामने आ रही हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ती पुलिस मुठभेड़ों, विशेष रूप से आरोपियों के पैरों में गोली मार कर उन्हें एनकाउंटर बताने की प्रवृत्ति पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है. न्यायाधीश अरुण कुमार देशवाल की सिंगल बेंच ने स्पष्ट कहा कि पुलिस कानून से ऊपर नहीं है और अपराधी को सजा देना न्यायपालिका का काम है, न कि पुलिस का. यह निर्णय पुलिस और न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करता है तथा कानून का पालन करने का संदेश देता है.
प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की कथित 'हाफ एनकाउंटर' नीति पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि बिना आवश्यकता फायरिंग अस्वीकार्य है. अदालत ने कहा कि सजा देना केवल न्यायालय का अधिकार है, पुलिस का नहीं. निर्देशों के उल्लंघन पर SP और SSP को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच टकराव गहराने के बाद उन्होंने बिना स्नान किए मेला छोड़ दिया. पुलिस कार्रवाई, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच यह मामला प्रशासनिक, धार्मिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है, जो अब न्यायिक स्तर तक पहुंच चुका है.
लखनऊ में एक पढ़ी-लिखी महिला ने अपने प्रेमी के साथ रहने के लिए पति को ही गोकशी के झूठे मामले में जेल भिजवा दिया. जब पुलिस उसे पकड़ने हाई कोर्ट पहुंची, तो वकीलों के हंगामे के बीच वह फरार हो गई. लापरवाही बरतने वाले तीन पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने महाभियोग प्रक्रिया के तहत गठित संसद की कमेटी को अपना जवाब सौंप दिया है. जस्टिस वर्मा ने अपना बचाव करते हुए पुलिस पर ही सवाल उठाए हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राजधानी में स्कूलों के बाहर लगने वाले भीषण यातायात जाम को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने छह प्रमुख स्कूलों के प्रिंसिपल को तलब कर उनसे इस समस्या के समाधान में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है.
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ चल रही महाभियोग की कार्यवाही पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की पेशी से राहत पाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया. अब उन्हें 12 जनवरी को लोकसभा स्पीकर की कमेटी के सामने पेश होना होगा.
जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की संसदीय कार्यवाही के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. कोर्ट इस अहम कानूनी सवाल को सुलझा रहा है कि संसद में प्रस्ताव लाना ज्यादा प्राथमिकता वाला काम है या सदन में उसे चर्चा के लिए स्वीकार करना. लोकसभा महासचिव ने इस मामले में हलफनामा दाखिल कर जस्टिस वर्मा की याचिका को गलत बताया है.