ब्लिंकिट, जेप्टो, फ्लिपकार्ट जैसे कई क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म अपने राइडर्स को अच्छी खासी कमाई का मौका देते हैं. डिलीवरी पार्टनर एक दिन में 1000 से 1500 की कमाई कर सकते हैं, लेकिन तमाम खर्चों के बाद उनकी जेब में कितना रुपया बचता है, इसका गणित आप यहां समझ सकते हैं.
कॉलेज से निकलकर नौकरी शुरू करने वाली Gen Z को लेकर कंपनियों की शिकायतें सामने आई हैं. एक सर्वे में बिजनेस लीडर्स ने काम में पहल की कमी, ऑफिस के तौर-तरीके, संवाद और काम का बोझ संभालने जैसी वजहों को नए कर्मचारियों की दिक्कतों से जोड़ा. वीडियो में जानें डिटेल्स.
जेन जी के नौकरी शुरू करते ही कंपनियों से टकराव की खबरें सामने आ रही हैं. फॉर्च्यून की रिपोर्ट के मुताबिक एक नामी वेबसाइट के सर्वे में 10 में से 6 कंपनियों ने माना कि उन्होंने कॉलेज से सीधे नौकरी पर रखे गए कुछ जेन जी कर्मचारियों को निकाल दिया. इसके पीछे क्या खास वजह होती हैं, मैनेजर्स या बॉस इसके बारे में क्या सोचते हैं, आइए जानें...
गिग वर्कर्स को अलग-अलग प्लेटफॉर्म के अनुसार हर हफ्ते या हर 15 दिन में पेमेंट मिलती है. एक ऑर्डर की पूरी कमाई में प्लेटफॉर्म का कमीशन, टैक्स वगैरह चीज़ें शामिल होती हैं और उसके बाद डिलीवरी पार्टनर के हाथ में कुछ आता है.
डिलीवरी पार्टनर या बाइक टैक्सी राइडर्स के कई ऐसे खर्च होते हैं, जो प्लेटफॉर्म शुरुआत में सामने नहीं रखते हैं. कई जगह खर्च खुद से भी करना पड़ता है, ऐसे में महीने में होने वाली नेट कमाई ग्रॉस कमाई से काफी अलग हो सकती है.
डिलीवरी पार्टनर की ज़िंदगी आसान भी नहीं है और ना ही बहुत ज्यादा बंपर कमाई है. कई यूट्यूब वीडियोज़ में और प्लेटफॉर्म्स पर दी गई जानकारी में रोज़ाना की कमाई और सामने आने वाले खर्च, मुश्किलों पर बात की गई है.
ई-कॉमर्स सेल्स और त्योहारी सीजन के चलते देश में नौकरियों की सुनामी आ गई है. अब तक 4 लाख से ज्यादा गिग नौकरियां पैदा हो चुकी हैं, जबकि अमेजन और फ्लिपकार्ट अकेले 1-1 लाख से ज्यादा सीजनल वेकेंसी दे रहे हैं. जानिए पार्ट-टाइम काम करके हर महीने 50,000 रुपये तक कमाने का तरीका और अप्लाई करने के डायरेक्ट ऑफिशियल लिंक्स.
ब्लिंकिट, जेप्टो, रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म किसी भी डिलीवरी पार्टनर को कमाई का भरपूर मौका देते हैं. हर रोज़ 8-10 घंटे बाइक टैक्सी चलाने के बाद आखिर कमाई कितनी होती है और कितना कमीशन कटता है, ये सवाल हर किसी के मन में रहता है. यहां समझने की कोशिश करते हैं...
डिलीवरी पार्टनर या राइडर का काम आसान नहीं है लेकिन यहां पर आपके पास एक बढ़िया ऑप्शन है. आप कितनी कमाई और कितनी देर काम करना चाहते हैं, ये आपके हाथ में है. कई डिलीवरी राइडर एक महीने में 50 हज़ार तक की कमाई कर रहे हैं, कमाई और कमीशन को लेकर क्या नियम हैं जानिए...
डिलीवरी पार्टनर या राइडर बनना मौजूदा वक्त में मेट्रो सिटीज़ में तुरंत और आसानी से कमाई का ज़रिया बन गया है. लेकिन पहली कमाई से पहले ही बहुत से प्रोसेस से होकर गुजरना पड़ता है, जैसे कि जॉइनिंग फीस से लेकर सिक्योरिटी डिपोज़िट तक. आप भी इनके बारे में जानिए…
कई डिलीवरी पार्टनर या राइडर्स के पास अपना वाहन नहीं होता है, ऐसे में वो किराये की स्कूटी से भी ये काम कर सकते हैं. कई शहरों में इस तरह की स्कूटी की सर्विस होती है, अक्सर क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ही अपनी तरफ से आपको किराये पर स्कूटी या बाइक दिलवाते हैं, जिसकी एक फीस लगती है.
स्विगी, जोमैटो से लेकर ब्लिंकिट और जेप्टो तक कई कंपनियां अपने डिलीवरी पार्टनर को टीशर्ट, बाइक और बैग से लेकर कई सामान देते हैं. लेकिन क्या हो अगर डिलीवरी पार्टनर से ये सामान ही खराब हो जाए या फिर टूट जाए. तब उसकी भरपाई के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं.
डिलीवरी ऐप्स हो या फिर बाइक टैक्सी, दोनों ही प्लेटफॉर्म आपको फुल टाइम और पार्ट टाइम रोज़गार देने का ऑप्शन देते हैं. अलग-अलग प्लेटफॉर्म ने अपने हिसाब से कुछ नियम तय किए हैं, जिनका पालन करना ज़रूरी हो जाता है.
मेट्रो सिटीज़ में बाइक टैक्सी का कल्चर अब आम हो गया है. बहुत से लोग हमारे आसपास ये काम कर रहे हैं, लेकिन अगर आप बिना नियम जानें पर्सनल स्कूटी या बाइक को इस तरह टैक्सी बना रहे हैं तो आप किसी कानूनी पचड़े में भी पड़ सकते हैं.
डिलीवरी पार्टनर और राइड ड्राइवर के अपने-अपने जोखिम हैं. लेकिन साथ ही अपने-अपने फायदे भी हैं. कई लोग दोनों काम भी कर रहे हैं, लेकिन आप अपनी सहूलियत, ज़रूरत के हिसाब से चीज़ों को तय कर सकते हैं. यहां समझिए कि दोनों में आपके लिए क्या ज्यादा आसान और फायदेमंद है.
मेट्रो शहर में कई लोग ऐसे हैं, जो क्विक कॉमर्स पर डिलीवरी पार्टनर बनते हैं ताकि थोड़ी कमाई हो सके. लेकिन हर किसी के पास अपना वाहन नहीं है. ऐसे में क्या वो लोग इन ऐप्स से नहीं जुड़ सकते हैं ये सवाल रहता है, इसका जवाब इस कहानी में जानिए.
कई लोग जो डिलीवरी पार्टनर की जॉब फुल टाइम या पार्ट टाइम करना चाहते हैं, उनके मन में एक सवाल आता है कि क्या इसके लिए कोई पैसा भी लगता है. तो जवाब ये है कि हर कंपनी और प्लेटफॉर्म के अपने अपने नियम हैं. अगर आप भी इनके बारे में जानना चाहते हैं तो ज़रूर पढ़िए...