मां कात्यायनी को शक्ति, विजय और प्रेम की देवी माना जाता है. उनकी आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होने और कार्यों में सफलता मिलने की धार्मिक मान्यता है. कात्यायनी चालीसा में देवी की महिमा, स्वरूप, पराक्रम और आशीर्वाद का वर्णन मिलता है. श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करने से मां की कृपा और मनोकामना पूर्ति की मान्यता है.
॥ दोहा ॥
जय कात्यायनी माँ,जय महिषासुर मारिणी।
सुर नर मुनि आराधित,जय मंगल करिणी॥
॥ चौपाई ॥
जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय महिषासुर घातिनी दानी।।
ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी ध्यावैं।
शक्ति शक्ति सब जगत बनावैं॥
रक्तदंतिका और अन्नपूर्णा।
माँ कात्यायनी हैं सम्पूर्णा॥
कात्यायन ऋषि मुनि के आश्रय।
कात्यायनी माँ सबके बासय॥
भय, संकट हरिणी तुही माता।
भक्तों के दुःख हरती आपा॥
जो कोई तेरी शरण में आवे।
मनवांछित फल वह नर पावे॥
ध्यान धार जो कोई नारी।
कात्यायनी पूर्ण सुखकारी।।
कुमारी पुजा जो नित ध्यावें।
अविवाहित जीवन न बितावे॥
हलर युग में मां तू सहाय।
जो भी भक्त करे मन लाय॥
कात्यानी मां तेरी महिमा।
सतयुमग त्रेता हो या द्वापर।।
सिंह सवारी माँभवानी।
जय-जय-जय अम्बे भवानी॥
-----समाप्त-----