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कात्यायनी माता की आरती (Katyayani Mata Aarti)

कात्यायनी माता की आरती

मां कात्यायनी को शक्ति का स्वरूप माना जाता है और वे अपने भक्तों को साहस, सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इस दिन उनकी आरती करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है. श्रद्धा और भक्ति के साथ मां कात्यायनी की आरती करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-शांति बनी रहती है.

कात्यायनी माता की आरती
कात्यायनी माता की आरती

जय कात्यायनी माँ, मैया जय कात्यायनी माँ ।
उपमा रहित भवानी, दूँ किसकी उपमा ॥ मैया जय कात्यायनि….

 

गिरजापति शिव का तप, असुर रम्भ कीन्हाँ ।
वर-फल जन्म रम्भ गृह, महिषासुर लीन्हाँ ॥ मैया जय कात्यायनी…

 

कर शशांक-शेखर तप, महिषासुर भारी ।
शासन कियो सुरन पर, बन अत्याचारी ॥ मैया जय कात्यायनी…

 

त्रिनयन ब्रह्म शचीपति, पहुँचे, अच्युत गृह ।
महिषासुर बध हेतू, सुर कीन्हौं आग्रह ॥ मैया जय कात्यायनी…

 

सुन पुकार देवन मुख, तेज हुआ मुखरित ।
जन्म लियो कात्यायनी, सुर-नर-मुनि के हित ॥ मैया जय कात्यायनी…

 

अश्विन कृष्ण-चौथ पर, प्रकटी भवभामिनि ।
पूजे ऋषि कात्यायन, नाम काऽऽत्यायिनी ॥ मैया जय कात्यायनी…

 

अश्विन शुक्ल-दशी को, महिषासुर मारा ।
नाम पड़ा रणचण्डी, मरणलोक न्यारा ॥ मैया जय कात्यायनी….

दूजे कल्प संहारा, रूप भद्रकाली ।
तीजे कल्प में दुर्गा, मारा बलशाली ॥ मैया जय कात्यायनी….

 

दीन्हौं पद पार्षद निज, जगतजननि माया ।
देवी सँग महिषासुर, रूप बहुत भाया ॥ मैया जय कात्यायनी….

 

उमा रमा ब्रह्माणी, सीता श्रीराधा ।
तुम सुर-मुनि मन-मोहनि, हरिये भव-बाधा ॥ मैया जय कात्यायनी…

 

------समाप्त------

समाप्त

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