मां कुष्मांडा की आरती एक पवित्र और भक्तिभाव से भरा भजन है, जो देवी कुष्मांडा को समर्पित है. नवरात्रि के चौथे दिन इनकी पूजा और आरती की जाती है. मान्यता है कि देवी कुष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की, इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति और जननी माना जाता है.
कुष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी माँ भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे । भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुंचती हो मां अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो माँ संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
-------समाप्त------