रॉयपुरम उत्तर चेन्नई का एक ऐतिहासिक तटीय और आंतरिक शहरी क्षेत्र है, जिसकी पहचान उसके समुद्री इतिहास, मेहनतकश आबादी और मजबूत सामुदायिक ढांचे से जुड़ी हुई है. यह विधानसभा क्षेत्र संख्या 17 है.
रॉयपुरम चेन्नई के सबसे पुराने इलाकों में से एक है, जहां मुख्य रूप से मछुआरा समुदाय, बंदरगाह और रेलवे से जुड़े कामगार, तथा अनौपचारिक व्यापार करने वाले लोग रहते हैं. यह क्षेत्र तटीय अर्थव्यवस्था और घनी आबादी वाले शहरी जीवन का मिश्रण है, जहां विरासत, रोजगार की सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं की कमी एक साथ देखने को मिलती है. अन्य आवासीय शहरी सीटों के विपरीत, रॉयपुरम की राजनीति का केंद्र आजीविका की सुरक्षा, मकान की स्थिरता, सरकारी कल्याण योजनाओं की पहुंच और बुनियादी ढांचे की मजबूती है, खासकर उन तटीय और निचले इलाकों में जो प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हैं.
सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से यहां की आबादी मुख्य रूप से श्रमिक वर्ग की है, जिसमें मछुआरे, बंदरगाह और रेलवे कर्मचारी, दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारी, प्रवासी और लंबे समय से बसे शहरी गरीब परिवार शामिल हैं. यहां मतदान व्यवहार पर समुदाय की पहचान, पेशागत नेटवर्क, सरकारी योजनाओं का लाभ और संकट के समय नेताओं की सक्रियता का गहरा असर होता है. मछुआरा संघ, ट्रेड यूनियन, धार्मिक समितियां और वार्ड स्तर के संगठन स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक रूप से रॉयपुरम में समुद्र तटीय इलाके, बंदरगाह से सटे क्षेत्र, रेलवे कॉरिडोर और बेहद घनी आबादी वाले रिहायशी मोहल्ले शामिल हैं. उत्तर और मध्य चेन्नई से रेल और बस संपर्क अच्छा है, लेकिन अंदरूनी सड़कों का संकरा होना, भारी मालवाहक ट्रैफिक, पुराना बुनियादी ढांचा और हर साल मानसून में जलभराव लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और आवागमन को मुश्किल बनाता है.
यहां की प्रमुख समस्याओं में समुद्र का कटाव, चक्रवात का खतरा, असुरक्षित आवास, लगातार जलभराव, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन की कमी, पीने के पानी की अनियमित आपूर्ति, बंदरगाह ट्रैफिक से होने वाला जाम, सरकारी अस्पतालों में भीड़ और प्रदूषण से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं.
मतदाताओं की सोच की बात करें तो मछुआरा समुदाय आजीविका की सुरक्षा और आपदा राहत को सबसे अहम मानता है. श्रमिक वर्ग के परिवार जलनिकासी, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान देते हैं. महिलाएं साफ-सफाई और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं. युवा कौशल प्रशिक्षण और वैकल्पिक रोजगार के अवसर चाहते हैं, जबकि बुजुर्ग पेंशन, इलाज और सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहते हैं. कुल मिलाकर, रॉयपुरम के मतदाता उन्हीं जनप्रतिनिधियों को पसंद करते हैं जो आम लोगों के बीच उपलब्ध रहते हैं, संकट के समय मैदान में नजर आते हैं और सरकारी सहायता व राहत दिलाने में प्रभावी साबित होते हैं.
Jayakumar.d
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IND
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Sathish.s
IND
Velu.g
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Kalidass.k.r
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Karthick.v
IND
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IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.