अंबत्तूर (क्रमांक 8) चेन्नई के उत्तर-पश्चिम में स्थित एक प्रमुख औद्योगिक-आवासीय विधानसभा क्षेत्र है. यह तमिलनाडु के सबसे पुराने औद्योगिक केंद्रों में से एक अंबत्तूर इंडस्ट्रियल एस्टेट के लिए जाना जाता है. यहां घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके हैं.
यह क्षेत्र चेन्नई की विनिर्माण और सेवा आधारित अर्थव्यवस्था की कामगार और मध्यम वर्गीय का रीढ़ माना जाता है. यहां स्थित अंबत्तूर झील और प्रसिद्ध मुरुगन मंदिर इस क्षेत्र को पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्व भी प्रदान करते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से अंबत्तूर का मतदाता वर्ग औद्योगिक मजदूरों, एमएसएमई कर्मचारियों, छोटे व्यापारियों, वेतनभोगी पेशेवरों और लंबे समय से बसे निवासियों से मिलकर बना है. यहां जातिगत मुद्दों की तुलना में आजीविका की सुरक्षा, सरकारी कल्याण योजनाओं तक पहुंच और बुनियादी नागरिक सुविधाएं अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. ट्रेड यूनियन, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और स्थानीय सामुदायिक नेता राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं. मतदाता एक ऐसे विधायक की अपेक्षा करते हैं जो जमीन से जुड़ा हो और आसानी से उपलब्ध रहे.
भौगोलिक दृष्टि से यह पूरी तरह शहरी क्षेत्र है, जहां उच्च घनत्व वाली आवासीय कॉलोनियां, औद्योगिक क्षेत्र और व्यावसायिक कॉरिडोर मौजूद हैं. उपनगरीय रेल, बस सेवाओं और मुख्य सड़कों के माध्यम से यह अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, हालांकि औद्योगिक इलाकों और रेलवे स्टेशन के आसपास यातायात जाम की समस्या बनी रहती है. मानसून के दौरान निचले इलाकों में जलभराव और जलनिकासी की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है.
विकास के संदर्भ में यहां की अर्थव्यवस्था विनिर्माण, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और रिटेल सेवाओं पर आधारित है. रोजगार के अवसर तो मजबूत हैं, लेकिन बढ़ती आबादी के दबाव के कारण पुराना बुनियादी ढांचा, ड्रेनेज सिस्टम और सार्वजनिक सुविधाएं चरमरा रही हैं.
मुख्य समस्याओं में मानसून के समय बाढ़ और खराब स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज, औद्योगिक क्षेत्रों और स्टेशन के पास ट्रैफिक जाम, अंदरूनी सड़कों की खराब हालत, कुछ इलाकों में पीने के पानी की कमी, ठोस कचरा प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था, प्रदूषण और औद्योगिक कचरे से जुड़ी चिंताएं तथा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता बोझ शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड यह है कि मजदूर वर्ग रोजगार सुरक्षा, परिवहन और सुरक्षा को प्राथमिकता देता है. आम निवासी जलभराव नियंत्रण, पानी की नियमित आपूर्ति और साफ-सफाई की मांग करते हैं, महिलाएं बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग, सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन चाहती हैं जबकि बुजुर्ग मतदाता स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और पैदल चलने योग्य सुरक्षित सड़कों को महत्व देते हैं.
V Alexander
ADMK
R Anbu Thenarasan
NTK
S Vaitheswaran
MNM
S Vedhachalam
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
K Bharathi
IND
R Radha
NCP
S Praveen
IND
S Veena
AMAK
Narmada Nandhakumar
IND
T Joseph Samuvel Santhakumar
IND
T Muniandi
IND
M S Arumugam
IND
C Raghul
IND
Bharadan
IND
A R Murugavel
IND
G Soma Sundaram
IND
A S Kesavan
IND
G Srinivasan
IND
N Ganesan
IND
P Dhanraj
IND
Ravi
IND
G Vijayakumar
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.