अलंदुर विधानसभा क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 28) तमिलनाडु के सबसे अधिक शहरीकृत और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में गिना जाता है. चेन्नई शहर के केंद्र के बेहद करीब स्थित यह क्षेत्र अपनी पुरानी प्रशासनिक विरासत और आधुनिक बुनियादी ढांचे से संचालित विकास का अनोखा मिश्रण प्रस्तुत करता ह. कभी मुख्य रूप से आवासीय और मजबूत नागरिक सहभागिता वाला इलाका रहा अलंदुर, आज सड़क विस्तार, आईटी कॉरिडोर और हवाई अड्डा आधारित विकास के चलते एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र बन चुका है.
ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व के लिहाज से भी अलंदुर की खास पहचान है. जब यह क्षेत्र सेंट थॉमस माउंट विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था, तब पूर्व मुख्यमंत्री एम. जी. रामचंद्रन (एमजीआर) ने 1967 और 1971 में यहां से चुनाव जीतकर तमिलनाडु की राजनीति में अपनी गहरी छाप छोड़ी थी.
भौगोलिक स्थिति और कनेक्टिविटी की बात करें तो आद्यार नदी इसकी उत्तरी सीमा बनाती है, जिससे यहां का भू-भाग समतल तटीय स्वरूप लिए हुए है. चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की मौजूदगी ने अलंदुर को एक प्रमुख परिवहन और व्यावसायिक केंद्र बना दिया है. शहर के सबसे बड़े मेट्रो जंक्शनों में से एक, अलंदुर मेट्रो इंटरचेंज स्टेशन, इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को और मजबूती देता है.
यह विधानसभा क्षेत्र सेंट थॉमस माउंट, नंगनल्लुर, आदम्बक्कम, मीनांबक्कम, गिंडी औद्योगिक क्षेत्र और पूर्व अलंदुर नगर पालिका के कुछ हिस्सों को समेटे हुए है. हर इलाका अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक भूमिका निभाता है. आईटी कॉरिडोर और औद्योगिक परिसरों के पास होने से सेवा क्षेत्र को लाभ मिलता है, जबकि स्थापित मध्यम वर्गीय बस्तियां नागरिक सहभागिता और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के साथ क्षेत्र को सामाजिक रूप से मजबूती प्रदान करती हैं.
अक्सर कहा जाता है कि यदि रिपन बिल्डिंग को “नगर निगम का पिता” कहा जाए, तो अलंदुर को उसकी “मां” कहा जा सकता है. मेट्रो विस्तार, हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण और बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के साथ आज अलंदुर चेन्नई की सबसे गतिशील और निरंतर विकसित होती विधानसभा क्षेत्रों में शामिल है.
यहां के प्रमुख आकर्षण स्थलों में सेंट थॉमस माउंट चर्च, नंगनल्लुर अंजनेय मंदिर, अलंदुर धर्मराजा मंदिर, चेन्नई के सबसे पुराने बाजारों में से एक अलंदुर मार्केट, रामापुरम में एमजीआर का निवास और नंदमबक्कम ट्रेड सेंटर शामिल हैं.
हालांकि विकास के साथ कुछ स्थानीय मुद्दे भी सामने हैं, जिनमें नंगनल्लुर में फ्लाईओवर की मांग, मानसून के दौरान जलभराव की समस्या, संपत्ति कर में कमी की मांग और अंदरूनी इलाकों के लिए बेहतर स्मॉल-बस कनेक्टिविटी की जरूरत प्रमुख हैं.
मतदाता प्रकृति की दृष्टि से यह क्षेत्र शहरी, शिक्षित और मध्यम वर्गीय आबादी वाला है, जहां विचारधारा से अधिक कामकाज और प्रदर्शन को महत्व दिया जाता हैु सेंट थॉमस माउंट क्षेत्र में एमजीआर की विरासत आज भी भावनात्मक रूप से मजबूत बनी हुई है.
आने वाले चुनावों में मुख्य फोकस बिंदुओं में एकीकृत परिवहन योजना (मेट्रो, एमआरटीएस और स्मॉल बसें), संपत्ति कर का युक्तिकरण, बाढ़ नियंत्रण और जलनिकासी व्यवस्था, हवाई अड्डे से होने वाले शोर पर नियंत्रण, बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग और सीसीटीवी के जरिए सुरक्षा, साथ ही बाजारों, पार्कों और स्वास्थ्य सुविधाओं का उन्नयन शामिल रहेगा.
B.valarmathi
ADMK
Sarathbabu
MNM
Dr.r.karthikeyan
NTK
Nota
NOTA
M Mohammed Thameem Ansari
SDPI
G Kamalakannan
TNLK
N.raja
DMSK
A.abrahamlincon
IND
M.valarmathi
IND
Ali Mohamed
IND
E.anbarasu
IND
Subashree
AMAK
P.sathiyaraj
IND
S.sridhar
IND
Nithyanandham S
IND
M Anbarasu
IND
S.anbarasu
IND
M.ashok Kumar
IND
Dr.r.suresh
BMFP
Rajesh Chinnadurai
NDPOSI
S.v.saravanan
IND
J.vincent
RPPRINAT
C Saravanan
IND
K Saravanan
IND
B Raji
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.