मदुरावॉयल विधानसभा क्षेत्र (Constituency No. 7) चेन्नई महानगर के पश्चिमी हिस्से में स्थित एक तेजी से विकसित होता हुआ शहरी क्षेत्र है. यह इलाका लगातार शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है, जहां रिहायशी कॉलोनियां, अपार्टमेंट, कमर्शियल जोन और महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर मौजूद हैं. मदुरावॉयल को खास रणनीतिक महत्व इसलिए मिला है क्योंकि यह चेन्नई शहर का एक मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है और यहां से पश्चिमी तमिलनाडु की ओर जाने वाले हाईवे अच्छी तरह जुड़े हुए हैं.
यहां के मतदाताओं में मिडिल क्लास परिवार, आईटी प्रोफेशनल्स, छोटे व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और तेजी से बढ़ती प्रवासी आबादी शामिल है.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र मुख्यतः शहरी मध्यवर्ग और कामकाजी लोगों का क्षेत्र है. यहां की सामाजिक संरचना में मुदलियार, नायडू, अनुसूचित जाति (SC) और विभिन्न प्रवासी समुदाय शामिल हैं. इस क्षेत्र में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और नागरिक समूह राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं और चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं. यहां के चुनावी मुद्दे मुख्य रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर, बेहतर प्रशासन और शहरी विकास के आसपास केंद्रित रहते हैं.
भौगोलिक और कनेक्टिविटी के नजरिए से मदुरावॉयल एक महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है, क्योंकि यह चेन्नई बायपास रोड सहित कई बड़े हाईवे के जंक्शन पर स्थित है. यह क्षेत्र चेन्नई को बेंगलुरु और पश्चिमी जिलों से जोड़ने वाला गेटवे भी है. सड़क नेटवर्क के माध्यम से यह सेंट्रल चेन्नई और उपनगरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, और यह कोयंबेडु जैसे औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों के काफी करीब है. यहां का शहरी परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जहां नई हाउसिंग सोसाइटी, अपार्टमेंट और बढ़ते हुए व्यापारिक प्रतिष्ठान दिखाई देते हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख इलाकों में मदुरावॉयल जंक्शन (मुख्य ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट हब), रिहायशी कॉलोनियां और अपार्टमेंट, कमर्शियल जोन और छोटे व्यापारिक क्षेत्र, हाईवे के किनारे लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी गतिविधियां, तथा कोयंबेडु और पोरूर से जुड़े इलाके शामिल हैं.
स्थानीय समस्याओं की बात करें तो यहां के लोगों के सामने ट्रैफिक जाम और सड़क व्यवस्था, बरसात में पानी निकासी (स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज) और बाढ़ से बचाव, पीने के पानी की आपूर्ति और सीवेज प्रबंधन, कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई, तथा हाउसिंग और शहरी प्लानिंग से जुड़े नियम जैसी प्रमुख चुनौतियां हैं.
मतदाताओं के रुझान को देखें तो यहां के मिडिल क्लास मतदाता बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हैं. रोजाना यात्रा करने वाले लोग ट्रैफिक और सड़क की स्थिति पर ध्यान देते हैं, जबकि स्थानीय निवासी पानी, ड्रेनेज और नागरिक सेवाओं को ज्यादा महत्व देते हैं. वहीं युवा और प्रोफेशनल्स बेहतर शहरी सुविधाएं और कनेक्टिविटी चाहते हैं. कुल मिलाकर, यहां की वोटिंग पैटर्न मुख्य रूप से सरकार के कामकाज और प्रदर्शन (गवर्नेंस परफॉर्मेंस) के आधार पर तय होती है.
Benjamin.p
ADMK
Padma Priya.s
MNM
Ganeshkumar.g
NTK
Lucky Murugan.e
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Shanmugam.k
TNLK
Santhakumar.y
BSP
Priya.k
IND
Lavanya.p
NCP
Selvakumar.v
IND
Murugan.d
IND
Benjamin Moses.s
IND
Abarajithan.r
IND
Nevis Stella Mary.b
AMAK
Ganapathy.r
IND
Arunkumar.a
IND
Muthuraman.s
AMGRDMK
Amalraj.s
IND
Sumithra.r
BHUDRP
Ravi.c.v
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.