TVK
DMK
AMMKMNKZ
NTK
नोटा
NOTA
BSP
IND
IND
IND
NIP
MGRMK
IND
IND
IND
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IND
Saidapet Vidhan Sabha Chunav Result: सैदापेट सीट पर Arul Prakasam ने लहराया जीत का परचम
Saidapet Vidhan Sabha Results Live: तमिलनाडु के सैदापेट विधानसभा क्षेत्र में TVK का दबदबा, DMK को हराया
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सैदापेट (विधानसभा क्षेत्र संख्या 23) चेन्नई का एक बेहद संवेदनशील और विविध सामाजिक-राजनीतिक इलाका है. यह क्षेत्र अड्यार नदी के किनारे बसा है, जहां घनी रिहायशी बस्तियां, व्यस्त बाजार, झुग्गी-पुनर्वास क्षेत्र और प्रमुख यातायात मार्ग मौजूद हैं. सैदापेट चेन्नई की शहरी समस्याओं- जैसे बुनियादी ढांचे पर दबाव, सरकारी योजनाओं पर निर्भरता और रोजमर्रा के प्रशासन को साफ तौर पर दिखाता है. यहां की राजनीति मुख्य रूप से कल्याणकारी योजनाओं, बाढ़ से सुरक्षा, आवास की स्थिरता और सबको साथ लेकर होने वाले विकास के इर्द-गिर्द घूमती है.
इतिहास की बात करें तो 1967 और 1971 में डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि ने इसी क्षेत्र से चुनाव लड़ा और बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी.
सैदापेट की सामाजिक और राजनीतिक बनावट काफी मिश्रित है. यहां झुग्गियों में रहने वाले लोग, मजदूर, मध्यम वर्गीय परिवार, व्यापारी और सरकारी कर्मचारी सभी शामिल हैं. जाति से ज्यादा यहां वर्ग और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच अहम मुद्दा रहती है. स्थानीय स्तर पर मजबूत संगठन, विधायक की मौजूदगी और बाढ़ या विस्थापन जैसी परिस्थितियों में त्वरित मदद से लोगों का भरोसा बनता है.
भौगोलिक रूप से सैदापेट अड्यार नदी के किनारे स्थित है और गिंडी, टी. नगर, वेलाचेरी और अड्यार जैसे इलाकों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. सड़क और रेलवे संपर्क इसे अहम बनाते हैं, लेकिन नदी के पास होने से बाढ़ का खतरा भी बना रहता है. संकरी गलियां, अतिक्रमण और भारी यातायात जाम व जल निकासी की समस्याएं बढ़ाते हैं.
यहां के प्रमुख क्षेत्र अड्यार नदी तट, सैदापेट बाजार, रेलवे स्टेशन के आसपास का इलाका, बड़े चौराहे, आवास बोर्ड व झुग्गी-पुनर्वास कॉलोनियाँ तथा सरकारी दफ्तर और स्कूलों के आसपास के इलाके हैं.
मुख्य समस्याओं में बाढ़ और जल निकासी का दबाव, आवास की असुरक्षा, पीने के पानी की उपलब्धता, ट्रैफिक जाम, कचरा प्रबंधन, अतिक्रमण और स्वच्छता से जुड़ी स्वास्थ्य चिंताएं शामिल हैं.
मतदाताओं की सोच भी अलग-अलग वर्गों में बंटी हुई है. कम आय वाले लोग आवास, सरकारी सहायता और बाढ़ से सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं. मध्यम वर्ग सड़कों, जल निकासी और साफ-सफाई पर ध्यान देता है. व्यापारी बाजार व्यवस्था चाहते हैं. महिलाएं पानी और स्वास्थ्य सेवाओं को अहम मानती हैं. युवा शिक्षा और रोजगार की उम्मीद रखते हैं, जबकि बुज़ुर्ग पेंशन, इलाज और पैदल चलने योग्य सड़कों को जरूरी मानते हैं. किसी भी संकट के समय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया मतदाताओं की राय को गहराई से प्रभावित करती है.
Saidai Duraisamy
ADMK
Snegapriya
MNM
Suresh Kumar. B
NTK
Senthamizhan. G
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Kottur Kumar. R
BSP
Sagayamary. N
RPPRINAT
Sivasankar. S. R
IND
Balaji. V
IND
Kandhasamy. R
IND
Murthi. R
IND
Sathish Kumar. S
IND
Saravanan. D
IND
Sivagnanasambandan. T
DMSK
Jothi Sairam. S
IND
Kothandapani. K
IND
Imran Khan. M
IND
Manimaran. S
IND
Prem Kumar. A
IND
Ashok Kumar. V
IND
Vijaya Kumar. R
IND
Loganathan. J
IND
Venkatesh. K
IND
Rishi Kumar. A
IND
Arun Kumar. M
IND
Vasanth. H
IND
Rajesh. N
IND
Elango. K
IND
Prakash. C
IND
Alaganathan. B
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
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तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.