डॉ. राधाकृष्णन नगर (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 11), जिसे आमतौर पर आर.के. नगर कहा जाता है, चेन्नई के उत्तरी हिस्से का एक घनी आबादी वाला तटीय विधानसभा क्षेत्र है. यहां मछुआरों की बस्तियां, बंदरगाह से जुड़े मजदूरों की कॉलोनियां, झुग्गी-झोपड़ी और अनौपचारिक आवासीय इलाके हैं. इस क्षेत्र की बड़ी आबादी सरकारी कल्याण योजनाओं और राशन, पेंशन, नकद सहायता जैसी सुविधाओं पर काफी निर्भर है.
राजनीतिक रूप से यह सीट तब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई जब पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता 2015-16 में यहां से विधायक चुनी गईं. उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में टीटीवी दिनाकरन निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते थे, लेकिन उस चुनाव में वोट के बदले पैसे बांटने के आरोप लगे, जिसके कारण चुनाव आयोग को पहले तय तारीख का चुनाव रद्द करना पड़ा. इसी वजह से आर.के. नगर को एक हाई-प्रोफाइल और कड़ी निगरानी वाली सीट माना जाने लगा. टीटीवी दिनाकरन अब एनडीए गठबंधन में हैं.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र मुख्य रूप से मेहनतकश और कामकाजी वर्ग का है, जिसमें पारंपरिक मछुआरा समुदाय, बंदरगाह और गोदी में काम करने वाले मजदूर, लॉजिस्टिक्स से जुड़े श्रमिक, रेहड़ी-पटरी वाले, छोटे व्यापारी और घनी बस्तियों में रहने वाले शहरी गरीब शामिल हैं. यहां जाति और पेशे की पहचान का असर तो रहता है, लेकिन वोट डालते समय सबसे अहम भूमिका राशन की उपलब्धता, सरकारी सहायता और संकट के समय नेताओं की मदद करने की क्षमता निभाती है.
भौगोलिक रूप से यह इलाका संकरी गलियों, तटीय सड़कों, बंदरगाह के पास के औद्योगिक क्षेत्रों और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले रिहायशी इलाकों से भरा हुआ है. उत्तर और मध्य चेन्नई के लिए बस सेवाएं अच्छी हैं, लेकिन अंदरूनी सड़कों की हालत खराब है और आपातकालीन सेवाओं की पहुंच में भी दिक्कत आती है. तटीय इलाकों में रहने वाले लोग मछली पकड़ने के अधिकार, घरों की सुरक्षा और समुद्री कटाव से बचाव को लेकर खास तौर पर चिंतित रहते हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख इलाके या हॉटस्पॉट में तटीय मछुआरा बस्तियां, बंदरगाह से जुड़ी मजदूर कॉलोनियां, घनी आबादी वाली रिहायशी गलियां, बाजार और व्यापारिक क्षेत्र तथा बस रूट के किनारे बसे इलाके शामिल हैं.
यहां की मुख्य समस्याओं में समुद्र के कटाव से घरों को खतरा, बार-बार जलभराव और खराब स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज, गंदगी और कचरे का ढेर, पीने के पानी की अनियमित सप्लाई, सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भीड़, संकरी गलियों में आग और आपदा से सुरक्षा की कमी तथा खुले मैदानों और पार्कों का अभाव शामिल है.
मतदाताओं की सोच की बात करें तो मछुआरे अपने रोजगार की सुरक्षा और आवास की रक्षा को सबसे ऊपर रखते हैं. शहरी गरीब परिवार राशन, पेंशन और नकद सहायता जैसी योजनाओं को बहुत महत्व देते हैं. महिलाएं साफ-सफाई, पानी की उपलब्धता और सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देती हैं. युवा वर्ग कौशल प्रशिक्षण और स्थायी नौकरी के अवसर चाहता है. बुजुर्गों के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और समय पर मिलने वाली सरकारी मदद सबसे जरूरी है. कुल मिलाकर, आर.के. नगर के मतदाता अपने विधायक की मौजूदगी, उनकी जनता के बीच सक्रियता, समस्याओं पर तुरंत प्रतिक्रिया और रोजमर्रा की शिकायतों को सुलझाने की क्षमता पर करीबी नजर रखते हैं.
Raajesh.r.s.
ADMK
Gowrishankar . K
NTK
Fazil . A
MNM
Dr. Kalidas . P
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Santhakumar . A
IND
Vijayan.p
BSP
Sasidaran.s
IND
Daniel Sachin Mani.e
IND
Sivakumar.s
SUCI
Babu Mailan . A
RPPRINAT
Kandeepan.g
IND
Ramadass . E
MANAK
Gunasekaran.g
IND
Premkumar.p
IND
Mohan . R
USIP
Kalidass
IND
Sridhar . C
IND
Devakumar.r
IND
Devaraj.m
IND
Rajesh . I
IND
Franklin.d
IND
Purushothaman . K
IND
Boothirajan.g
IND
Marimuthu.p
IND
Rajesh . S
IND
Venkatraman . C
IND
Venugopal.d
SHS
Vivek.c
IND
Ethiraj.r
IND
Madhan Raj . D
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.