तिरुत्तनी विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 3) तमिलनाडु के उत्तरी हिस्से में, आंध्र प्रदेश की सीमा से सटा एक अर्ध-ग्रामीण (सेमी-रूरल) और मंदिर-केंद्रित क्षेत्र है. यह क्षेत्र प्रसिद्ध तिरुत्तनी मुरुगन मंदिर के कारण जाना जाता है, जो भगवान मुरुगन के अरुपडै वीडु (छह पवित्र धामों) में से एक है. इस मंदिर की वजह से तिरुत्तनी की पहचान, अर्थव्यवस्था और राजनीति पर तीर्थयात्रा का गहरा असर है. इसके अलावा, यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं भारत के पहले उपराष्ट्रपति और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था.
तिरुत्तनी विधानसभा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से धार्मिक पर्यटन, वर्षा पर निर्भर खेती (ड्राईलैंड एग्रीकल्चर) और छोटे कस्बों के व्यापार पर आधारित है. यहां की राजनीति और जनचर्चा का केंद्र मंदिर प्रबंधन, पानी की उपलब्धता, बुनियादी सुविधाएं और सरकारी कल्याण योजनाओं का सही क्रियान्वयन रहता है.
इस क्षेत्र के मतदाता ज्यादातर ग्रामीण और अर्ध-शहरी पृष्ठभूमि से आते हैं. इनमें किसान, कृषि मजदूर, मंदिर से जुड़े कर्मचारी, व्यापारी, परिवहन से जुड़े लोग और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं. यहां मतदान व्यवहार पर जातीय नेटवर्क, गांव के स्थानीय नेता और विधायक की जनता तक पहुंच का खास प्रभाव पड़ता है. इसके साथ ही सरकार की योजनाओं का जमीनी स्तर पर सही तरीके से पहुंचना भी मतदाताओं के फैसले में अहम भूमिका निभाता है. मंदिर समितियां और स्थानीय संगठन लोगों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
यह इलाका चट्टानी भूभाग, मंदिर की पहाड़ियों और बिखरे हुए गांवों से घिरा हुआ है. तिरुत्तनी कस्बा इस विधानसभा क्षेत्र का प्रशासनिक केंद्र है. सड़क मार्ग से यह क्षेत्र तिरुवल्लूर, अरक्कोनम और पास के आंध्र प्रदेश के कस्बों से जुड़ा हुआ है. हालांकि, अंदरूनी गांवों की सड़कें और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था कमजोर बनी हुई है. इसके साथ ही मौसमी जल संकट यहां की एक स्थायी समस्या है.
तिरुत्तनी क्षेत्र के सामने कई बुनियादी समस्याएं हैं. इनमें पीने के पानी की कमी और भूजल का तेजी से गिरता स्तर, सिंचाई की अनियमित व्यवस्था और जलाशयों (टैंकों) का सही रखरखाव न होना शामिल है. इसके अलावा, गांवों की अंदरूनी सड़कों की खराब हालत, सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित उपलब्धता, त्योहारों के दौरान साफ-सफाई, ट्रैफिक और सुरक्षा की समस्याएं भी गंभीर मुद्दे हैं. क्षेत्र में स्थानीय रोजगार के अवसर कम होने के कारण युवाओं का पलायन भी लगातार बढ़ रहा है.
यहां के किसान सिंचाई की स्थिर व्यवस्था और पानी की सुरक्षा चाहते हैं. मंदिर से जुड़े कर्मचारी और व्यापारी पर्यटन सुविधाओं के विकास और भीड़ प्रबंधन पर ध्यान देने वाले नेतृत्व की उम्मीद रखते हैं. ग्रामीण परिवार बेहतर सड़कें, पीने का पानी और कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता को प्राथमिकता देते हैं. युवा वर्ग स्थानीय रोजगार, कौशल प्रशिक्षण और शिक्षा के बेहतर अवसर चाहता है, जबकि वरिष्ठ और बुजुर्ग श्रद्धालु स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन सुविधाओं को सबसे अहम मानते हैं.
तिरुत्तनी विधानसभा क्षेत्र में मतदाता ऐसे नेताओं को पसंद करते हैं जो स्थानीय स्तर पर लगातार मौजूद रहें, धार्मिक संस्थानों का सम्मान करें, त्योहारों के दौरान व्यवस्थाओं को कुशलता से संभालें और बुनियादी सेवाओं की नियमित और प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करें. यही कारण है कि तिरुत्तनी एक रिश्तों और स्थानीय संपर्कों पर आधारित अत्यंत स्थानीय राजनीति वाला विधानसभा क्षेत्र माना जाता है.
G.hari
ADMK
L.akila
NTK
D.krishnamoorthi
DMDK
Nota
NOTA
D.paulraj
IND
V.p.vijayan
IND
N.magendiran
BSP
M.hari
IND
M.d.thanigai Malai
IJK
A.j.suresh
IND
S.shettu
IND
S.manikkam
AIJYMKG
K.chandran
IND
T.chandran
IND
Assembly Election News 2026 Live Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है. इस बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ममता बनर्जी के गढ़ में सत्ता हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है. अमित शाह ने बंगाल के लिए आज बीजेपी का मेनिफेस्टो जारी किया है. बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने ताजा इंटरव्यू में चुनावी राज्यों बंगाल, असम, केरलम, तमिलनाडु और वहां के मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. नबीन ने कहा कि बीजेपी शुरू से एक पॉलिसी पर काम करती आई है कि हम ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करते हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि हम सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने वाले लोग हैं. देखें बातचीत.
Assembly Election News 2026 Live Updates: विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है. असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे. वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है.
तमिलनाडु के चुनावी रण में TVK प्रमुख विजय के हमशक्लों की एंट्री ने मुकाबले को पूरी तरह 'सिनेमैटिक' बना दिया है. भारी गर्मी और प्रचार की बंदिशों के बीच, क्या पार्टी के ये 'बॉडी डबल्स' दिग्गज राजनेताओं के अनुभव और जमीनी संघर्ष पर भारी पड़ पाएंगे.
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को जांच के दौरान एडप्पाडी विधानसभा क्षेत्र के लिए पार्टी के मुख्य और डमी दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए हैं.
तमिलनाडु को सामाजिक न्याय की प्रयोगशाला माना जाता है, जिसका नतीजा है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में डीएमके और AIADMK ही नहीं कांग्रेस और बीजेपी ने भी किसी ब्राह्मण को उम्मीदवार नहीं बनाया है. सवाल उठता है कि आखिर क्यों ब्राह्मण प्रत्याशी देने से सियासी दल बच रहे हैं?
16 अप्रैल को बुलाए गए संसद सत्र में महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है. सरकार कानूनी रूप से 2029 के लोकसभा चुनाव में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करना चाहती है - विपक्ष को वैसे तो कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन टाइमिंग को लेकर सवाल जरूर उठाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में करुणानिधि को लेकर बड़ा बवाल मच गया है. विपक्षी नेता पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर हमला बोलते हुए दावा किया कि उन्होंने अपने ही पिता करुणानिधि को आखिरी दिनों में घर में कैद करके रखा था. उन्होंने कहा कि वह सिर्फ वही दोहरा रहे हैं जो स्टालिन के सगे भाई अलागिरि और करीबी नेता ए. राजा पहले ही कह चुके हैं.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के स्टालिन ने केंद्र की एनडीए सरकार और पीएम मोदी पर तीन-भाषा नीति लागू करने की चुनौती दी. उन्होंने सरकार पर हिंदी थोपने की नीति का कड़ा विरोध किया. स्टालिन महंगाई और एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर भी पीएम मोदी पर निशाना साधा.
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.