पल्लावरम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 30), जो चेन्नई के दक्षिणी उपनगरों में स्थित है, एक घनी आबादी वाला और बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है. यहां की पहचान इसकी बेहतरीन परिवहन कनेक्टिविटी, मिश्रित रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधियों, और लंबे समय से चली आ रही नागरिक समस्याओं से बनती है. यह इलाका GST रोड के किनारे स्थित है और चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास होने के कारण शहर के मुख्य हिस्सों को दक्षिणी उपनगरों और आसपास के जिलों से जोड़ने वाला एक अहम ट्रांजिट और रिहायशी हब बन गया है.
आईटी कॉरिडोर जैसे हाई-इनकम इलाकों से अलग, पल्लावरम की राजनीति रोजमर्रा की शहरी समस्याओं पर केंद्रित रहती है, जैसे जल निकासी (ड्रेनेज), सड़कें, पीने का पानी, सफाई, ट्रैफिक जाम और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता. यहां के मतदाता काफी व्यवहारिक (प्रैक्टिकल) हैं और वे नेताओं के काम को सीधे दिखने वाले परिणामों से आंकते हैं.
सामाजिक रूप से यह क्षेत्र काफी विविध है, जहां मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के परिवार रहते हैं. यहां छोटे व्यापारी, ट्रांसपोर्ट से जुड़े कामगार और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी बड़ी संख्या में हैं. पुराने बसने वाले लोगों के साथ-साथ शहरी कामकाजी वर्ग भी यहां रहता है. जाति का प्रभाव मौजूद है, लेकिन यह मुख्य मुद्दा नहीं है. लोग ज्यादा ध्यान रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर देते हैं. स्थानीय पार्षद, वार्ड नेटवर्क और समुदाय के नेता यहां बहुत प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं. मतदाता ऐसे विधायक (MLA) चाहते हैं जो आसानी से मिल सकें, क्षेत्र में दिखें और समस्याओं का समाधान करें. साथ ही, लोगों की उम्मीद रहती है कि विधायक नगर निगम, हाईवे, मेट्रो और एयरपोर्ट अधिकारियों के साथ अच्छा समन्वय बनाए रखें.
भौगोलिक रूप से यह पूरी तरह शहरी क्षेत्र है, जहां घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके और GST रोड के किनारे व्यावसायिक गतिविधियां काफी सक्रिय हैं. कुछ निचले इलाके ऐसे भी हैं जहां बारिश के समय पानी भर जाता है. यहां मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी मजबूत है, सबअर्बन रेलवे, मेट्रो (फेज II का प्रभाव), एयरपोर्ट की नजदीकी और प्रमुख सड़कें जैसे GST रोड शामिल हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में तिरुसुलम हिल, GST रोड का कमर्शियल इलाका, पल्लावरम रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र, बस टर्मिनल और बड़े जंक्शन, निचले रिहायशी इलाके, बाजार और स्कूल जोन, तथा एयरपोर्ट के आसपास के ट्रैफिक कॉरिडोर शामिल हैं.
मुख्य समस्याओं की बात करें तो यहां हर साल मानसून में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति, खराब स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज, GST रोड पर ट्रैफिक जाम, अंदरूनी सड़कों की खराब हालत, पीने के पानी की कमी और टैंकर पर निर्भरता, कचरा प्रबंधन की समस्याएं, और हाईवे व एयरपोर्ट के पास शोर व वायु प्रदूषण जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं.
मतदाताओं का मूड साफ है, लोग बाढ़ से बचाव, साफ-सफाई और नियमित पानी सप्लाई को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं. कामकाजी लोग और व्यापारी ट्रैफिक सुधार और पार्किंग व्यवस्था चाहते हैं. महिलाएं सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट और स्वच्छता पर जोर देती हैं, जबकि बुजुर्ग लोग बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और भरोसेमंद परिवहन की उम्मीद रखते हैं. खास बात यह है कि लोग मानसून के समय नेताओं की सक्रियता और जवाबदेही को बहुत ध्यान से देखते हैं.
Rajendran
ADMK
Minishree Kanagaraj
NTK
Senthil Arumugam
MNM
Murugesan
DMDK
Nota
NOTA
Karthick
BSP
Gokulkrishnan
TNLK
Serma Selvaraj
DMSK
Kumara Doss
IND
Sadam Hussain
IND
Ajithkumar
PT
Balaji
IND
Veeralakshmi
MIDP
Kanagaraj
IND
Michael
IND
Sathyaseelan
LJP
Ramachandran.r
IND
Perumal
IND
Sasikumar Lakshmipathy
NDPOSI
Sridharan
DRMRPMKKC
Kumar
AMGRDMK
Bhaskaran
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.