चेन्नई के उत्तर-पश्चिम में स्थित और तिरुवल्लूर जिले तक फैला अवडी (विधानसभा क्षेत्र संख्या-6) एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसकी पहचान बड़े रक्षा प्रतिष्ठानों, घनी रिहायशी बस्तियों, औद्योगिक रोजगार और तेजी से बढ़ते उपनगरीय विस्तार से बनती है.
हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) और अन्य आयुध इकाइयों के कारण यह इलाका राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है, जहां रक्षा-आधारित स्थिरता के साथ नागरिक शहरीकरण भी तेजी से बढ़ रहा है. यहां की राजनीति रोजगार की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे के रखरखाव, परिवहन कनेक्टिविटी और बढ़ती आबादी के दबाव से जुड़ी समस्याओं के इर्द-गिर्द घूमती है. सामाजिक रूप से यह क्षेत्र काफी विविध है, जिसमें रक्षा कर्मी व उनके परिवार, सरकारी कर्मचारी, औद्योगिक व निजी क्षेत्र के कामगार, व्यापारी, प्रवासी और पुराने निवासी शामिल हैं. वेतनभोगी और रक्षा-सेवा से जुड़े मतदाताओं की अधिकता के कारण जातिगत प्रभाव अपेक्षाकृत कम है, जबकि रक्षा यूनियनें, कर्मचारी संगठन, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और व्यापारी समूह जनमत को काफी प्रभावित करते हैं.
भौगोलिक रूप से अवडी में रक्षा भूमि, रिहायशी लेआउट, औद्योगिक क्षेत्र और अर्ध-शहरी विस्तार शामिल हैं. कनेक्टिविटी इसकी बड़ी ताकत है, जहां अवडी रेलवे स्टेशन, अम्बत्तूर, पूनमल्ली और तिरुवल्लूर को जोड़ने वाली मुख्य सड़कें तथा मजबूत बस नेटवर्क मौजूद हैं, हालांकि स्टेशन क्षेत्र में जाम, अंदरूनी सड़कों की हालत और जलनिकासी व्यवस्था बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.
प्रमुख इलाकों में अवडी टाउन, एचवीएफ और रक्षा कॉलोनियां, घनी नागरिक बस्तियां, औद्योगिक पॉकेट, बाज़ार और व्यावसायिक सड़कें शामिल हैं। मुख्य मुद्दों में मानसून के समय जलभराव और नालों का उफान, रेलवे स्टेशन व रक्षा गेटों के पास ट्रैफिक जाम, खराब अंदरूनी सड़कें, कुछ इलाकों में पीने के पानी की कमी, ठोस कचरा प्रबंधन की समस्याएं, औद्योगिक प्रदूषण और सरकारी अस्पतालों पर बढ़ता दबाव शामिल हैं.
मतदाताओं का मिजाज अनुशासन, भरोसेमंद बुनियादी ढांचा और तेज प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर संवेदनशील है. रक्षा व सरकारी कर्मचारी व्यवस्था और सुविधाओं की निरंतरता चाहते हैं, आम निवासी बाढ़ नियंत्रण, पानी और सफाई पर जोर देते हैं, महिलाएं सुरक्षा और परिवहन सुविधा को प्राथमिकता देती हैं, जबकि बुजुर्ग बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और पैदल चलने योग्य सड़कों की उम्मीद रखते हैं.
Pandiarajan K
ADMK
Vijayalakshmi G
NTK
Udhayakumar V
MNM
Nota
NOTA
Sankar N M
DMDK
Balasubramanian M
TNLK
Charles S
BSP
Pandiarajan G
IND
Jayakumar P
IND
Shanavas Khan J
IND
Nagaraj M
IND
Dharani K
IND
Sugumar M
IND
Banumathi
MIDP
Raman N
TMNP
Viswanathan R
MGRMKKT
Chandrasekar.a
IND
Venkatesan M
IND
Durgaprasad G
IND
Akilan T.m.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.